
जांजगीर-चांपा में विकास योजनाओं के साथ प्रशासनिक जवाबदेही भी बने सर्वोच्च प्राथमिकता
जनहित की विशेष रिपोर्ट | शिकायतों पर समयबद्ध जांच, अभिलेखों की पारदर्शिता और जवाबदेह प्रशासन ही जनता का विश्वास मजबूत कर सकता है
विशेष संवाददाता | MEDIA HOUSE MPCG
जांजगीर-चांपा जिला विकास योजनाओं, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और प्रशासनिक गतिविधियों के कारण प्रदेश के महत्वपूर्ण जिलों में गिना जाता है। सरकार की अनेक योजनाएं यहां संचालित हो रही हैं और करोड़ों रुपये सार्वजनिक विकास कार्यों पर व्यय किए जाते हैं। किंतु किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की वास्तविक सफलता केवल योजनाओं के क्रियान्वयन से नहीं, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता, विधिसम्मत निर्णयों और जनशिकायतों के निष्पक्ष निराकरण से भी मापी जाती है।
हाल के समय में जिले में कुछ ऐसे प्रकरणों की शिकायतें सामने आई हैं, जिनमें सरकारी भूमि के उपयोग, राजस्व अभिलेखों में कथित अनियमितताओं तथा शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया को लेकर प्रश्न उठाए गए हैं। इन मामलों पर संबंधित अधिकारियों के समक्ष आवेदन भी प्रस्तुत किए गए हैं। ऐसे मामलों में अंतिम सत्य का निर्धारण केवल सक्षम जांच के माध्यम से ही संभव है, इसलिए निष्पक्ष जांच ही सबसे महत्वपूर्ण कदम है।
1. सरकारी भूमि केवल राजस्व अभिलेख नहीं, बल्कि सार्वजनिक संपत्ति है
चरनोई, घास भूमि, तालाब, निस्तार भूमि और अन्य शासकीय भूमि किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझा संपत्ति होती है। यदि ऐसी भूमि के संबंध में किसी प्रकार की अनियमितता की शिकायत प्राप्त होती है, तो उसका तकनीकी, राजस्व और विधिक परीक्षण समयबद्ध तरीके से होना चाहिए।
2. राजस्व अभिलेखों की शुद्धता प्रशासन की विश्वसनीयता का आधार
खसरा, नक्शा, बी-1, रिकॉर्ड ऑफ राइट्स और अन्य राजस्व अभिलेख भूमि स्वामित्व और उपयोग के सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज हैं। यदि किसी अभिलेख में त्रुटि या अनियमितता की शिकायत आती है, तो उसका परीक्षण पारदर्शी प्रक्रिया से होना आवश्यक है। रिकॉर्ड की शुद्धता ही भविष्य के विवादों को रोकती है।
3. शिकायत का समाधान ही पर्याप्त नहीं, कारण की भी जांच आवश्यक
यदि किसी शिकायत के बाद रिकॉर्ड में सुधार किया जाता है, तो यह भी देखा जाना चाहिए कि त्रुटि क्यों हुई, कब हुई और किस प्रक्रिया में हुई। इससे भविष्य में ऐसी स्थितियों की पुनरावृत्ति रोकने में मदद मिलती है।
4. प्रशासनिक जवाबदेही से बढ़ता है जनविश्वास
किसी भी जिले में जनता का विश्वास तब मजबूत होता है जब शिकायतों का निराकरण निष्पक्ष, समयबद्ध और दस्तावेज़-आधारित तरीके से किया जाता है। पारदर्शी कार्रवाई प्रशासन की सबसे बड़ी पूंजी होती है।
5. विकास योजनाएं और विधि का शासन साथ-साथ चलें
सड़क, भवन, पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य योजनाएं आवश्यक हैं, लेकिन यदि भूमि, राजस्व और सार्वजनिक संपत्ति से जुड़े मामलों में पारदर्शिता नहीं होगी, तो विकास की विश्वसनीयता भी प्रभावित हो सकती है।
6. रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण और नियमित ऑडिट समय की आवश्यकता
राजस्व रिकॉर्ड का डिजिटल सत्यापन, समय-समय पर ऑडिट, जियो-रेफरेंसिंग और सार्वजनिक निरीक्षण जैसी व्यवस्थाएं विवादों को कम कर सकती हैं और पारदर्शिता बढ़ा सकती हैं।
7. जिम्मेदारी तय होना भी सुशासन का हिस्सा
यदि किसी जांच में प्रक्रिया संबंधी त्रुटि, लापरवाही या नियमों का उल्लंघन प्रमाणित होता है, तो नियमानुसार उत्तरदायित्व तय किया जाना चाहिए। इससे ईमानदारी से कार्य करने वाले अधिकारियों का मनोबल भी बढ़ता है।
8. निष्पक्ष प्रशासन लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत
प्रशासन का दायित्व किसी राजनीतिक दल के पक्ष या विपक्ष में नहीं, बल्कि संविधान, कानून और जनता के प्रति होता है। यही निष्पक्षता लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता का आधार है।
9. जनहित में स्वतंत्र और बहु-विभागीय जांच का महत्व
जहां भूमि, राजस्व, पंचायत या अन्य विभागों के अभिलेख जुड़े हों, वहां आवश्यकता होने पर बहु-विभागीय जांच से तथ्यों की निष्पक्ष पुष्टि की जा सकती है। इससे निर्णय अधिक विश्वसनीय बनते हैं।
10. जनता का विश्वास ही प्रशासन की सबसे बड़ी उपलब्धि
किसी भी कलेक्टर, जिला प्रशासन या विभाग की सबसे बड़ी सफलता केवल योजनाओं की संख्या नहीं, बल्कि यह होती है कि आम नागरिक यह महसूस करे कि उसकी शिकायत सुनी जाएगी, निष्पक्ष जांच होगी और यदि कहीं नियमों का उल्लंघन हुआ है तो कानून के अनुसार कार्रवाई भी होगी।
निष्कर्ष
जांजगीर-चांपा जैसे महत्वपूर्ण जिले में विकास और सुशासन दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। यदि प्रशासन विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ-साथ राजस्व अभिलेखों, सार्वजनिक भूमि, जनशिकायतों और जवाबदेही के मामलों पर समान गंभीरता से ध्यान देता है, तो जनता का विश्वास और मजबूत होगा। लोकतंत्र की सबसे बड़ी पहचान यही है कि सार्वजनिक पद पर बैठा प्रत्येक अधिकारी कानून, पारदर्शिता और जनहित के प्रति समान रूप से उत्तरदायी रहे।



