
विमानों को धमकी: गृह मंत्रालय ने रिपोर्ट मांगी, एक झूठी धमकी यानी तीन करोड़ तक का नुकसान; सख्ती की तैयारी
देशभर में 24 घंटे के भीतर भारतीय विमानन कंपनियों की 30 से अधिक उड़ानों को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद अफरा-तफरी मच गई। इनमें विस्तारा, एअर इंडिया, इंडिगो, अकासा एयर, विस्तारा, स्पाइसजेट, स्टार एयर और एलायंस एयर की घरेलू व अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शामिल हैं।
लगातार बढ़ रहे धमकियों को देखते हुए केंद्र सरकार इस मामले में शक्त होती हुई दिख रही है। हालांकि इन झूठी धमकियों से एयरलाइंस को भी करोड़ो के नुकसान का सामना करना पड़ता है। बता दें कि लगातार मिल रहे धमकियों के मद्देनजर गृह मंत्रालय ने हवाईअड्डों पर एहतियातन सतर्कता बढ़ा दी है। इसके साथ ही इन झूठी धमकियों की रिपोर्ट मांगी है।
विमानों को झेलना पड़ता है नुकसान
जानकारी के अनुसार बम की एक झूठी धमकी पर एयरलाइंस को तीन करोड़ रुपये तक का नुकसान होता है। सोमवार को मुंबई से एअर इंडिया का बोइंग777 न्यूयॉर्क के लिए उड़ा। धमकी के बाद उसे दो घंटे में ही दिल्ली में उतरना पड़ा। उसे 100 टन ईंधन हवा में गिराना पड़ा, क्योंकि लैंडिंग के लिए वजन 250 टन करना था। एक लाख रुपये टन के हिसाब से उसे एक करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। 200 यात्रियों व चालक दल को होटल में ठहराने, अगली फ्लाइट छूटने पर मुआवजा व वापसी के लिए खाली विमान न्यूयॉर्क भेजने में दो करोड़ और खर्च हुए।
इसके साथ ही वहीं, 15 अक्तूबर को नई दिल्ली से शिकागो के लिए उड़े बोइंग 777 को कनाडा में उतारना पड़ा। यहां से यात्रियों को दूसरी उड़ान से शिकागो भेजने और दो दिन तक जांच के लिए रुकने पर एयरलाइन को 15 से 20 करोड़ रुपये तक का नुकसान झेलना पड़ा। बता दें कि बीते एक हफ्ते में 70 उड़ानों को बम से उड़ाने की धमकी मिल चुकी है, जांच में सभी फर्जी निकलीं। जिसको लेकर विस्तारा के प्रवक्ता ने शनिवार को बताया कि सोशल मीडिया पर पांच अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में बम की धमकी मिली। इनमें सिंगापुर से मुंबई, मुंबई से फ्रैंकफर्ट, मुंबई से सिंगापुर , दिल्ली से बैंकॉक और मुंबई से कोलंबो जा रही उड़ानें शामिल थीं।
कई यात्री रोने लगते हैं
उन्होंने बताया कि सुबह दस बजे विशाखापत्तनम से इंडिगो की फ्लाइट में मोहाली के लिए रवाना हुईं। दोपहर 12.45 बजे मोहाली पहुंचने पर यात्रियों को 40 मिनट तक विमान से उतरने नहीं दिया गया। गहन जांच के बाद उन्हें विमान से बाहर निकाला गया। इसके बाद फिर जांच हुई जहां स्लीपर डॉग और स्कैनर थे।
जांच के बाद उन्हें रनवे से दूर खड़ी बसों में बिठाया गया। कारण पूछने पर अधिकारियों ने कोई जवाब नहीं दिया, जिससे यात्रियों में डर बढ़ता गया। कई यात्री रोने लगे। बस में बिठाने के डेढ़ घंटे बाद पीने के लिए पानी मिला। खाने के लिए कुछ नहीं था। ढाई घंटे तक बस में ही बैठे रहे।



