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जांजगीर-चांपाछत्तीसगढ़

DMF की 10 बेलर मशीनों का रहस्य! करोड़ों के सार्वजनिक धन का हिसाब कौन देगा? आखिर मशीनें जमीन पर हैं या सिर्फ कागजों में?

जांजगीर-चांपा में DMF फंड पर उठे बड़े सवाल — खरीद, भुगतान, वितरण और अस्तित्व तक की स्वतंत्र जांच की मांग

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आरटीआई दस्तावेजों ने खोले सवालों के दरवाजे, अब जवाब मांग रही जनता

जांजगीर-चांपा जिले में वर्ष 2020-21 के दौरान जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) निधि से खरीदी और वितरित बताई गई 10 बेलर मशीनें अब बड़े सार्वजनिक सवालों के केंद्र में आ गई हैं। उपलब्ध दस्तावेजों और वितरण सूची ने ऐसे अनेक प्रश्न खड़े कर दिए हैं जिनका जवाब आज तक स्पष्ट रूप से सामने नहीं आया है।

सवाल सिर्फ 10 मशीनों का नहीं है।

सवाल है सार्वजनिक धन का।

सवाल है प्रशासनिक जवाबदेही का।

सवाल है उन किसानों और ग्रामीणों का जिनके नाम पर योजनाएं बनती हैं।

और सवाल है कि आखिर DMF का पैसा वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचा या नहीं?

🟥 सबसे बड़ा सवाल : क्या 10 बेलर मशीनें वास्तव में खरीदी गई थीं?

उपलब्ध अभिलेख बताते हैं कि विभिन्न विकासखंडों में 10 बेलर मशीनों का वितरण किया गया।

लेकिन अब जनता पूछ रही है—

✅ मशीनों का ब्रांड क्या था?

✅ मॉडल कौन सा था?

✅ कीमत कितनी थी?

✅ खरीदी किस कंपनी से हुई?

✅ किस दर पर हुई?

✅ भुगतान किसे किया गया?

✅ मशीनें आज कहां हैं?

यदि करोड़ों या लाखों रुपये का सार्वजनिक धन खर्च हुआ तो उसका पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक क्यों नहीं है?

🟨 खरीद प्रक्रिया पर बड़ा प्रश्नचिह्न

किसी भी सरकारी खरीदी में निविदा प्रक्रिया पारदर्शिता की रीढ़ मानी जाती है।

अब मांग उठ रही है कि निम्न दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं—

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🔹 प्रशासनिक स्वीकृति

🔹 तकनीकी स्वीकृति

🔹 निविदा आमंत्रण

🔹 तुलनात्मक पत्रक

🔹 क्रय आदेश

🔹 आपूर्ति आदेश

🔹 भुगतान आदेश

🔹 जीएसटी चालान

🔹 निरीक्षण प्रतिवेदन

🔹 स्टॉक रजिस्टर

यदि ये दस्तावेज उपलब्ध हैं तो सार्वजनिक क्यों नहीं किए जा रहे?

और यदि उपलब्ध नहीं हैं तो जिम्मेदारी किसकी है?

🟧 क्या बाजार मूल्य से अधिक भुगतान हुआ?

यही वह बिंदु है जो पूरे मामले को अत्यंत संवेदनशील बनाता है।

स्वतंत्र वित्तीय जांच की मांग इसलिए की जा रही है कि पता लगाया जा सके—

👉 मशीन की वास्तविक बाजार कीमत क्या थी?

👉 विभाग ने कितना भुगतान किया?

👉 दोनों में कितना अंतर था?

👉 क्या किसी विशेष फर्म को अनुचित लाभ पहुंचाया गया?

👉 क्या प्रतिस्पर्धी निविदा प्रक्रिया का पालन हुआ?

यदि सरकारी धन से बाजार दर से अधिक भुगतान हुआ है तो इसकी जवाबदेही तय होना आवश्यक है।

🟩 जमीन पर मशीनें हैं या सिर्फ रिकॉर्ड में?

यही जांच का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु माना जा रहा है।

जनता जानना चाहती है—

📍 मशीनें वर्तमान में कहां हैं?

📍 किसके कब्जे में हैं?

📍 कार्यशील हैं या कबाड़ बन चुकी हैं?

📍 सीरियल नंबर क्या हैं?

📍 क्या वे रिकॉर्ड से मेल खाते हैं?

📍 क्या मशीनों का कभी उपयोग हुआ भी था?

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रत्येक मशीन का वीडियोग्राफी सहित स्वतंत्र भौतिक सत्यापन कराया जाना चाहिए।

🟦 किसानों को कितना लाभ मिला?

DMF निधि का उद्देश्य सिर्फ सामान खरीदना नहीं बल्कि जनहित में उसका उपयोग सुनिश्चित करना है।

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ऐसे में बड़े सवाल उठ रहे हैं—

🌾 कितने किसानों ने मशीनों का उपयोग किया?

🌾 कितने बेल तैयार हुए?

🌾 उपयोग रजिस्टर कहां है?

🌾 मशीनों से कितनी आय हुई?

🌾 क्या मशीनें वर्षों से निष्क्रिय पड़ी हैं?

यदि मशीनें उपयोग में नहीं हैं तो आखिर योजना का उद्देश्य कैसे पूरा हुआ?

🟪 वारंटी-गारंटी का रिकॉर्ड कहां है?

सरकारी खरीदी में वारंटी और रखरखाव अनिवार्य माने जाते हैं।

अब जांच की मांग है कि पता लगाया जाए—

🔧 मशीन खराब हुई या नहीं?

🔧 वारंटी कार्ड उपलब्ध है या नहीं?

🔧 मरम्मत किसने कराई?

🔧 रखरखाव पर कितना खर्च हुआ?

🔧 AMC हुआ था या नहीं?

🟥 किन अधिकारियों की भूमिका जांच के घेरे में?

जांच की मांग में निम्न पक्षों की भूमिका की समीक्षा की बात कही गई है—

⚫ तत्कालीन स्वीकृति प्राधिकारी

⚫ कृषि विभाग के अधिकारी

⚫ क्रय समिति के सदस्य

⚫ तकनीकी निरीक्षण अधिकारी

⚫ भुगतान स्वीकृत करने वाले अधिकारी

⚫ सामग्री प्राप्ति प्रमाणित करने वाले अधिकारी

⚫ आपूर्तिकर्ता फर्म

⚫ संबंधित हितग्राही समूह

🟨 फोरेंसिक ऑडिट की मांग क्यों उठ रही है?

मामले में स्वतंत्र फोरेंसिक ऑडिट कराने की मांग की गई है ताकि यह स्पष्ट हो सके—

💰 स्वीकृत राशि कितनी थी?

💰 भुगतान कितना हुआ?

💰 पैसा किस खाते में गया?

💰 भुगतान की तारीख क्या थी?

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💰 क्या आपूर्ति और भुगतान का क्रम सही था?

💰 कहीं फर्जी बिलिंग या कागजी लेनदेन तो नहीं हुआ?

🟧 रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जांच प्रभावित न हो इसलिए—

📌 मूल फाइलें सुरक्षित रखी जाएं

📌 रिकॉर्ड में संशोधन रोका जाए

📌 भुगतान दस्तावेज सुरक्षित रखे जाएं

📌 मशीनों को बिना अनुमति स्थानांतरित न किया जाए

📌 तत्काल भौतिक सत्यापन कराया जाए

🚨 जनता पूछ रही है — DMF के पैसे का पूरा हिसाब कब मिलेगा?

खनिज संपदा जनता की है।

DMF निधि जनता के अधिकारों की निधि है।

ऐसे में जनता यह जानना चाहती है कि—

क्या खरीदी पूरी तरह नियमों के अनुसार हुई?

क्या मशीनें वास्तव में लाभार्थियों तक पहुंचीं?

क्या उनका उपयोग हुआ?

क्या सार्वजनिक धन का प्रत्येक रुपया सही उद्देश्य पर खर्च हुआ?

इन सवालों का जवाब अब सिर्फ दस्तावेज नहीं बल्कि स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच ही दे सकती है।

🔴 अब निगाहें प्रशासन, लोकायुक्त और जांच एजेंसियों पर

पूरा मामला अब जनचर्चा का विषय बन चुका है।

लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि संबंधित जांच एजेंसियां, प्रशासन और विभाग इस प्रकरण में क्या कदम उठाते हैं।

क्या 10 बेलर मशीनों का पूरा सच सामने आएगा?

क्या सार्वजनिक धन के उपयोग का पूरा हिसाब मिलेगा?

या फिर ये सवाल भी सरकारी फाइलों में दबकर रह जाएंगे?

जवाब का इंतजार सिर्फ शिकायतकर्ता नहीं, पूरा जिला कर रहा है।

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RAJIV RASTOGI NEWS NETWORK SERVICE

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