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बच्चे की आस लिए INDIRA IVF पहुंची महिला को मिली मौत, पति बोला- यह हत्या है

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रायपुर। जिनके बच्चे नहीं होते वो ही इसका दर्द समझ सकते हैं. ऐसे ही सूनी गोद में बच्चे की आस लिए पंडरी स्थित INDIRA IVF पहुंची महिला को मौत मिली. अस्पताल प्रबंधन की बदमाशी का आलम यह था कि महिला की मौत के बाद भी उसके जिंदा होने का अहसास कराते हुए दूसरे निजी अस्पताल को रिफर कर दिया. लेकिन जब हकीकत सामने आई तो पति के साथ परिवार के तमाम सदस्य अवाक रह गए.

बच्चे के आस में राजनांदगाँव जिले के ग्राम लखोनी निवासी नीलम साहू अपने पति मनोज साहू के साथ पंडरी स्थित INDIRA IVF पहुंची थी. महिला की तमाम जांच के बाद ऑपरेशन की बात कही गई, लेकिन आरोप है कि अस्पताल में ऑपरेशन के लिए पर्याप्त स्टाफ ही नहीं था, जिसकी वजह से नीलम की मौत हो गई.

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कहां गोद में बच्चे को पाने की आस में पहुंचे पति मनोज साहू अपनी पत्नी की मौत से अवाक लाश को निहारे जा रहे थे. वे कहते हैं कि यह इलाज के दौरान मौत नहीं, बल्कि उनकी पत्नी की हत्या है. मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन ने चुपचाप एंबुलेंस बुलाकर दूसरे अस्पताल रिफर कर दिया. बच्चे की चाहत में अस्पताल पहुंचे थे, इन्होंने ने तो पत्नी को भी छीन लिया.

मृतका के देवर रूपेन्द्र साहू बताते हैं कि उनकी भाभी को किसी प्रकार की कोई बीमारी नहीं थी. इसकी जांच होनी चाहिए, और एक-एक दोषी व्यक्ति पर कार्रवाई हो. मौत के बाद कोरे कागज पर हस्ताक्षर करने के लिए दबाव बनाया जा रहा था. आखिर ऐसा क्या हुआ था कि हमें बिना बताए दूसरे हॉस्पिटल को रिफर किया गया?

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कोरे कागज में सफ़ाई

घटना की जानकारी लेने के लिए लल्लूराम डॉट कॉम की टीम INDIRA IVF हॉस्पिटल, पंडरी पहुंची तो हॉस्पिटल में सन्नाटा पसरा हुआ था. बाउंसर के भरोसे हॉस्पिटल को छोड़ प्रबंधन के तमाम ज़िम्मेदार फ़रार थे. अस्पताल प्रबंधन की ओर से एक ऐसा शख्स आया, जो मीडिया स्टेटमेंट देने की बात कह रहा था, लेकिन उसे यह तक नहीं मालूम क्या कहना है. उसका केवल एक ही कहना था कि मैं कुछ नहीं बता सकता. मुझे कोई जानकारी नहीं है. मैं सिर्फ ये कागज दे सकता हूं.

खाली पेपर में हस्ताक्षर क्यों?

अस्पताल में मरीज के ऑपरेशन के पहले एक फार्म में परिजनों का हस्ताक्षर होता है, नीलन के मामले में उल्टा था. ऑपरेशन के बाद एक कर्मचारी परिजनों के पास जाता है और ख़ाली पेपर में दस्तख़त करने के लिए मृतक के पति को कहता है, तब जाकर कुछ गड़बड़ होने की आशंका परिजनों को होता है. लल्लूराम डॉट कॉम के पास मौजूद वीडियो अगर नहीं होता तो अस्पताल प्रबंधन आसानी से कह देता कि मरीज की इलाज के दौरान मौत हो गई है. लेकिन सवाल यह है कि हॉस्पिटल स्टाफ़ मरीज़ को रिफर करने में क्यों भिड़ गए थे? परिजनों को रिफर की जानकारी क्यों नहीं दी गई?

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RAJIV RASTOGI NEWS NETWORK SERVICE

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