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नक्सली बोलते थे-कांग्रेस का समर्थन करो, वरना मार देंगे

बस्तर में मारे गए नेताओं की पत्नियां बोलीं- डर के मारे,रात में छोड़ देते हैं घर

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भारतीय जनता पार्टी 6 अप्रैल को अपना स्थापना दिवस मना रही है। लोकसभा चुनाव की रिपोर्टिंग के बीच भास्कर की टीम बीजापुर के उन नेताओं के परिवारों से मिली, जिन्हें नक्सलियों ने मार डाला। ठीक 1 महीने पहले बीजापुर के जांगला गांव के रहने वाले कैलाश नाग को नक्सलियों ने गोली मार दी थी।

बीजापुर जिले के ही जनपद सदस्य तिरुपति कटला पर भी धारदार हथियार से नक्सलियों ने हमला कर उनकी हत्या कर दी थी। घर के बाहर एक पर्चा फेंका गया था, जिस पर लिखा था ‘कांग्रेस का समर्थन करो, वरना मार देंगे’। दोनों ही नेताओं के परिवारों ने अपना दर्द बताया, पढ़िए उन्हीं के शब्दों में।

बीजापुर के जांगला गांव स्थित घर में मौजूद आदिवासी भाजपा नेता कैलाश नाग का परिवार।
बीजापुर के जांगला गांव स्थित घर में मौजूद आदिवासी भाजपा नेता कैलाश नाग का परिवार।

कैलाश की पत्नी सहम गई…

बीजापुर से कुछ दूरी पर स्थित जांगला गांव में कई आदिवासी परिवार रहते हैं, हाईवे से लगे हुए गांव में किसी तरह की चहल-पहल नहीं थी। एक सन्नाटा था और इस सन्नाटे में एक महीने पहले हुई वारदात का डर भी साफ महसूस किया जा सकता था। सड़क पर ही भाजपा नेता कैलाश नाग का घर है, इन्हीं की हत्या हुई थी

रिपोर्टर घर के करीब पहुंचे तो कैलाश की पत्नी सहम गई, पर्दे से झांका और यह जानने की कोशिश की कौन है, उनके मन में इस बात का डर था कि कोई हमारी जासूसी तो नहीं कर रहा । कोई हमें धमकाने तो नहीं पहुंचा । जब रिपोर्टर ने अपने बारे में बताया, तब वह थोड़ा शांत हुई और बात करने को राजी हुई।

कैलाश की पत्नी कमला नाग ने बताया कि उन्हें अभी भी डराने की कोशिश होती है, जब उनके पति भाजपा में सक्रिय थे, तब उनके घर के बाहर एक पर्चा फेंका गया था। उस पर लिखा था कि कांग्रेस का समर्थन करो, वरना मार देंगे। कमला ने आंसुओं को रोकते हुए कहा हमारे साथ वही हुआ।

जांगला गांव स्थित घर पर कैलाश नाग की पत्नी और उसके दोनों बेटे।
जांगला गांव स्थित घर पर कैलाश नाग की पत्नी और उसके दोनों बेटे।

पति ने कहा था, आऊंगा तो साथ खाना खाएंगे, मगर लाश लौटी

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कमला ने बताया कि मेरे पति जब काम पर जा रहे थे, तब उन्होंने कहा था लौटूंगा तो साथ खाना खाएंगे। मैं शाम तक उनका इंतजार करती रही, मगर वह नहीं लौटे और उनकी बुरी खबर हमें मिली। हम अब भी यहां डर में रह रहे हैं।

रात में छोड़ देते हैं घर

कैलाश के भाई कमल पास में ही रहते हैं । कैलाश का पूरा परिवार उनके 2 बच्चे बुजुर्ग माता-पिता पत्नी सभी अपना घर रात में छोड़कर कमल के घर चले जाते हैं और वही रहते हैं। रात में परिवार पर खतरा होता है। इस वजह से हर रोज इस डर के साथ कैलाश का परिवार जी रहा है।

मुख्यमंत्री से गुहार बच्चों की शिक्षा और बेटे को दें नौकरी

पति कैलाश के साथ पत्नी कमला भी भाजपा के प्रचार प्रसार का काम संभाला करती थी। पति के मौत के बाद जैसे तैसे खुद को संभाल रही हैं। बड़ा बेटा प्रशांत कक्षा 9वीं और छोटा बेटा रोहित कक्षा छठवीं में पढ़ता है कमला ने कहा प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव से बस इतनी सी गुहार है कि मेरे बेटों को रायपुर में पढ़ाई की अच्छी सुविधा दे दें और बड़े बेटे को सरकारी नौकरी।

भाजपा नेता तिरुपति कटला के बेटे और बेटी।
भाजपा नेता तिरुपति कटला के बेटे और बेटी।

वीरान पड़ा है कटला का घर पत्नी की तबीयत ठीक नहीं

बीजापुर मुख्यालय में ही जनपद सदस्य भाजपा नेता तिरुपति कटला का घर है, जिस घर में लोगों की भीड़ जमा रहती थी भारतीय जनता पार्टी के कार्यक्रम हुआ करते थे लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंचते थे वहां अब विरानी है । कटला के बेटे चित्रांश रायपुर में रहकर यूपीएससी की तैयारी कर रहे थे। वह सब छोड़कर अब बीजापुर में रहते हैं क्योंकि कटला की पत्नी बीमार रहती हैं।

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पति की मौत के बाद से उनकी हालत ठीक नहीं । कैमरे पर आकर पत्नी ने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। बेटे चित्रांश और बेटी सृष्टि ने बताया कि वह किस बुरे हाल में वह जी रहे हैं।

पापा से नहीं हो पाई आखिरी मुलाकात

तिरुपति की बेटी महासमुंद में रहकर मेडिकल की इंटर्नशिप कर रही थी पिता तिरुपति से मिलने वह कई महीने बाद बीजापुर आ रही थी। रास्ते में थी कि उन्हें फोन पर खबर मिली की पिता की हालत ठीक नहीं, किसी ने उन पर अटैक कर दिया है। जब तक बेटी बीजापुर पहुंचती तब तक तिरुपति की जान जा चुकी थी। बेटी अपने पिता से मिलने अपने शहर आई मगर मुलाकात हो ना सकी।

दिवंगत पिता की तस्वीर को देखते हुए बेटे की आंखे हुई नम।
दिवंगत पिता की तस्वीर को देखते हुए बेटे की आंखे हुई नम।

पापा के साथ ऐसा क्यों हुआ समझ नहीं आ रहा

तिरुपति के बेटे चित्रांश ने बताया कि पापा हमेशा लोगों की मदद किया करते थे। बीजेपी के इतने बड़े लीडर भी नहीं थे कि उन्हें जान का खतरा हो, किसी से दुश्मनी नहीं थी, वह एक शादी के कार्यक्रम में गए थे और अचानक खबर मिली की धारदार हथियार से उन पर नक्सलियों ने हमला कर दिया।

आखिर उनके साथ ऐसा क्यों हुआ इस सवाल के साथ हम जी रहे हैं। समझ नहीं आ रहा कि क्या करें इतना कहकर चित्रांश आंखें झुकाकर चुप हो गए।

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1 साल में 10 भाजपा नेताओं की हत्या

बीजापुर, नारायणपुर, मानपुर मोहला जैसे इलाकों को मिलाकर 1 साल में 10 भाजपा नेताओं की हत्या नक्सलियों ने की है । बीजापुर में कैलाश नाग की हत्या 6 मार्च 2024 और 1 मार्च 2024 को तिरुपति की हत्या हुई। दोनों भाजपा नेताओं के परिजनों ने एक सवाल पूछा वह यह कि आखिर दूसरे राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ ऐसा क्यों नहीं हुआ क्यों बीजेपी के नेताओं को ही टारगेट बनाया गया।

यह सवाल अब ताउम्र मारे गए नेताओं के परिजनों के मन में मौजूद रहेगा।

19 अप्रैल को होगी वोटिंग

बस्तर में भाजपा नेताओं की हत्याएं हुई 19 अप्रैल को यहां वोटिंग होगी। पहले चरण का मतदान किया जाएगा। भारतीय जनता पार्टी ने महेश कश्यप और कांग्रेस ने कवासी लखमा को लोकसभा चुनाव में अपना उम्मीदवार बनाया है। बस्तर पिछले चुनाव में कांग्रेस की सीट थी। दीपक बैज यहां से सांसद थे। इस बार भारतीय जनता पार्टी पूरा जोर लगा रही है बस्तर लोकसभा सीट को जीतने के लिए।

भाजपा नेताओं की हत्या का क्या है असर

बीजापुर दंतेवाड़ा नारायणपुर जैसे इलाकों में जहां भारतीय जनता पार्टी नेताओं की हत्या हुई वहां इन घटनाओं को लेकर लोगों में डर है। मगर वह यह भी मानते हैं कि नक्सलियों ने ऐसा करके ठीक नहीं किया। प्रदेश और देश की सरकारों की वजह से इन इलाकों में भी बीजेपी को लेकर लोगों के बीच रुझान बड़ा है।

नक्सलियों के द्वारा की गई भाजपा नेताओं की हत्याओं का असर यह भी है कि लोग बीजेपी का समर्थन करने से अब कतरा नहीं रहे।

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RAJIV RASTOGI NEWS NETWORK SERVICE

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