
महिला एवं बाल विकास विभाग जांजगीर-चांपा की योजनाओं पर गंभीर सवाल, सार्वजनिक धन और हितग्राही अधिकारों की सुरक्षा हेतु उच्चस्तरीय जांच की मांग
जांजगीर-चांपा। जिले में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं। जिला प्रशासन को प्रस्तुत एक विस्तृत शिकायत में विभाग के अंतर्गत संचालित पोषण आहार वितरण, टेक-होम राशन व्यवस्था, आंगनबाड़ी संचालन, कुपोषण उन्मूलन कार्यक्रम, मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना, दत्तक पुत्री योजना तथा विभिन्न वित्तीय सहायता योजनाओं में संभावित वित्तीय, प्रशासनिक, तकनीकी एवं प्रक्रियागत अनियमितताओं की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
शिकायत में कहा गया है कि महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाएं सीधे तौर पर गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं, नवजात शिशुओं, कुपोषित एवं अतिकुपोषित बच्चों, किशोरियों तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों से जुड़ी हुई हैं। इन योजनाओं के संचालन पर प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये का सार्वजनिक व्यय किया जाता है, इसलिए पारदर्शिता, वित्तीय अनुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है।
🔴 पोषण आहार एवं टेक-होम राशन वितरण व्यवस्था पर सवाल
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि विभागीय अभिलेखों एवं वास्तविक स्थिति के बीच अंतर की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। मांग की गई है कि यह जांच की जाए कि आंगनबाड़ी केंद्रों में दर्ज लाभार्थियों की वास्तविक संख्या और विभागीय पोर्टल में दर्ज आंकड़ों में कोई अंतर तो नहीं है।
साथ ही स्टॉक रजिस्टर, वितरण रजिस्टर, परिवहन अभिलेख, भंडारण दस्तावेज तथा वास्तविक वितरण की स्थिति का मिलान कर यह सत्यापित करने की मांग की गई है कि शासन से प्राप्त खाद्य सामग्री वास्तव में पात्र हितग्राहियों तक पहुंची अथवा नहीं।
शिकायत में यह भी आशंका व्यक्त की गई है कि कहीं लाभार्थियों की संख्या कृत्रिम रूप से बढ़ाकर अतिरिक्त खाद्यान्न उठाव, अतिरिक्त बिलिंग या अतिरिक्त भुगतान प्राप्त करने की स्थिति तो निर्मित नहीं की गई।
🟠 फोरेंसिक जांच की मांग
प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए लाभार्थियों के हस्ताक्षर, अंगूठा निशान, प्राप्ति रसीद तथा वितरण पंजी का फोरेंसिक सत्यापन कराने की मांग की गई है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इससे फर्जी वितरण, काल्पनिक लाभार्थी अथवा रिकॉर्ड में संभावित हेरफेर की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
🟡 कुपोषण उन्मूलन योजनाओं की भी जांच की मांग
गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं एवं गंभीर कुपोषित बच्चों के लिए संचालित योजनाओं के संबंध में स्वास्थ्य विभाग, आंगनबाड़ी केंद्रों तथा पोषण ट्रैकर में दर्ज आंकड़ों के तुलनात्मक परीक्षण की मांग की गई है।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि गंभीर कुपोषित एवं अतिकुपोषित बच्चों के उपचार, फॉलोअप एवं पुनर्वास संबंधी अभिलेखों की स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्र हितग्राहियों तक पहुंचा या नहीं।
🔵 मुख्यमंत्री कन्या विवाह एवं वित्तीय सहायता योजनाओं पर भी प्रश्न
शिकायत में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना, दत्तक पुत्री योजना एवं अन्य सहायता योजनाओं में लाभार्थी चयन प्रक्रिया, पात्रता परीक्षण तथा दस्तावेजों की स्वतंत्र जांच की मांग की गई है।
इसके अतिरिक्त विवाह आयोजन, सामग्री क्रय, उपहार वितरण, परिवहन एवं अन्य मदों में किए गए व्यय का वित्तीय और तकनीकी अंकेक्षण कराए जाने का आग्रह किया गया है।
🟣 आंगनबाड़ी केंद्रों की वास्तविक स्थिति जांचने की मांग
आंगनबाड़ी केंद्रों में दर्ज उपस्थिति और वास्तविक उपस्थिति के बीच सामंजस्य की जांच, भवन, पेयजल, शौचालय, पोषण कक्ष तथा शिक्षण सामग्री की उपलब्धता का भौतिक निरीक्षण कराने की मांग भी शिकायत में शामिल है।
इसके साथ ही अधिकारियों द्वारा किए गए निरीक्षणों की सत्यता तथा लापरवाह कार्मिकों के विरुद्ध की गई कार्रवाई की समीक्षा की मांग की गई है।
🔴 आपूर्ति एजेंसियों और भुगतानों का विशेष ऑडिट कराने की मांग
शिकायत में निविदा प्रक्रिया, कार्यादेश, आपूर्ति आदेश तथा भुगतान अभिलेखों का विशेष अंकेक्षण कराने का अनुरोध किया गया है।
मांग की गई है कि बैंक भुगतान, बिल, वाउचर, स्टॉक विवरण और परिवहन अभिलेखों का फोरेंसिक ऑडिट कराया जाए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहीं बिना आपूर्ति भुगतान, डुप्लीकेट भुगतान, अतिरिक्त भुगतान या काल्पनिक व्यय जैसी स्थिति तो निर्मित नहीं हुई।
इसके अलावा किसी विशेष एजेंसी को अनुचित लाभ पहुंचाने, पक्षपातपूर्ण चयन या संभावित मिलीभगत की परिस्थितियों की भी जांच की मांग उठाई गई है।
⚠️ रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और संदिग्ध भुगतानों पर नियंत्रण की मांग
शिकायत में अंतरिम राहत के रूप में यह मांग भी की गई है कि जांच की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सभी स्टॉक रजिस्टर, वितरण रजिस्टर, भुगतान फाइलें, निविदा दस्तावेज, पोषण ट्रैकर डेटा, बैंक विवरण, निरीक्षण प्रतिवेदन तथा अन्य अभिलेख तत्काल सुरक्षित रखे जाएं।
साथ ही जांच पूर्ण होने तक संदिग्ध वित्तीय दावों एवं भुगतानों पर आवश्यक प्रशासनिक नियंत्रण स्थापित करने का अनुरोध किया गया है।
🔥 स्वतंत्र जांच समिति गठित करने की मांग
शिकायतकर्ता ने कलेक्टर जांजगीर-चांपा से मांग की है कि पूरे प्रकरण की स्वतंत्र, निष्पक्ष, बहु-विभागीय एवं समयबद्ध जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित की जाए।
शिकायत में कहा गया है कि यदि जांच में सार्वजनिक धन की क्षति, रिकॉर्ड में हेरफेर, प्रक्रिया उल्लंघन अथवा अन्य अनियमितताएं सिद्ध होती हैं तो संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों, एजेंसियों एवं अन्य उत्तरदायी व्यक्तियों के विरुद्ध विभागीय, वित्तीय एवं विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
📌 जनहित का बड़ा प्रश्न
यह मामला केवल प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं, बच्चों और कमजोर वर्गों को मिलने वाले पोषण, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा अधिकारों से सीधे जुड़ा हुआ है। यदि शिकायत में उठाए गए बिंदु सत्य पाए जाते हैं तो यह सार्वजनिक धन के उपयोग, योजनाओं की पारदर्शिता और हितग्राहियों के अधिकारों से जुड़ा एक अत्यंत गंभीर विषय सिद्ध हो सकता है। अब निगाहें जिला प्रशासन पर हैं कि वह इस प्रकरण में क्या कदम उठाता है और क्या वास्तव में उच्चस्तरीय जांच प्रारंभ की जाती है।
वेबसाइट हेडिंग सुझाव (मल्टी-कलर डिज़ाइन हेतु):
🔴 महिला एवं बाल विकास विभाग में बड़ा खुलासा?
🟡 करोड़ों की योजनाओं पर उठे गंभीर सवाल
🔵 पोषण आहार से लेकर कन्या विवाह योजना तक जांच की मांग
🟣 कलेक्टर को सौंपा गया विस्तृत शिकायत पत्र
⚫ फोरेंसिक ऑडिट, रिकॉर्ड संरक्षण और उच्चस्तरीय जांच समिति की मांग


