
एक वर्ष में 65–70 लाख की औषधि खरीदी पर उठे गंभीर सवाल, RTI दस्तावेजों ने बढ़ाई पारदर्शिता की मांग — क्या एक ही फर्म को बार-बार मिला लाभ? उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच की मांग तेज
विशेष जांच रिपोर्ट | MEDIA HOUSE MPCG | RAJEEV RASTOGI NEWS NETWORK
मीडिया हाउस MPCG | विशेष संवाददाता | जांजगीर-चांपा
जिले के उप संचालक, पशु चिकित्सा सेवाएं कार्यालय में वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान हुई लगभग 65 से 70 लाख रुपये की औषधि एवं चिकित्सा सामग्री खरीदी अब गंभीर प्रशासनिक और प्रक्रियागत सवालों के घेरे में दिखाई दे रही है। सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) के माध्यम से प्राप्त अभिलेखों के आधार पर प्रस्तुत एक विस्तृत शिकायत में आरोप लगाया गया है कि खरीद प्रक्रिया के दौरान एक या दो फर्मों को बार-बार कार्यादेश (Work Order) जारी किए गए, जिससे खरीद प्रक्रिया की निष्पक्षता एवं प्रतिस्पर्धात्मकता पर प्रश्नचिह्न खड़े हुए हैं।
शिकायतकर्ता ने इस पूरे मामले में स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
⚖️ ◆ RTI दस्तावेजों से उठे सवाल, शिकायत में मांगी गई बिंदुवार जांच
शिकायत के अनुसार RTI से प्राप्त दस्तावेजों में उपलब्ध कार्यादेशों का अध्ययन करने पर यह प्रश्न सामने आता है कि यदि अनेक पात्र आपूर्तिकर्ता उपलब्ध थे, तो लगातार सीमित फर्मों को ही आपूर्ति आदेश जारी होने के कारण क्या थे?
शिकायतकर्ता का कहना है कि इन परिस्थितियों का परीक्षण मूल अभिलेखों, निविदा प्रक्रिया, अनुमोदन फाइलों, भुगतान रिकॉर्ड और खरीद समिति की कार्यवाही के आधार पर किया जाना चाहिए।
📑 ◆ विभाग ने साक्ष्य मांगे, शिकायतकर्ता का दावा—दस्तावेज पहले ही जमा किए जा चुके थे
शिकायत में उल्लेख किया गया है कि विभाग द्वारा शिकायतकर्ता को कार्यालय में उपस्थित होकर अतिरिक्त साक्ष्य प्रस्तुत करने का पत्र भेजा गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि RTI से प्राप्त दस्तावेजों की प्रतियां पहले ही शिकायत के साथ संलग्न की जा चुकी थीं।
इसी आधार पर शिकायत में यह मांग की गई है कि विभाग यह स्पष्ट करे कि उपलब्ध अभिलेखों का परीक्षण किस स्तर पर और किस अधिकारी द्वारा किया गया।
🏛️ ◆ क्या खरीद प्रक्रिया पूरी तरह प्रतिस्पर्धात्मक थी?
शिकायत में कई महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए गए हैं—
क्या सभी पात्र फर्मों को समान अवसर दिया गया?
क्या दरों की निष्पक्ष तुलना की गई?
क्या खरीद समिति ने नियमों के अनुरूप निर्णय लिया?
क्या सभी अनुमोदन प्रक्रिया वित्तीय नियमों के अनुरूप थीं?
इन सभी बिंदुओं की स्वतंत्र जांच की मांग की गई है।
📊 ◆ लगभग 65–70 लाख की खरीदी, लेकिन सवाल केवल राशि का नहीं—प्रक्रिया का भी
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी सरकारी खरीद में केवल खर्च की गई राशि ही महत्वपूर्ण नहीं होती, बल्कि यह भी देखा जाता है कि—
खरीद प्रक्रिया कितनी पारदर्शी थी।
प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित हुई या नहीं।
कार्यादेशों का वितरण निष्पक्ष था या नहीं।
सार्वजनिक धन का उपयोग वित्तीय नियमों के अनुरूप हुआ या नहीं।
यदि किसी एक अथवा सीमित फर्म को असामान्य रूप से बार-बार कार्यादेश दिए गए हों, तो उसका अभिलेखीय परीक्षण प्रशासनिक दृष्टि से आवश्यक माना जाता है।
🔍 ◆ शिकायत में किन-किन बिंदुओं पर जांच की मांग?
शिकायत में प्रमुख रूप से निम्न बिंदुओं की जांच की मांग की गई है—
✔️ निविदा प्रक्रिया का परीक्षण।
✔️ कार्यादेशों का फर्मवार विश्लेषण।
✔️ भुगतान अभिलेखों की जांच।
✔️ अनुमोदन फाइल एवं नोटशीट का परीक्षण।
✔️ औषधि लाइसेंस एवं GST सत्यापन।
✔️ बाजार दर एवं खरीद दर की तुलना।
✔️ स्टॉक एवं वितरण रजिस्टर का भौतिक सत्यापन।
✔️ मैदानी निरीक्षण एवं वीडियोग्राफी।
✔️ उत्तरदायी अधिकारियों की भूमिका का परीक्षण।
✔️ समयबद्ध एवं कारणयुक्त जांच प्रतिवेदन।
⚠️ ◆ लोकहित से जुड़ा विषय, निष्पक्ष जांच की अपेक्षा
शिकायतकर्ता का कहना है कि यह मामला किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध नहीं, बल्कि लोकधन के उपयोग, प्रशासनिक पारदर्शिता और खरीद प्रक्रिया की निष्पक्षता से जुड़ा हुआ है। इसलिए यदि सभी प्रक्रियाएं नियमों के अनुरूप हुई हैं तो स्वतंत्र जांच से यह तथ्य स्पष्ट हो जाएगा, और यदि किसी प्रकार की प्रक्रियागत अनियमितता पाई जाती है तो उसके लिए उत्तरदायित्व भी निर्धारित किया जा सकेगा।
📌 MEDIA HOUSE MPCG विश्लेषण
सरकारी खरीद प्रणाली में पारदर्शिता, प्रतिस्पर्धा और जवाबदेही सुशासन के मूल आधार हैं। यदि किसी खरीद प्रक्रिया को लेकर दस्तावेज़ों के आधार पर प्रश्न उठते हैं, तो उनका उत्तर केवल स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच से ही दिया जा सकता है। ऐसी जांच न केवल संबंधित अधिकारियों को स्पष्टता प्रदान करती है, बल्कि जनता का प्रशासन पर विश्वास भी मजबूत करती है।
(अस्वीकरण)
यह समाचार उपलब्ध शिकायत, RTI से प्राप्त दस्तावेजों और विभागीय पत्राचार के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें वर्णित आरोप शिकायतकर्ता के हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि सक्षम जांच एजेंसी द्वारा किया जाना शेष है। संबंधित विभाग या अधिकारी यदि अपना पक्ष प्रस्तुत करना चाहें तो Media House MPCG उसे भी समान प्रमुखता से प्रकाशित करेगा।



