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₹2.95 करोड़ गौशाला अनुदान पर उठे गंभीर सवाल: अध्यक्ष ने पद छोड़ने की बात कही, फिर किसके प्रस्ताव पर निकलती रही करोड़ों की राशि? उच्च स्तरीय SIT जांच की मांग

मीडिया हाउस एमपीसीजी | विशेष खोजी रिपोर्ट | जांजगीर-चांपा

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जांजगीर-चांपा। छत्तीसगढ़ में गौसंरक्षण और गौसेवा के नाम पर करोड़ों रुपये के शासकीय अनुदान के उपयोग को लेकर एक बार फिर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार चंडी पहाड़ आश्रम गौसेवा समिति, ग्राम गोवाबंध पहरिया, विकासखंड बलौदा, जिला जांजगीर-चांपा को वर्ष 2009 से वित्तीय वर्ष 2025-26 तक लगभग ₹2 करोड़ 95 लाख 65 हजार का शासकीय अनुदान प्रदान किया गया है। अब इस संपूर्ण अनुदान, समिति के वैधानिक संचालन, वित्तीय अभिलेखों तथा विभागीय भूमिका की स्वतंत्र विशेष जांच दल (SIT) से जांच कराने की मांग उठी है।
RTI दस्तावेज ने खोले नए सवाल
आरटीआई से प्राप्त जानकारी के अनुसार गौसेवा आयोग द्वारा कई वर्षों तक लगातार करोड़ों रुपये का अनुदान स्वीकृत किया गया। हालांकि शिकायतकर्ता का आरोप है कि अनुदान राशि के उपयोग से संबंधित कई मूलभूत दस्तावेजों, समिति की कार्यवाही, खरीदी अभिलेखों तथा वित्तीय रिकॉर्ड को लेकर गंभीर प्रश्न बने हुए हैं, जिनका निष्पक्ष परीक्षण आवश्यक है।
तीन विभागों की जांच के बाद भी कार्रवाई नहीं?
शिकायत के अनुसार इस मामले में पूर्व में पशु चिकित्सा विभाग, एसडीएम अकलतरा तथा वन विभाग द्वारा जांच की जा चुकी है। शिकायतकर्ता का कहना है कि विभिन्न विभागों की जांच में अलग-अलग तथ्य सामने आए, लेकिन आज तक व्यापक स्तर पर अंतिम निर्णय अथवा उत्तरदायित्व तय होने की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई।
वन भूमि पर संचालन का भी मुद्दा
शिकायत में दावा किया गया है कि वन विभाग की जांच में गौशाला के संचालन स्थल की वैधानिक स्थिति पर प्रश्न उठाए गए थे। यदि भूमि से संबंधित आपत्तियां दर्ज थीं, तो उसके बाद भी वर्षों तक शासकीय अनुदान किस आधार पर स्वीकृत होता रहा, यह भी जांच का विषय बताया गया है।
अध्यक्ष ने पद छोड़ दिया, फिर प्रस्ताव किसने पारित किए?
शिकायत का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि पूर्व जांच के दौरान तत्कालीन अध्यक्ष द्वारा कथित रूप से पद छोड़ने की बात कही गई थी। यदि ऐसा था, तो इसके बाद—
समिति की बैठकें किसने आयोजित कीं?
अनुदान प्राप्त करने के प्रस्ताव किसने पारित किए?
बैंक खाते किसके अधिकार से संचालित हुए?
करोड़ों रुपये किसके हस्ताक्षर से आहरित हुए?
इन सभी बिंदुओं की स्वतंत्र जांच की मांग की गई है।
करोड़ों रुपये का हिसाब-किताब सार्वजनिक क्यों नहीं?
शिकायत में कहा गया है कि निम्न अभिलेखों का स्वतंत्र परीक्षण कराया जाना चाहिए—
बैंक स्टेटमेंट
समिति की कार्यवाही पुस्तिका
प्रस्ताव रजिस्टर
कैशबुक एवं लेजर
चारा खरीद के बिल
पशु चिकित्सा व्यय
निर्माण कार्यों के अभिलेख
उपयोगिता प्रमाण-पत्र
स्टॉक रजिस्टर
ऑडिट रिपोर्ट
यदि करोड़ों रुपये का व्यय हुआ है तो उसका पूर्ण दस्तावेजी रिकॉर्ड उपलब्ध होना चाहिए।
क्या गौवंश पर हुआ वास्तविक व्यय?
शिकायत में यह भी मांग की गई है कि प्रत्येक वर्ष गौवंश की संख्या, चारा व्यवस्था, पशु चिकित्सा, शेड निर्माण, पेयजल व्यवस्था तथा अन्य सुविधाओं का भौतिक सत्यापन कराया जाए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि स्वीकृत अनुदान का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप हुआ या नहीं।
गौसेवा आयोग की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में लाने की मांग
शिकायतकर्ता ने केवल समिति ही नहीं बल्कि संबंधित विभागों की भूमिका की भी जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि उपयोगिता प्रमाण-पत्रों के आधार पर अनुदान जारी हुआ तो यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि उनका भौतिक सत्यापन किस अधिकारी ने किया और किन अभिलेखों के आधार पर उन्हें स्वीकार किया गया।
फॉरेंसिक ऑडिट और SIT गठन की मांग
शिकायत में मांग की गई है कि वर्ष 2009 से 2025-26 तक के संपूर्ण प्रकरण का फॉरेंसिक वित्तीय ऑडिट कराया जाए तथा बहु-विभागीय विशेष जांच दल (SIT) गठित किया जाए, जिसमें वित्त, पशुपालन, वन, विधि, राजस्व तथा स्वतंत्र लेखा विशेषज्ञों को शामिल किया जाए।
लोकहित का मामला
शिकायतकर्ता का कहना है कि यह मामला किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध नहीं, बल्कि सार्वजनिक धन के उपयोग, प्रशासनिक पारदर्शिता और गौसंरक्षण के लिए स्वीकृत अनुदानों की जवाबदेही सुनिश्चित करने से जुड़ा है। शिकायत में यह भी अनुरोध किया गया है कि जांच पूरी होने तक संबंधित अभिलेख सुरक्षित रखे जाएं और यदि जांच में कोई अनियमितता सामने आती है तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
(अस्वीकरण : यह समाचार शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत शिकायत, आरटीआई से प्राप्त दस्तावेजों तथा उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर तैयार किया गया है। शिकायत में लगाए गए आरोप संबंधित प्राधिकारियों द्वारा जांच एवं सत्यापन के अधीन हैं। संबंधित पक्ष का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)

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RAJIV RASTOGI NEWS NETWORK SERVICE

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