MEDIA HOUSE EXCLUSIVE
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विचारों की दुनिया से कर्म की वास्तविकता तक — सफलता का निर्णायक अंतर आपकी सोच में नहीं, सोच को साकार करने की क्षमता में छिपा है।
THINKER vs ACTION TAKER THE POWER OF EXECUTION From Thought to Action, From Vision to Reality A Special Feature on…
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जांजगीर, चांपा और नैला के कपड़ा बाजार में ब्रांडेड कपड़ों की असलियत पर उठे सवाल
महंगे ब्रांड का टैग, हजारों रुपये की कीमत और असली होने की गारंटी कौन देगा? त्योहारों की खरीदारी के बीच…
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जांजगीर-चांपा में राख का साम्राज्य, खतरे में जल, जमीन और जनजीवन!
उद्योगों से निकलने वाली फ्लाई ऐश की डंपिंग पर कब जागेगा पर्यावरण तंत्र? खाली जमीन, बंद खदानें और गांवों के…
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जांजगीर-चांपा में प्रशासनिक समीक्षा या केवल बैठक-दर-बैठक निर्देश?
साप्ताहिक समीक्षा बैठक का असली मूल्य क्या है—बैठक में दिए गए निर्देश, बंद फाइलें या आम नागरिक को मिला वास्तविक…
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“अदृश्य दबाव में प्रशासनिक निष्पक्षता” क्या शिकायत की आवाज व्यवस्था की दीवारों से टकराकर लौट जाती है?
लोकतंत्र में प्रशासन जनता और शासन के बीच वह संस्थागत सेतु है, जिसके माध्यम से कानून जमीन पर उतरता है,…
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रेलवे में सफर सुविधा का नहीं, संघर्ष का नाम क्यों बनता जा रहा है?
टिकट हाथ में होने के बावजूद सीट की अनिश्चितता, जनरल कोच की भीड़ और यात्रियों की बढ़ती परेशानी पर रेलवे…
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मिट्टी के गांव से एशियन गेम्स के स्वर्ण मंच तक पहुंची कोरबा की बेटी संजू देवी
कोरबा/रायपुर। कुछ कहानियां केवल सफलता की कहानी नहीं होतीं, वे संघर्ष, संकल्प, आत्मविश्वास और उस अदम्य इच्छाशक्ति का दस्तावेज होती…
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“राइस मिलिंग में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक आदेशों की पारदर्शिता”
🔎⚖️ विशेष खोज | राइस मिलिंग का अदृश्य खेल™ “आदेश कागज पर, कीमत कौन चुकाता है?” 🏭 राइस मिल •…
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कीमतों का अदृश्य खेल… “भारत में रोजमर्रा की वस्तुओं की छिपी महंगाई और बाजार में कीमतों का खेल”
पेट्रोल-डीजल दिखता है, छोटी कीमतों का विस्फोट क्यों नहीं? 🏛️ सत्ता • बाजार • प्रशासन • व्यवसाय • उपभोक्ता किसके…
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धान मिलों में अटका, करोड़ों की पूंजी फंसी! 🏭 चावल जमा करने की जगह नहीं—सरकारी उठाव की धीमी रफ्तार पर बड़ा सवाल: नुकसान की भरपाई कौन करेगा?
कस्टम मिलिंग के लिए सरकारी धान उठाकर मिलों के गोदामों में रखा गया, लेकिन तैयार चावल के सरकारी भंडारण और…
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