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पृथ्वी की सतह से 700 किमी नीचे मिला विशाल भूमिगत महासागर, पानी की उत्पत्ति की धारणी को मिली चुनौती

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लंदन। अब तक हम यही मानते रहे हैं कि पृथ्वी का पानी इसकी सतह तक ही सीमित है. लेकिन नए शोध ने एक महत्वपूर्ण रहस्योद्घाटन किया है. पृथ्वी की सतह से 700 किलोमीटर नीचे मेंटल के भीतर एक विशाल महासागर छिपा है. नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी की एक टीम के नेतृत्व में की गई यह खोज ग्रह के जल चक्र के बारे में सवाल उठाता है, और पृथ्वी के पानी की उत्पत्ति के बारे में लंबे समय से चली आ रही धारणाओं को चुनौती देती है.

रिंगवुडाइट: पृथ्वी के मेंटल जल की कुंजी

वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यह भूमिगत जलाशय सभी महासागरों के कुल क्षेत्रफल से तीन गुना बड़ा हो सकता है. हालाँकि, सतही महासागरों के विपरीत, यह “छिपा हुआ महासागर” तरल पानी से नहीं बना है. इसके बजाय, पानी रिंगवुडाइट नामक एक दुर्लभ नीली चट्टान की क्रिस्टल संरचना के भीतर बंद है, जो मेंटल के भीतर गहराई में पाई जाती है.

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स्टीवन जैकबसन के नेतृत्व में शोध दल ने 500 से अधिक भूकंपों से भूकंपीय तरंगों को ट्रैक करने के लिए पूरे अमेरिका में तैनात 2,000 से अधिक सीस्मोग्राफ का उपयोग किया. ये भूकंपीय तरंगें कुछ निश्चित गहराई पर काफी धीमी हो जाती हैं, जो पानी से भरपूर चट्टानों की उपस्थिति का संकेत देती हैं. अलग-अलग गहराई पर इन तरंगों की गति को मापकर, वैज्ञानिक मेंटल के अंदर फंसे पानी के अस्तित्व का अनुमान लगा सकते हैं.

पृथ्वी के जल चक्र और उत्पत्ति के लिए निहितार्थ

यह भूकंपीय खोज बताती है कि पृथ्वी के जल चक्र की उत्पत्ति पहले की तुलना में कहीं अधिक गहरी हो सकती है. परंपरागत रूप से, यह माना जाता था कि पानी पृथ्वी से टकराने वाले धूमकेतुओं से आता है. अब, वैज्ञानिक इस बात पर विचार कर रहे हैं कि लाखों वर्षों में पृथ्वी के आंतरिक भाग से पानी रिसकर ऊपर आ सकता है.

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इस खोज के निहितार्थ दूरगामी हैं. यह भूमिगत महासागर पृथ्वी की सतह के पानी की दीर्घकालिक स्थिरता को विनियमित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, संभावित रूप से ग्रह की सतह और उसके आंतरिक भाग के बीच पानी का चक्रण कर सकता है. अब यह पता लगाने के लिए आगे अध्ययन की योजना बनाई जा रही है कि क्या विश्व में अन्यत्र भी इसी प्रकार के जल भंडार मौजूद हैं, जिससे ग्रह पर जल वितरण के बारे में हमारी समझ में नया परिवर्तन आ सकता है.

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RAJIV RASTOGI NEWS NETWORK SERVICE

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