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महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं पर उठे गंभीर सवाल: कलेक्टर के आदेश के बाद भी जांच में सुस्ती, उच्चस्तरीय कार्रवाई की मांग

Media House MPCG | Rajeev Rastogi News Network | विशेष खोजी रिपोर्ट

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जांजगीर-चांपा। जिला जांजगीर-चांपा के महिला एवं बाल विकास विभाग में संचालित पोषण, आंगनबाड़ी, बाल संरक्षण, महिला कल्याण एवं सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के संचालन को लेकर एक बार फिर प्रशासनिक व्यवस्था सवालों के घेरे में दिखाई दे रही है। विभागीय योजनाओं में संभावित वित्तीय, प्रशासनिक एवं प्रक्रियात्मक अनियमितताओं की शिकायत पर कलेक्टर कार्यालय द्वारा कार्रवाई के निर्देश दिए जाने के बावजूद अब तक जांच की प्रगति सार्वजनिक नहीं होने से मामले ने नया मोड़ ले लिया है।
शिकायतकर्ता राज कुमार (सी/ओ राजीव रस्तोगी, मीडिया हाउस) ने राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारियों को भेजे गए नए अभ्यावेदन में आरोप नहीं बल्कि स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच की मांग दोहराते हुए कहा है कि यदि शिकायत पर विधिवत कार्रवाई लंबित है, तो इसकी समीक्षा कर जिम्मेदारी तय की जाए।
🔶 कलेक्टर कार्यालय ने शिकायत को विचारणीय मानते हुए विभाग को भेजा था
शिकायत के अनुसार, 15 जून 2026 को प्रस्तुत विस्तृत आवेदन में महिला एवं बाल विकास विभाग की विभिन्न योजनाओं के संचालन से जुड़े कई बिंदुओं पर जांच की मांग की गई थी। इसके बाद कलेक्टर कार्यालय ने 19 जून 2026 को ज्ञापन जारी कर जिला कार्यक्रम अधिकारी को आवश्यक जांच एवं कार्रवाई के निर्देश दिए, साथ ही की गई कार्रवाई से कलेक्टर कार्यालय एवं आवेदक को अवगत कराने का भी निर्देश दिया गया।
अब शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि जांच पूरी हो चुकी है तो उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, और यदि जांच प्रारंभ नहीं हुई है या लंबित है तो उसके कारणों का परीक्षण किया जाए।
🔶 किन योजनाओं को लेकर मांगी गई है जांच?
शिकायत में निम्न प्रमुख विषयों की स्वतंत्र जांच का अनुरोध किया गया है—
पूरक पोषण आहार एवं टेक-होम राशन वितरण।
आंगनबाड़ी केन्द्रों का संचालन।
गर्भवती महिलाओं एवं धात्री माताओं से संबंधित योजनाएं।
कुपोषित एवं अतिकुपोषित बच्चों के लिए संचालित कार्यक्रम।
मुख्यमंत्री कन्या विवाह एवं अन्य वित्तीय सहायता योजनाएं।
स्टॉक, वितरण, भुगतान एवं अभिलेखों का सत्यापन।
निविदा प्रक्रिया, भुगतान एवं आपूर्ति एजेंसियों की भूमिका।
समाचार लिखे जाने तक इन आरोपों की किसी सक्षम जांच एजेंसी द्वारा पुष्टि नहीं हुई है और इन्हें शिकायत में उठाए गए बिंदुओं के रूप में देखा जाना चाहिए।
🔶 जांच में देरी पर उठे जवाबदेही के सवाल
नवीन अभ्यावेदन में कहा गया है कि यदि कलेक्टर कार्यालय के निर्देश के बाद भी जांच में अनावश्यक विलंब हुआ है, तो यह प्रशासनिक जवाबदेही का विषय हो सकता है। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि यह स्पष्ट किया जाए कि—
जांच किस अधिकारी को सौंपी गई?
जांच किस चरण में है?
क्या कोई कार्यवाही प्रतिवेदन (Action Taken Report) तैयार हुआ?
यदि नहीं, तो देरी का कारण क्या है?
🔶 उच्चस्तरीय बहु-विभागीय जांच समिति गठित करने की मांग
शिकायत में मांग की गई है कि प्रकरण की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यकता अनुसार बहु-विभागीय जांच कराई जाए, जिसमें वित्तीय, प्रशासनिक, तकनीकी एवं अभिलेखीय पहलुओं का परीक्षण किया जाए। साथ ही, जांच के दौरान आवश्यक अभिलेखों के संरक्षण तथा उपलब्ध रिकॉर्ड के सत्यापन की भी मांग की गई है।
🔶 विशेषज्ञों के अनुसार किन बिंदुओं की जांच महत्वपूर्ण हो सकती है?
यदि सक्षम प्राधिकारी जांच का निर्णय लेते हैं, तो विशेषज्ञों के अनुसार निम्न पहलुओं का परीक्षण उपयोगी हो सकता है—
लाभार्थियों एवं अभिलेखों का मिलान।
स्टॉक एवं वितरण रिकॉर्ड का सत्यापन।
भुगतान, बिल एवं बैंक अभिलेखों का परीक्षण।
निविदा एवं आपूर्ति प्रक्रिया की समीक्षा।
निरीक्षण प्रतिवेदनों एवं विभागीय फाइलों का परीक्षण।
आवश्यकता होने पर डिजिटल एवं दस्तावेजी सत्यापन।
🔶 प्रशासनिक पारदर्शिता की कसौटी पर मामला
यह मामला केवल एक शिकायत तक सीमित नहीं है, बल्कि सार्वजनिक योजनाओं के संचालन में पारदर्शिता, समयबद्ध जांच और प्रशासनिक जवाबदेही से भी जुड़ा हुआ है। यदि किसी शिकायत पर सक्षम प्राधिकारी द्वारा कार्रवाई के निर्देश जारी किए जाते हैं, तो उसके अनुपालन की जानकारी भी सुशासन का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है।
🔶 Media House MPCG की टिप्पणी
Media House MPCG का उद्देश्य किसी व्यक्ति या अधिकारी को दोषी ठहराना नहीं है। यह समाचार शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत अभ्यावेदन, उपलब्ध प्रशासनिक पत्राचार तथा सार्वजनिक हित के आधार पर तैयार किया गया है। शिकायत में लगाए गए बिंदुओं की सत्यता का अंतिम निर्धारण केवल सक्षम प्राधिकारी द्वारा की गई निष्पक्ष जांच के बाद ही संभव होगा। यदि संबंधित विभाग या अधिकारी इस संबंध में अपना पक्ष प्रस्तुत करना चाहें, तो उसे भी समान प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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