
भारत में ही रहेंगी शेख हसीना, मोदी सरकार ने बढ़ाया वीजा अवधि, यूनुस सरकार की प्रत्यर्पण की मांग को किया खारिज
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना भारत में ही रहेंगी। शेख हसीना का यूनुस सरकार की ओर से पासपोर्ट रद्द होने के बाद भी केंद्र की मोदी सरकार ने बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री की वीजा अवधि को बढ़ा दिया है। इसी के साथ ही मोदी सरकार ने यूनुस सरकार की शेख हसीना को बांग्लादेश प्रत्यर्पण की मांग को भी खारिज कर दिया। गृह मंत्रालय के फैसले के बाद शेख हसीना के फिलहाल भारत में ही रहेंगी।
भारत ने शेख हसीना के वीजा को हाल ही में बढ़ाया है ताकि उनके भारत में रहन-सहन को सुगम बनाया जा सके। हालांकि अधिकारियों ने ये स्पष्ट किया कि भारत ने हसीना को शरण नहीं दी है, क्योंकि भारत में शरणार्थियों से संबंधित कोई विशेष कानून नहीं है।
बांग्लादेश ने 97 लोगों के पासपोर्ट रद्द किए
बता दें कि बांग्लादेश ने 97 लोगों के पासपोर्ट रद्द कर दिए हैं। इनमें पूर्व पीएम शेख हसीना का नाम भी शामिल है। इन सभी लोगों पर जुलाई 2024 में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान गायब होने और हत्याओं में शामिल होने का आरोप लगाया गया है। बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने 6 जनवरी को हसीना के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया, जिसके बाद हसीना और 11 बाकी लोगों को गिरफ्तार कर फरवरी में न्यायाधिकरण के समक्ष पेश करने का आदेश दिया है।
शेख हसीना के प्रत्यर्पण के लिए यूनुस सरकार ने भारत को भेजा है नोटिस
बांग्लादेश की यूनुस सरकार ने शेख हसीना की वापसी के लिए भारत सरकार को 23 दिसंबर को एक नोट भेजा था। इस नोट में हसीना के खिलाफ अलग-अलग आरोप लगाए गए थे, जिनके आधार पर बांग्लादेश ने उनकी भारत से वापसी की मांग की थी। हालांकि भारत सरकार ने इस मामले में अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
शेख हसीना के बाद खालिदा जिया ने छोड़ा देश
इधर बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) नेता खालिदा जिया ने भी देश छोड़ दिया है। खालिदा जिया मंगलवार को इलाज के लिए लिए लंदन रवाना हो गईं। वहीं BNP का कहना है कि उनकी नेता की यात्रा मेडिकल कारणों से हो रही है। खालिदा जिया का देश छोड़ने का यह फैसला उस वक्त आया है जब बांग्लादेश की सुप्रीम कोर्ट जिया अनाथलय ट्रस्ट केस में अपना फैसला सुनाने वाली है। राजनीतिक उथल पुथल के दौर में जिया की विदेश यात्रा कई सवाल खड़ी करती है। सबसे अहम बात यह है कि देश की राजनीति पर कई दशकों तक हावी रहीं दो शीर्ष नेता अब विदेश में है।



