Advertisment
देश

भारत क्या चीन जैसी विशाल दीवार बना रहा है…पाकिस्तान को क्यों हो रही है टेंशन?

S-G-Travels
WhatsApp-Image-2026-06-17-at-4.28.41-PM-300x200
WhatsApp Image 2026-07-05 at 5.05.16 PM

नई दिल्ली: भारत एक विशाल ‘दीवार” बनाने जा रहा है। यह दीवार गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली तक 1,400 किलोमीटर लंबी होगी। इस दीवार का मकसद कुछ ऐसा है कि इससे पाकिस्तान की सीमा से सटे रेगिस्तानी इलाके फिर से हरे-भरे हो जाएंगे। दरअसल, इस दीवार का मकसद अरावली पर्वत श्रृंखला को फिर से हरा-भरा बनाना है। इसके लिए प्राकृतिक जंगल, नए पेड़-पौधे, खेती की जमीन और पानी के स्रोत बनाए जाएंगे। यानी सूखी धरती पर फिर से जीवन फूट पड़ेगा। जानते हैं क्या है यह हरित दीवार, क्यों इसे बनाया जा रहा है? क्या यह चीन की दीवार जैसी होगी? इसे अफ्रीका की दीवार जैसा क्यों बताया जा रहा है?

क्या है ग्रेट ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट, पहले इसे जानिए

गुजरात के पोरबंदर से दिल्ली में महात्मा गांधी की समाधि राजघाट तक भारत 1,400 किमी लंबी एक हरित दीवार भारत बना रहा है। यह महात्मा गांधी की जन्मभूमि और समाधि स्थल को प्रतीकात्मक रूप से जोड़ेगी। राजस्थान और हरियाणा के 27 जिलों में फैला यह अरावली पुनर्वनीकरण प्रोजेक्ट है। इसमें 1.15 मिलियन हेक्टेयर में जंगल बहाल होंगे, पेड़ लगेंगे और खेती योग्य जमीन और जल निकायों को पुनर्जीवित किया जाएगा। 5 किमी चौड़ी यह हरित दीवार कार्बन सिंक का काम करेगी।

इसे भी पढ़ें:  चिन्नास्वामी भगदड़ में मारे गए लोगों के लिए RCB का बड़ा ऐलान, हर परिवार को दिए जाएंगे इतने लाख रुपये

क्या है ग्रेट ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट का मकसद

भारत अपनी एक बड़ी ‘ग्रीन वॉल’ बनाने जा रहा है। यह एक बहुत बड़ा पेड़ लगाने का प्रोजेक्ट है। इसका मकसद रेगिस्तान को बढ़ने से रोकना, धूल-प्रदूषण कम करना, जमीन के नीचे पानी बढ़ाना और जलवायु परिवर्तन से लड़ना है। यह गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली तक फैलेगी। यह प्रोजेक्ट अफ्रीकन यूनियन के ‘ग्रेट ग्रीन वॉल’ प्रोजेक्ट से प्रेरित है।

कितनी होगी इस परियोजना की लागत

इस प्रोजेक्ट की लागत लगभग 7,500 करोड़ रुपये है। इसके लिए केंद्र 78%, राज्य 20% और अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियां 2% फंड देंगी। यह प्रोजेक्ट 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है। यह भारत के 2030 तक 25 मिलियन हेक्टेयर बंजर भूमि को बहाल करने के लक्ष्य के साथ मेल खाता है।

भारत के लिए क्यों जरूरी है यह परियोजना

दरअसल, भारत का रेगिस्तान थार पूर्व की ओर बढ़ रहा है। धूल-मिट्टी का प्रदूषण बढ़ रहा है। भूजल का स्तर गिर रहा है। मौसम का मिजाज भी बिगड़ रहा है। आंधी-तूफान जैसी मुसीबतें बढ़ रही हैं। यह हरित दीवार इन सभी समस्याओं से निपटने में मदद करेगी। अरावली पर्वत श्रृंखला इस प्रोजेक्ट में बहुत अहम है। यह थार रेगिस्तान और उत्तरी मैदानों के बीच एक प्राकृतिक दीवार का काम करती है। इस प्रोजेक्ट से अरावली को फिर से हरा-भरा करके इस दीवार को और मजबूत बनाया जाएगा। इससे पूरे क्षेत्र का पर्यावरण संतुलित रहेगा। इससे पाकिस्तान सीमा तक पहुंच भी आसान होगी।

इसे भी पढ़ें:  बांग्लादेश की एक और नापाक हरकत, ‘चिकन नेक’ पर तैनात किए टार्किश ड्रोन, Indian Army हाई अलर्ट पर

क्या इस तरह की परियोजना कहीं और भी है

अफ्रीकी यूनियन ने भी एक ग्रेट ग्रीन वॉल बनाई जा रही है। 2007 में शुरू हुई यह वॉल करीब 8,000 किलोमीटर लंबी है और पूरे अफ्रीका में फैली हुई है। भारत का यह प्रोजेक्ट उससे प्रेरित है। लेकिन इसे अरावली क्षेत्र के हिसाब से ढाला गया है। जैसे अलग-अलग जगहों के लिए अलग-अलग नुस्खे होते हैं। वहां इस परियोजना की लागत करीब 2.8 लाख करोड़ रुपए है। हालांकि, यह अभी तक सिर्फ 25% ही पूरी हो पाई है। इससे पता चलता है कि ऐसे बड़े प्रोजेक्ट में कितनी मुश्किलें आती हैं।

इसे भी पढ़ें:  देश के 11.7 लाख स्टूडेंट्स स्कूलों से बाहर, इस राज्य के सबसे ज्यादा बच्चे, चौंकाने वाले है ये आंकड़े

क्या हैं इस परियोजना के समक्ष चुनौतियां

इस प्रोजेक्ट के सामने कई तरह की चुनौतियां हैं। जमीन के छोटे-छोटे टुकड़ों में बंटा होना एक बड़ी समस्या है। ज्यादातर जमीन निजी हाथों में है। कई अलग-अलग विभागों को साथ मिलकर काम करना होगा। हरित दीवार के लिए एक साथ जुड़ी हुई ज़मीन मिलना मुश्किल है। सभी संबंधित लोगों को एक साथ काम करने के लिए राजी करना भी एक चुनौती है। इससे धूल-मिट्टी का प्रदूषण कम होगा। भूजल स्तर बढ़ेगा। मौसम में सुधार होगा। स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा। पेड़-पौधे लगाने और खेती-बाड़ी से उनकी आमदनी बढ़ेगी।

इसलिए जरूरी है भारत के लिए यह प्रोजेक्ट

भारत में करीब 9.185 करोड़ हेक्टेयर जमीन बंजर है। यह देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 30% है। हरित दीवार प्रोजेक्ट 2030 तक 2.5 करोड़ हेक्टेयर बंजर जमीन को फिर से उपजाऊ बनाने के बड़े प्रयास का हिस्सा है। हरित दीवार एक तरह से कार्बन सिंक का काम करेगी। यह वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड सोख लेगी। इससे जलवायु परिवर्तन को कम करने में मदद मिलेगी।

mediahousempcg

RAJIV RASTOGI NEWS NETWORK SERVICE

Related Articles