
बिलासपुर में अवैध प्लाटिंग शहर की बसाहट को लगातार अव्यवस्थित कर रहा है। बिलासपुर तहसील के अंतर्गत अवैध प्लाटिंग के 350 से अधिक मामले हैं लेकिन इनमें से नगर निगम ने केवल 31 के खिलाफ एफआईआर किया है। वहीं टाउन एंड कंट्री प्लानिंग ने धारा 36 और 37 के अंतर्गत 65 अवैध कालोनाइजर को नोटिस तो दे दिया पर परिवाद एकमात्र व्यक्ति के खिलाफ दायर किया गया।
जहां तक राजस्व विभाग की बात है तो कार्रवाई के मामले में उसके आंकड़े बहुत कम हैं। निगम एरिया के बाहर अवैध प्लाटिंग के मामलों में राजस्व विभाग को कार्रवाई का अधिकार है। सब जानते हैं कि अवैध प्लाटिंग के गोरखधंधे में करोड़ों के वारे न्यारे हो रहे हैं। ऐसे में यदि इनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हो रही हो तो इनसे जुड़े विभागों पर सवालिया निशान लग जाते हैं।
व्यवस्थित विकास में बाधा है अवैध प्लाटिंग
हैप्पी स्ट्रीट के शुभारंभ के मौके पर मंगलवार को डिप्टी सीएम अरुण साव ने बिलासपुर को अंतरराष्ट्रीय स्तर का शहर बनाने के उद्गार व्यक्त किए। जाहिर है कि शहर तभी व्यवस्थित होगा, जब अनियंत्रित और स्वरूप बिगाड़ने वाले अवैध प्लाटिंग बंद होंगे। जब तक अवैध कालोनाइजर की कारगुजारियां होंगी तब तक शहर व्यवस्थित नहीं होगा।
अवैध कालोनियों के लोग जानते हैं कि प्लाट लेने के बाद आज वह पानी, बिजली, सड़क, सफाई जैसी सुविधाओं के मोहताज हैं। अवैध कालोनियों को निगम और बिजली विभाग बिजली कनेक्शन तक नहीं देता। 20 से अधिक कालोनियां ऐसी हैं, जहां के लोग बुनियादी सहूलियतों को तरस रहे हैं।

जहां सबसे ज्यादा शिकायतें वहीं कार्रवाई नहीं
अवैध प्लाटिंग की सबसे ज्यादा शिकायतें सकरी लोखंडी, मंगला और तखतपुर क्षेत्र से आई हैं, लेकिन इन क्षेत्रों में कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। इसके अतिरिक्त आउटर के उस्लापुर, मोपका, खमतराई, बहतराई, बिजौर, तोरवा, कोनी, सिरगिट्टी, तिफरा में अनियोजित विकास हो रहा है। अवैध प्लाटिंग रोकने प्रशासन नाकाम है और लोग सस्ते प्लाट के चक्कर में लगातार ठगे जा रहे हैं।
जानकारों का कहना है कि प्रशासन यदि ठान ले तो अवैध प्लाटिंग एक ही बार में बंद हो जाएगी। इसके लिए जिला प्रशासन रजिस्ट्री कार्यालय को स्पष्ट निर्देश दे कि वह बिना डायवर्सन, ले आउट देखे किसी भी प्लाट की रजिस्ट्री न करें। ऐसा करने से थोक के भाव में हो रही रजिस्ट्री नियंत्रित हो जाएगी।
नगर निगम में पांच साल में 296 मामले
नगर निगम के अंतर्गत अवैध प्लाटिंग के मामलों में 2019 से तेजी आई, जब निगम सीमा का विस्तार हुआ। नगर निगम के भवन अधिकारी सुरेश शर्मा के मुताबिक पिछले 5 सालों में अवैध प्लाटिंग के 296 मामले दर्ज किए गए। इनमें से 31 प्रकरणों पर एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। FIR पर में उनका कहना है कि भूस्वामियों के बारे में जैसे-जैसे जानकारी मिलती जाएगी, कार्रवाई की जाएगी।
राजस्व विभाग से खसरा नंबर के आधार पर भूस्वामियों के नाम-पते मांगे गए हैं। उन्होंने बताया कि मेयर इन काउंसिल ने अवैध प्लाटिंग के मामले में 125 रुपए प्रति वर्ग फुट का विकास शुल्क निर्धारित किया है। अब अवैध प्लाटिंग करने वालों से शुल्क वसूलने के लिए उनके खिलाफ परिवाद दायर किया जाएगा।

टीएनसीपी में 65 को नोटिस, परिवाद एक के खिलाफ
नगर तथा ग्राम निवेश विभाग के संयुक्त संचालक भानुप्रताप सिंह पटेल का कहना है कि अवैध प्लाटिंग के मामले में निगम एरिया में नगर निगम तथा बाहर पंचायत क्षेत्रों में राजस्व विभाग को कार्रवाई का अधिकार है।
अवैध प्लाटिंग पर रोक लगाने के लिए नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम की धारा 36-37 के अंतर्गत परिवाद दायर करने का अधिकार संचालक को है। इस संबंध में 65 लोगों को नोटिस जारी किया गया है। सैदा में अवैध प्लाटिंग के एक मामले में परिवाद दायर किया गया है।

एसडीएम बोले- अवैध कालोनाइजर की लिस्ट निगम को भेजी
एसडीएम पीयूष तिवारी ने ‘दैनिक भास्कर’ से बातचीत में उन आरोपों से इनकार किया जिसमें राजस्व विभाग से अवैध कालोनाइजर, भू स्वामियों की जानकारी देने में विलंब की बात कही जाती है। उन्होंने कहा कि अवैध प्लाटिंग करने वालों की सूची राजस्व विभाग ने नगर निगम को भेजी है। उसी आधार पर कार्रवाई की जा रही है।
एसडीएम का कहना है कि जितनी डिटेल लीज डीड में रहती है, उसी आधार पर विभाग की ओर से जानकारी भेजी जाती है। बेनामी रजिस्ट्री के मामलों में जरूर भूस्वामी का पता नहीं मिल पाता। उन्होंने दावा किया कि अवैध प्लाटिंग के खिलाफ विभाग लगातार कार्रवाई कर रहा है।



