
चुनाव ड्यूटी से बचने के अजब बहाने..:
किसी का शुगर ताे किसी का बीपी बढ़ा ताे किसी ने 20 साल पहले हुई सर्जरी के बहाने मांगी छुट्टी
मई माह की भीषण गर्मी में चुनाव सम्पन्न कराने की जिम्मेदारी से हर कोई बचना चाह रहा है। यही वजह से निर्वाचन विभाग के पास चुनाव ड्यूटी से नाम कटवाने के लिए आवेदनों की भरमार है। चुनाव ड्यूटी से नाम काटने के लिए अब तक 125 आवेदन आ चुके हैं। आवेदनों के मिलने का सिलसिला जारी है। इन दिनों रोजाना करीब 5 आवेदन चुनाव ड्यूटी से नाम हटाने के लिए आ रहे हैं।
अब तक आए आवेदनों में से 49 आवेदन रिजेक्ट कर दिए गए हैं। निर्वाचन विभाग प्राप्त आवेदनों की हर स्तर पर जांच करने के बाद ही चुनाव ड्यूटी से नाम हटा रहा है। निर्वाचन विभाग के अनुसार जिन आवेदनों को अस्वीकृत किया है, उनमें से अधिकांश लोगों ने खुद को बीपी या शुगर का मरीज बताते हुए आवेदन दिया था। उन्होंने आवेदन के साथ मेडिकल रिपोर्ट भी लगाई थी, पर जांच में पाया गया कि बीपी और शुगर का मरीज होने के बावजूद वे कर्मचारी अपनी नियमित कामकाज व नौकरी सुचारू रूप से कर पा रहे हैं। अस्पताल में भर्ती जैसी कोई स्थिति नहीं है।
इन्होंने सिर्फ इसलिए आवेदन किया था कि इन्हें डर था कि कहीं चुनाव ड्यूटी के दौरान तबीयत बिगड़ ना जाए। ऐसे आवेदनों को अस्वीकार किया गया है। इसी तरह से कुछ लोगों ने थोड़ी बहुत दिव्यांगता दिखाकर चुनाव ड्यूटी से नाम कटवाना चाहा था। इनके आवेदन भी निरस्त किए हैं, क्योंकि ये इतने दिव्यांग नहीं है कि चुनाव कार्य ना करा सकें। चुनाव ड्यूटी से नाम काटने के अलावा आदर्श आचार संहिता के दौरान छुट्टी के लिए भी सैकड़ों आवेदन आ रहे हैं।
छुट्टी के लिए अब तक 100 आवेदन जिले भर से आ चुके हैं। जिसमें से 98 आवेदन स्वीकृत कर लिए गए हैं। छुट्टी के लिए मिले आवेदनों मेें अधिकांश शादी ब्याह के लिए है। पर रिश्तेदारों की शादी के लिए छुट्टी अस्वीकृत की जा रही है। सिर्फ वही आवेदन स्वीकृत हो रहे हैं, जिसमें रक्तसंबंधी की शादी हो। जैसे बेटे-बेटियों की शादी, भाई-बहन की शादी। आवेदक आवेदन के साथ शादी के कार्ड की फोटो कॉपी भी दे रहे हैं। किसी कर्मचारी को छुट्टी भी उस तिथि की दी जा रही है, जिस तिथि में चुनाव से संबंधित कोई ट्रेनिंग ना हो या फिर चुनाव ना हो।
करीब 2500 कर्मचारी मतदान दल में
मतदान दल के लिए जिले भर में करीब 2500 कर्मचारियों की ड्यूटी लगी है। ड्यूटी लिस्ट में जिन कर्मचारियों के नाम है, उनकी ट्रेनिंग शुरू है। अभी चुनाव संबंधी और भी ट्रेनिंग होने हैं। 2500 कर्मचारियों में से करीब 20 से 25 प्रतिशत कर्मचारियों को रिजर्व में रखकर ट्रेनिंग दी जा रही है। ताकि आपातकाल में यदि कोई कर्मचारी मतदान कार्य में ना पहुंच सके तो उसकी जगह पर तत्काल कर्मचारी उपलब्ध हों।
आवेदनोें की बारीकी से हो रही जांच:
लाल निर्वाचन के अवकाश नोडल अधिकारी संयुक्त कलेक्टर आरएस लाल ने बताया कि चुनाव ड्यूटी से नाम कटवाने और आचार संहिता के दौरान छुट्टी के लिए आ रहे हर आवेदनों की बारीकी से जांच की जा रही है। जांच के बाद ही छुट्टी स्वीकृत की जा रही है। जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के मामले में सिर्फ तब ही छुट्टी स्वीकृत हो पाएगी जब आवेदक पूरी तरह से ड्यूटी करने में असमर्थ हो।
20 साल पहले किडनी ट्रांसप्लांट, मांगी छुट्टी
चुनाव ड्यूटी के लिए खुद को असमर्थ बताने के लिए कुछ लोग वर्षों पहले की बीमारी का भी हवाला दे रहे हैं। निर्वाचन में एक आवेदन आया था, जिसमें आवेदक ने यह बताया था कि उसकी दोनों किडनी खराब है और किडनी ट्रांसप्लांट हुआ है। आवेदन की जब जांच की गई तो पाया गया कि किडनी ट्रांसप्लांट 2002 में हुआ था। इसके बाद से कर्मचारी सामान्य जीवन जी रहा है।



