
पटाखों के कारोबार में करोड़ों का खेल या सरकारी निगरानी का महज दिखावा? जांजगीर-चांपा में GST, लाइसेंस और बारूद के भंडारण पर उठे गंभीर सवाल
दीपावली के कुछ दिनों में करोड़ों का कारोबार, पक्के बिल की जगह बिना GSTIN की रसीदें देने की शिकायतें, शहरों के बीच पटाखों का भंडारण और सुरक्षा नियमों की अनदेखी के आरोप। आखिर किसकी निगरानी में चल रहा है यह कारोबार? GST विभाग, पुलिस, प्रशासन और विस्फोटक सुरक्षा से जुड़े जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कब होगी?
छत्तीसगढ़ के जिला जांजगीर-चांपा में पटाखा कारोबार को लेकर कई ऐसे सवाल सामने आ रहे हैं, जिनका जवाब केवल दुकानदारों से नहीं, बल्कि उन तमाम सरकारी विभागों से भी मांगा जाना चाहिए जिनके कंधों पर राजस्व संरक्षण, विस्फोटक सुरक्षा, कानून व्यवस्था और आम नागरिकों की जान-माल की रक्षा की जिम्मेदारी है।
दीपावली के अवसर पर पटाखों की खरीद-बिक्री का कारोबार अचानक बड़े पैमाने पर सक्रिय हो जाता है। कुछ ही दिनों के भीतर लाखों से लेकर करोड़ों रुपये तक का व्यापार होने की संभावना रहती है। जिले के जांजगीर, चांपा, अकलतरा, बलौदा, शिवरीनारायण और अन्य नगरीय एवं कस्बाई क्षेत्रों में पटाखों की दुकानों, अस्थायी बिक्री केंद्रों और भंडारण व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति का परीक्षण किया जाना आवश्यक है।
लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या इस पूरे कारोबार का वास्तविक वित्तीय हिसाब सरकारी अभिलेखों में दर्ज होता है? क्या प्रत्येक बिक्री का विधिवत बिल जारी किया जाता है? क्या लाइसेंसधारियों द्वारा खरीदी गई और बेची गई विस्फोटक सामग्री का पूरा हिसाब रखा जाता है? क्या निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप ही पटाखों का भंडारण और विक्रय किया जाता है?
या फिर इस कारोबार के एक हिस्से में ऐसी व्यवस्थाएं चल रही हैं, जिनका वास्तविक स्वरूप सरकारी निगरानी और राजस्व व्यवस्था से बाहर है?
1. पक्के बिल की जगह बिना GSTIN की रसीदें: आखिर किसके खाते में जा रहा है कारोबार?
पटाखा कारोबार को लेकर सबसे गंभीर सवाल GST व्यवस्था की पारदर्शिता पर उठता है।
सूत्रों से प्राप्त शिकायतों एवं स्थानीय स्तर पर सामने आ रही चर्चाओं के अनुसार, कुछ स्थानों पर ग्राहकों को विधिवत टैक्स इनवॉइस के स्थान पर साधारण पर्चियां अथवा ऐसी रसीदें दिए जाने की बात कही जा रही है, जिन पर GSTIN सहित आवश्यक कर संबंधी विवरण स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं होते।
यदि ऐसा हो रहा है तो इसकी जांच बेहद आवश्यक है।
यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि प्रत्येक दुकानदार के लिए GST पंजीकरण की अनिवार्यता उसके कारोबार, निर्धारित टर्नओवर और लागू वैधानिक प्रावधानों पर निर्भर करती है। लेकिन जहां GST पंजीकरण एवं कर चालान अनिवार्य है, वहां बिना उचित बिल के बिक्री, वास्तविक कारोबार छिपाने अथवा कर देयता कम दिखाने की आशंका गंभीर वित्तीय अनियमितता का विषय बन सकती है।
जांच का विषय यह होना चाहिए कि:
– जिले के कितने पटाखा कारोबारियों का GST पंजीकरण है?
– कितने कारोबारियों ने पिछले तीन वर्षों में GST रिटर्न दाखिल किया है?
– वास्तविक खरीद और बिक्री का विवरण रिटर्न में दर्ज कारोबार से मेल खाता है या नहीं?
– थोक विक्रेताओं से खरीदे गए पटाखों के बिल और दुकानदारों द्वारा जारी किए गए बिक्री बिलों का मिलान हुआ है या नहीं?
– क्या बिना GSTIN वाली पर्चियों के माध्यम से बिक्री किए जाने की शिकायतों की जांच की गई है?
– क्या कारोबारियों के स्टॉक, खरीद मूल्य, बिक्री मूल्य और घोषित टर्नओवर का तुलनात्मक परीक्षण किया गया है?
यदि करोड़ों रुपये का कारोबार होता है, तो उसका वित्तीय रिकॉर्ड भी होना चाहिए। केवल लाइसेंस जारी कर देना और उसके बाद पूरे कारोबार की वास्तविक बिक्री एवं कर अनुपालन की समीक्षा नहीं करना प्रशासनिक निगरानी की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करता है।
2. करोड़ों की खरीद-बिक्री, लेकिन पटाखों का हिसाब कौन रखता है?
पटाखा कारोबार सामान्य खुदरा व्यापार नहीं है। इसमें विस्फोटक सामग्री की खरीद, परिवहन, भंडारण, वितरण, बिक्री और शेष स्टॉक का हिसाब महत्वपूर्ण होता है।
ऐसे में सवाल है कि जिले में जारी किए गए पटाखा लाइसेंसों के आधार पर कितने कारोबारियों ने कितनी मात्रा में पटाखे खरीदे? किस अधिकृत निर्माता अथवा थोक विक्रेता से खरीदे? कितनी सामग्री दुकानों तक पहुंची? कितनी बेची गई? कितनी सामग्री शेष बची? और बची हुई सामग्री का बाद में क्या किया गया?
क्या संबंधित विभाग इन सभी तथ्यों का नियमित सत्यापन करता है?
यदि किसी लाइसेंसधारी ने बड़ी मात्रा में पटाखे खरीदे हैं, लेकिन उसके बिक्री अभिलेख में बहुत कम कारोबार दिखाया गया है, तो उस अंतर की जांच कौन करेगा?
क्या लाइसेंस जारी करने के बाद संबंधित विभाग स्टॉक रजिस्टर, खरीद बिल, बिक्री रजिस्टर और शेष सामग्री का भौतिक सत्यापन करता है?
क्या पटाखों की बिक्री समाप्त होने के बाद बची हुई सामग्री के सुरक्षित भंडारण, वापसी अथवा नियमानुसार निस्तारण का रिकॉर्ड लिया जाता है?
इन सवालों का जवाब सार्वजनिक होना चाहिए।
3. शहरों के बीच बारूद का भंडारण: किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार क्यों?
इस पूरे मामले का सबसे संवेदनशील पहलू आम नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।
स्थानीय स्तर पर ऐसी शिकायतें सामने आ रही हैं कि कुछ पटाखा कारोबारी घनी आबादी वाले क्षेत्रों में स्थित दुकानों, व्यावसायिक परिसरों अथवा अन्य स्थानों पर बड़ी मात्रा में पटाखों का भंडारण करते हैं।
यदि किसी स्थान पर वास्तव में निर्धारित क्षमता से अधिक विस्फोटक सामग्री रखी जा रही है, अथवा लाइसेंस में स्वीकृत स्थान और वास्तविक भंडारण स्थल अलग-अलग हैं, तो यह अत्यंत गंभीर सुरक्षा विषय है।
पटाखों में मौजूद विस्फोटक सामग्री के कारण आग अथवा अन्य आकस्मिक दुर्घटना की स्थिति में आसपास के मकान, दुकानें, बाजार, राहगीर और आम नागरिक गंभीर जोखिम में आ सकते हैं।
सवाल यह है कि क्या जांजगीर, चांपा, अकलतरा, बलौदा और शिवरीनारायण में पटाखों के भंडारण स्थलों का वास्तविक निरीक्षण किया गया है?
क्या अधिकारियों ने यह देखा है कि:
– भंडारण स्थल स्वीकृत लाइसेंस में दर्ज स्थान पर ही संचालित हो रहा है या नहीं?
– निर्धारित मात्रा से अधिक पटाखे तो संग्रहित नहीं हैं?
– दुकान और गोदाम के लिए निर्धारित सुरक्षा शर्तों का पालन हो रहा है?
– घनी आबादी, आवासीय भवनों और भीड़भाड़ वाले बाजारों के बीच विस्फोटक सामग्री तो नहीं रखी गई है?
– अग्निशमन उपकरण, सुरक्षित निकास और अन्य आवश्यक सुरक्षा व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं?
– परिवहन के दौरान विस्फोटक सामग्री के लिए लागू सुरक्षा नियमों का पालन हो रहा है?
यह केवल किसी एक दुकानदार की जिम्मेदारी नहीं है। लाइसेंसिंग प्राधिकारी, विस्फोटक सुरक्षा से संबंधित विभाग, स्थानीय प्रशासन, पुलिस और अग्निशमन व्यवस्था को अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में जवाबदेह होना चाहिए।
प्रशासन की जिम्मेदारी किसी दुर्घटना के बाद मुआवजा और जांच कराना भर नहीं है। उसकी पहली जिम्मेदारी दुर्घटना होने से पहले खतरे को पहचानना और उसे रोकना है।
4. क्या लाइसेंस केवल कारोबार की अनुमति है या सुरक्षा नियमों का पालन भी अनिवार्य है?
पटाखों की बिक्री और भंडारण के लिए लागू विस्फोटक संबंधी कानूनों एवं नियमों के तहत निर्धारित अनुमतियों और शर्तों का पालन आवश्यक है।
ऐसे में यह पता लगाना जरूरी है कि जिले में कितने स्थायी और अस्थायी पटाखा बिक्री लाइसेंस जारी किए गए? कितने लाइसेंस नवीनीकृत हुए? किन स्थानों पर बिक्री की अनुमति दी गई? कितने निरीक्षण किए गए? कितने मामलों में नियमों का उल्लंघन मिला और कितनी कार्रवाई की गई?
लाइसेंस जारी करने के बाद निरीक्षण की जिम्मेदारी किस अधिकारी की है?
क्या केवल दीपावली से पहले कागजी औपचारिकताएं पूरी कर ली जाती हैं या वास्तविक स्थल पर जाकर भंडारण, बिक्री और सुरक्षा मानकों की जांच भी होती है?
यदि कोई कारोबारी स्वीकृत दुकान के अतिरिक्त किसी दूसरे स्थान पर पटाखे रखता है, तो उसकी जवाबदेही क्या है?
क्या लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित प्राधिकारी को रिपोर्ट भेजी जाती है? क्या लाइसेंस निलंबन या निरस्तीकरण की कार्रवाई हुई है?
इन तमाम तथ्यों को सार्वजनिक किए बिना यह दावा करना कठिन है कि जिले में पटाखा कारोबार पूरी तरह सुरक्षित और नियमबद्ध है।
5. प्रशासन, पुलिस और GST विभाग की भूमिका पर भी उठने चाहिए सवाल
पटाखों के कारोबार में किसी प्रकार की अनियमितता रोकने की जिम्मेदारी एक विभाग की नहीं है।
राजस्व प्रशासन, पुलिस विभाग, विस्फोटक सुरक्षा से संबंधित प्राधिकारी, अग्निशमन विभाग और GST विभाग की अलग-अलग वैधानिक जिम्मेदारियां हैं।
ऐसे में संबंधित तहसीलदार, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), कार्यपालिक मजिस्ट्रेट, थाना प्रभारी और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की भूमिका उनके अधिकार क्षेत्र एवं जारी निर्देशों के अनुसार जांच के दायरे में आनी चाहिए।
क्या संबंधित अधिकारियों ने अपने क्षेत्र में संचालित पटाखा दुकानों का निरीक्षण किया?
क्या बाजारों में अवैध अथवा असुरक्षित भंडारण की शिकायतें प्राप्त हुईं?
क्या शिकायतों पर कार्रवाई की गई?
क्या पुलिस थानों में इस संबंध में कोई निरीक्षण रजिस्टर, कार्रवाई प्रतिवेदन अथवा सुरक्षा रिपोर्ट उपलब्ध है?
क्या प्रशासन को किसी कारोबारी द्वारा नियमों के विरुद्ध पटाखों के भंडारण या बिक्री की जानकारी मिली थी?
यदि जानकारी थी, तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
और यदि जानकारी नहीं थी, तो सवाल यह है कि जिम्मेदार अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था आखिर किस काम के लिए है?
6. क्या करोड़ों के कारोबार के पीछे डार्क मनी और कमीशन की आशंका की भी जांच होनी चाहिए?
पटाखा कारोबार में कथित अनियमितताओं की चर्चा के साथ एक और गंभीर प्रश्न उठता है—क्या कहीं वास्तविक बिक्री और घोषित कारोबार के बीच बड़ा अंतर तो नहीं है?
यदि किसी कारोबारी का वास्तविक व्यापार उसके घोषित टर्नओवर से काफी अधिक है, तो उस अंतर का वित्तीय परीक्षण होना चाहिए।
इसी प्रकार यदि किसी स्थान पर बिना बिल की बिक्री, संदिग्ध नकद लेनदेन, खरीद-बिक्री के अभिलेखों में अंतर अथवा अवैध भंडारण की पुष्टि होती है, तो संबंधित विभागों को कानून के अनुसार जांच करनी चाहिए।
यह भी जांच का विषय होना चाहिए कि कहीं किसी अधिकारी अथवा कर्मचारी ने अपने वैधानिक कर्तव्य का पालन करने के बदले अनुचित लाभ तो प्राप्त नहीं किया?
हालांकि किसी विशेष अधिकारी, विभाग अथवा कारोबारी द्वारा कमीशन लेने या डार्क मनी के लेनदेन का आरोप बिना प्रमाण सिद्ध नहीं माना जा सकता। लेकिन यदि ऐसी शिकायतें मौजूद हैं, तो निष्पक्ष वित्तीय एवं प्रशासनिक जांच के माध्यम से उनका सत्यापन किया जाना चाहिए।
सवाल यह नहीं है कि किस अधिकारी पर आरोप लगा दिया जाए। सवाल यह है कि यदि किसी क्षेत्र में लगातार नियमों की अनदेखी हो रही है, तो उसकी जवाबदेही तय करने की व्यवस्था कहां है?
7. शिवरीनारायण से लेकर अकलतरा तक: क्या दुकानों का वास्तविक निरीक्षण हुआ?
जिले के अलग-अलग नगरीय और कस्बाई क्षेत्रों में पटाखा कारोबार की वास्तविक स्थिति का तुलनात्मक परीक्षण होना चाहिए।
शिवरीनारायण, अकलतरा, बलौदा, जांजगीर और चांपा जैसे क्षेत्रों में संचालित दुकानों और भंडारण स्थलों की जांच करते हुए यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि कितने कारोबारियों के पास वैध लाइसेंस हैं और कितने निर्धारित शर्तों के अनुरूप व्यापार कर रहे हैं।
विशेष रूप से यह देखा जाना चाहिए कि कहीं अस्थायी बिक्री लाइसेंस की आड़ में स्थायी भंडारण तो नहीं किया जा रहा है? कहीं एक स्थान के लाइसेंस का उपयोग दूसरे स्थान पर तो नहीं हो रहा है? कहीं बिक्री की अनुमति से अधिक मात्रा में विस्फोटक सामग्री तो नहीं रखी जा रही है?
साथ ही खिलौनों एवं अन्य सहायक उत्पादों की बिक्री को भी अलग से जांच के दायरे में लिया जाना चाहिए। जहां GST लागू होता है, वहां उन उत्पादों के बिल, खरीद और कर अनुपालन का भी परीक्षण होना चाहिए।
8. दीपावली के कुछ दिनों में करोड़ों का कारोबार: वास्तविक आंकड़ा सामने क्यों नहीं आता?
दीपावली के आसपास पटाखा कारोबार में भारी आर्थिक गतिविधियां होती हैं। स्थानीय स्तर पर इस कारोबार के 100 करोड़ रुपये तक पहुंचने जैसी चर्चाएं भी हो सकती हैं, लेकिन ऐसे किसी आंकड़े को आधिकारिक रिकॉर्ड के बिना प्रमाणित नहीं माना जा सकता।
इसीलिए जिला प्रशासन और GST विभाग को वास्तविक आंकड़े सार्वजनिक करने चाहिए।
पिछले तीन से पांच वर्षों में जिले में पटाखों की कुल खरीद कितनी रही? कुल बिक्री कितनी हुई? कितने लाइसेंस जारी हुए? कुल कितनी मात्रा में विस्फोटक सामग्री की अनुमति दी गई? कितना GST घोषित और जमा किया गया? कितने निरीक्षण हुए और कितने उल्लंघन पाए गए?
यदि वास्तविक कारोबार का आंकड़ा सामने आ जाए, तो यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि सरकारी राजस्व को अपेक्षित कर प्राप्त हुआ या नहीं।
करोड़ों के कारोबार की चर्चा और सरकारी राजस्व के वास्तविक आंकड़ों के बीच पारदर्शिता होना जरूरी है।
9. GST विभाग से सीधे सवाल: क्या केवल रिटर्न स्वीकार करना ही निगरानी है?
GST विभाग की भूमिका इस मामले में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
विभाग को जोखिम आधारित जांच के माध्यम से यह परीक्षण करना चाहिए कि थोक विक्रेताओं की बिक्री और खुदरा कारोबारियों की खरीद में सामंजस्य है या नहीं।
क्या बड़ी मात्रा में पटाखे खरीदने वाले कारोबारियों के टर्नओवर का परीक्षण किया गया?
क्या घोषित बिक्री, खरीद बिल, स्टॉक और बैंकिंग लेनदेन में समानता है?
क्या बिना बिल बिक्री की शिकायतों पर कोई कार्रवाई हुई?
क्या जिले में ऐसे कारोबारियों की पहचान की गई जिनका वास्तविक कारोबार और घोषित टर्नओवर संदिग्ध रूप से अलग-अलग दिखाई देता है?
यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि GST पंजीकरण से संबंधित नियमों के अनुसार कौन-कौन से व्यापारी पंजीकरण के लिए उत्तरदायी हैं और कितने व्यापारियों ने उसका पालन किया है।
यदि कोई कर चोरी करता है, तो उस पर नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। यदि किसी अधिकारी की मिलीभगत या कर्तव्य में जानबूझकर लापरवाही सामने आती है, तो उसकी भी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।
10. अब स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच की आवश्यकता
इस पूरे प्रकरण में केवल औपचारिक निरीक्षण अथवा सामान्य जवाबदेही पर्याप्त नहीं होगी। जिला प्रशासन को संबंधित विभागों से स्वतंत्र और दस्तावेज आधारित जांच करानी चाहिए।
जांच में निम्नलिखित अभिलेखों को शामिल किया जाना चाहिए:
1. पिछले पांच वर्षों में जारी किए गए सभी पटाखा बिक्री एवं भंडारण लाइसेंसों की सूची।
2. लाइसेंसधारियों के नाम, स्वीकृत स्थल, लाइसेंस की वैधता और निर्धारित भंडारण क्षमता।
3. थोक एवं खुदरा कारोबारियों की खरीद-बिक्री के बिल और स्टॉक रजिस्टर।
4. GST पंजीकरण, लागू कर देयता, रिटर्न और कर भुगतान का परीक्षण।
5. बिना GSTIN अथवा बिना विधिवत बिल के बिक्री की शिकायतों का सत्यापन।
6. पटाखों के परिवहन, भंडारण और निस्तारण से संबंधित अभिलेख।
7. लाइसेंस जारी करने वाले अधिकारियों और निरीक्षण करने वाले अधिकारियों की भूमिका।
8. पुलिस, राजस्व प्रशासन और अग्निशमन विभाग द्वारा किए गए निरीक्षणों की रिपोर्ट।
9. पूर्व में प्राप्त शिकायतों, नोटिसों, कार्रवाई और लंबित प्रकरणों का परीक्षण।
10. नियमों के उल्लंघन पर की गई कार्रवाई और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही का निर्धारण।
जहां कर चोरी अथवा संदिग्ध वित्तीय लेनदेन की पुष्टि हो, वहां संबंधित सक्षम एजेंसी को नियमानुसार जांच करनी चाहिए। जहां विस्फोटक सुरक्षा नियमों का उल्लंघन मिले, वहां सक्षम प्राधिकारी से तत्काल आवश्यक कार्रवाई कराई जानी चाहिए।
11. जनता की जान से बड़ा कोई कारोबार नहीं
पटाखों का व्यापार किसी की आजीविका का साधन हो सकता है, लेकिन किसी भी व्यापार को आम नागरिकों की सुरक्षा से ऊपर नहीं रखा जा सकता।
घनी आबादी के बीच यदि बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री का भंडारण किया जा रहा है, तो उसका जोखिम केवल दुकानदार तक सीमित नहीं रहता। उस क्षेत्र में रहने वाले परिवार, आसपास के व्यापारी, स्कूली बच्चे, राहगीर और पूरा बाजार उसकी चपेट में आ सकता है।
किसी दुर्घटना के बाद यह कह देना कि जांच की जा रही है, पर्याप्त नहीं होगा।
जनता यह जानना चाहती है कि दुर्घटना होने से पहले जिम्मेदार विभागों ने क्या किया? कितनी दुकानों की जांच हुई? कितने अवैध भंडारण पकड़े गए? कितने कारोबारियों को नोटिस दिया गया? कितने लाइसेंस निरस्त हुए? और कितने अधिकारियों की जवाबदेही तय हुई?
यदि सब कुछ नियमों के अनुरूप है तो प्रशासन को आंकड़ों और निरीक्षण रिपोर्ट के साथ स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। और यदि अनियमितताएं हैं तो उन पर कार्रवाई होनी चाहिए।
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प्रशासन और जिम्मेदार विभागों से जनता के 15 सीधे सवाल
1. जिले में कुल कितने पटाखा बिक्री एवं भंडारण लाइसेंस जारी किए गए?
2. कितने लाइसेंसधारियों का GST पंजीकरण है और कितने पर पंजीकरण अनिवार्य नहीं है?
3. पिछले पांच वर्षों में पटाखा कारोबार से कितना GST राजस्व प्राप्त हुआ?
4. वास्तविक खरीद और घोषित बिक्री के मिलान की कितनी बार जांच हुई?
5. बिना GSTIN अथवा बिना विधिवत बिल बिक्री की शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई?
6. कितने पटाखा व्यापारियों के भंडारण स्थलों का भौतिक निरीक्षण किया गया?
7. क्या किसी कारोबारी को निर्धारित क्षमता से अधिक पटाखे रखने की अनुमति मिली?
8. क्या किसी दुकान या गोदाम में स्वीकृत स्थल से अलग भंडारण पाया गया?
9. क्या शिवरीनारायण, अकलतरा, बलौदा, जांजगीर और चांपा में विशेष सुरक्षा जांच की गई?
10. कितने मामलों में पुलिस और राजस्व अधिकारियों ने संयुक्त निरीक्षण किया?
11. कितने मामलों में सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर नोटिस, जब्ती अथवा अन्य कार्रवाई हुई?
12. दीपावली के बाद बची हुई पटाखा सामग्री का हिसाब किस विभाग द्वारा सत्यापित किया जाता है?
13. क्या थोक विक्रेताओं की बिक्री और खुदरा कारोबारियों की खरीद का GST रिकॉर्ड से मिलान किया जाता है?
14. क्या किसी अधिकारी अथवा कर्मचारी के विरुद्ध कर्तव्य में लापरवाही या अनुचित लाभ लेने की शिकायत की जांच हुई?
15. क्या जिला प्रशासन आगामी दीपावली से पहले सभी लाइसेंसधारियों, दुकानों और भंडारण स्थलों का स्वतंत्र सुरक्षा एवं वित्तीय ऑडिट कराने को तैयार है?
निष्कर्ष: सरकारी लाइसेंस की आड़ में नियमों की अनदेखी तो नहीं?
जांजगीर-चांपा जिले में पटाखा कारोबार की वास्तविक स्थिति का निष्पक्ष परीक्षण अब आवश्यक दिखाई देता है। यह मामला केवल GST की संभावित चोरी का नहीं है, बल्कि सरकारी निगरानी, विस्फोटक सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही की भी परीक्षा है।
यदि कारोबारी नियमों के अनुरूप व्यापार कर रहे हैं, तो उनके रिकॉर्ड सामने आने चाहिए। यदि कहीं बिना बिल बिक्री, कर चोरी, अवैध भंडारण अथवा सुरक्षा मानकों का उल्लंघन हो रहा है, तो उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
सबसे महत्वपूर्ण सवाल उन जिम्मेदार अधिकारियों से है जिनके अधिकार क्षेत्र में यह पूरा कारोबार संचालित होता है।
क्या प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही जागेगा? क्या GST विभाग वास्तविक कारोबार और कर भुगतान का मिलान करेगा? क्या पुलिस और राजस्व अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में विस्फोटक सामग्री का असुरक्षित भंडारण न हो? क्या संबंधित विभागों के निरीक्षण केवल कागजों तक सीमित हैं या वास्तव में जमीन पर भी कोई कार्रवाई होती है?
जनता को किसी विभाग से टकराव नहीं चाहिए। जनता को सुरक्षित बाजार, पारदर्शी कारोबार, सरकारी राजस्व की सुरक्षा और जवाबदेह प्रशासन चाहिए।
क्योंकि पटाखों की आवाज कुछ सेकंड में समाप्त हो जाती है, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही से होने वाले नुकसान की गूंज वर्षों तक सुनाई देती है।



