
रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा बड़े पैमाने पर आयोजित “सुशासन तिहार 2026” को जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान का अभियान बताया गया था। लेकिन अब सामने आए जिला-वार आधिकारिक आंकड़ों ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार राज्यभर में कुल 6,03,746 आवेदन एवं शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से 4,03,520 प्रकरणों का निराकरण दर्ज किया गया, जबकि चौंकाने वाली बात यह है कि 2,00,226 शिकायतें अब भी लंबित हैं।
अर्थात् हर तीन शिकायतों में लगभग एक शिकायत अब भी समाधान की प्रतीक्षा में है।
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🔥 किन जिलों में सबसे अधिक लंबित शिकायतें?
जिला-वार आंकड़ों के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि कई बड़े जिलों में लंबित मामलों की संख्या हजारों में पहुंच चुकी है।
🔴 रायपुर
– कुल आवेदन: 24,653
– निराकृत: 10,518
– लंबित: 14,135
राजधानी रायपुर राज्य का प्रशासनिक मुख्यालय होने के बावजूद लंबित मामलों में शीर्ष जिलों में शामिल दिखाई देता है।
🔴 दुर्ग
– कुल आवेदन: 19,596
– निराकृत: 10,964
– लंबित: 9,000
🔴 बिलासपुर
– कुल आवेदन: 17,344
– निराकृत: 10,394
– लंबित: 8,504
🔴 रायगढ़
– कुल आवेदन: 23,797
– निराकृत: 12,797
– लंबित: 11,179
🔴 जांजगीर-चांपा
– कुल आवेदन: 21,099
– निराकृत: 14,508
– लंबित: 6,590
जांजगीर-चांपा जिला राज्य के उन प्रमुख जिलों में शामिल है जहां शिकायतों की संख्या अत्यधिक रही। हालांकि निराकरण का प्रतिशत कई अन्य जिलों से बेहतर दिखाई देता है, फिर भी हजारों आवेदन अब भी लंबित हैं।
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⚠️ 14 हजार से अधिक लंबित शिकायतों वाला रायपुर
राजधानी रायपुर में अकेले 14 हजार से अधिक मामलों का लंबित रहना यह संकेत देता है कि शिकायतों के निपटारे की प्रक्रिया अभी भी अपेक्षित गति से नहीं चल रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि राज्य की राजधानी में ही इतनी बड़ी संख्या में आवेदन लंबित हैं, तो दूरस्थ जिलों की स्थिति का अनुमान सहज लगाया जा सकता है।
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🟠 क्या “निराकृत” का अर्थ वास्तव में समाधान है?
प्रशासनिक विश्लेषकों का कहना है कि केवल फाइल बंद कर देना और वास्तविक समाधान प्रदान करना दोनों अलग-अलग बातें हैं।
सबसे बड़ा प्रश्न यह है—
✔️ क्या निराकृत दर्शाए गए सभी मामलों में आवेदक संतुष्ट हैं?
✔️ क्या शिकायतों का भौतिक सत्यापन किया गया?
✔️ क्या विभागों ने केवल पोर्टल पर प्रकरण बंद किए या वास्तविक समाधान भी दिया?
✔️ क्या लंबित मामलों की समय-सीमा तय की गई है?
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🔵 आंकड़े बता रहे हैं जनता की वास्तविक परेशानी
6 लाख से अधिक शिकायतें यह दर्शाती हैं कि जनता आज भी राजस्व, पंचायत, आवास, पेयजल, सामाजिक सुरक्षा, बिजली, भूमि विवाद, प्रमाण पत्र, पेंशन तथा विभिन्न शासकीय सेवाओं से संबंधित समस्याओं का सामना कर रही है।
यदि शासन की व्यवस्थाएं पूरी तरह प्रभावी होतीं तो इतनी बड़ी संख्या में शिकायतें सामने नहीं आतीं।
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🟣 क्या विभागवार समीक्षा होगी?
लोक प्रशासन विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य शासन को निम्न बिंदुओं पर विशेष समीक्षा करनी चाहिए—
● किन विभागों के खिलाफ सबसे अधिक शिकायतें प्राप्त हुईं?
● किन जिलों में सबसे अधिक लंबित मामले हैं?
● किन अधिकारियों के क्षेत्राधिकार में शिकायतों का निराकरण धीमा रहा?
● क्या लंबित मामलों के लिए व्यक्तिगत जवाबदेही तय की गई है?
● क्या निराकृत मामलों का थर्ड पार्टी ऑडिट होगा?
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🔥 सुशासन तिहार के आंकड़ों ने खोल दी प्रशासनिक व्यवस्था की असली तस्वीर?
राज्य सरकार ने सुशासन तिहार को जनता और प्रशासन के बीच संवाद का माध्यम बताया था। लेकिन जब 2 लाख से अधिक शिकायतें लंबित दिखाई देती हैं, तो यह सवाल स्वाभाविक रूप से उठता है कि क्या जनता को वास्तव में सुशासन मिला या फिर शिकायतें केवल अभिलेखों में दर्ज होकर रह गईं?
जनता अब यह जानना चाहती है कि जिन समस्याओं को लेकर उसने शासन के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किए, उनका वास्तविक समाधान कब होगा।
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📌 मीडिया हाउस MPCG का विश्लेषण
यह केवल आंकड़ों की रिपोर्ट नहीं है। यह राज्य की प्रशासनिक जवाबदेही, शिकायत निवारण प्रणाली और जनविश्वास की परीक्षा है।
6,03,746 आवेदन इस बात का संकेत हैं कि जनता ने शासन पर भरोसा कर अपनी समस्याएं रखीं।
लेकिन 2,00,226 लंबित शिकायतें यह भी बता रही हैं कि अभी लाखों लोगों की उम्मीदें अधूरी हैं।
अब आवश्यकता केवल आंकड़े जारी करने की नहीं, बल्कि प्रत्येक लंबित प्रकरण की समयबद्ध समीक्षा, जिम्मेदारी निर्धारण और वास्तविक समाधान सुनिश्चित करने की है।
छत्तीसगढ़ की जनता अब जवाब चाहती है— शिकायत दर्ज हो गई, लेकिन समाधान कब मिलेगा?


