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छत्तीसगढ़

शराब घोटाले में बड़ी खबर: कोर्ट ने 28 आबकारी अधिकारियों के खिलाफ जारी किया वारंट, कभी भी हो सकती है गिरफ्तारी

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले मामले में विशेष कोर्ट ने 28 आबकारी अधिकारियों के खिलाफ वारंट जारी किया है। कभी भी इन अधिकारियों की गिरफ्तारी हो सकती है। आपको बता दें कि, बीते दिनों हाई कोर्ट में सभी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की थी।

हाईकोर्ट ने की थी याचिका ख़ारिज
बहुचर्चित शराब घोटाले में फंसे आबकारी विभाग के अधिकारियों को हाईकोर्ट से एक बड़ा झटका लगा है। आज हाईकोर्ट ने सभी 29 अधिकारियों की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं है। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) की गिरफ्तारी से बचने के लिए इन सभी अधिकारियों ने हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल की थी। जिसे जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की सिंगल बेंच ने सुनवाई के बाद याचिकाएं खारिज करते हुए साफ कहा कि आरोपी निचली अदालत में सरेंडर करें और वहीं से जमानत के लिए आवेदन लगाए।

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ईओडब्लू ने कोर्ट में किया था चौथा चालान
राज्य के इस बड़े घोटाले का खुलासा करने के बाद ईओडब्लू की टीम ने इस मामले में चतुर्थ पूरक चालान बुधवार को न्यायालय में प्रस्तुत किया था, जिसे 5 जुलाई को विशेष न्यायाधीश के अवकाश पर होने की वजह से प्रस्तुत नहीं किया जा सका था। गिरफ्तारी के डर से ईओडब्लू द्वारा जारी समन के बावजूद न्यायालय में पेश नहीं होने पर सभी 29 आरोपियों को 20 अगस्त तक मोहलत दी गई है। ईओडब्लू द्वारा की जा रही जांच में अब तक यह तथ्य सामने आया है कि पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा के संरक्षण में यहां सुनियोजित घोटाले को अंजाम दिया गया है। इससे प्राप्त राशि को आरोपियों ने अपने व्यक्तिगत और पारिवारिक हितों में खर्च किया है।

13 आरोपियों को किया गया है गिरफ्तार
इस मामले में अब तक 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इस मामले में साक्ष्यों के आधार पर यह आशंका जताई गई है कि 60,50,950 पेटी बी-पार्ट शराब की अवैध बिक्री हुई है। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार घोटाले की कुल राशि 3200 करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है। बी-पार्ट शराब की बिक्री यानी शासकीय दुकानों के सामानांतर रूप से अवैध बिक्री है। बस्तर और सरगुजा संभाग को छोड़कर चयनित जिलों में अधिक खपत वाली देसी शराब दुकानों को डिस्टलरी से सीधे अतिरिक्त अवैध शराब भेजी जाती थी, जिसे वैध शराब के साथ समानांतर बेचा जाता था। इस प्रकरण में अब तक अनिल टुटेजा, अनवर ढेबर, अरुणपति त्रिपाठी, कवासी लखमा, विजय भाटिया सहित 13 लोगों की गिरफ्तारी की जा चुकी है और एफआईआर में 70 आरोपी नामजद हैं।13 आरोपियों को किया गया है गिरफ्तार
इस मामले में अब तक 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इस मामले में साक्ष्यों के आधार पर यह आशंका जताई गई है कि 60,50,950 पेटी बी-पार्ट शराब की अवैध बिक्री हुई है। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार घोटाले की कुल राशि 3200 करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है। बी-पार्ट शराब की बिक्री यानी शासकीय दुकानों के सामानांतर रूप से अवैध बिक्री है। बस्तर और सरगुजा संभाग को छोड़कर चयनित जिलों में अधिक खपत वाली देसी शराब दुकानों को डिस्टलरी से सीधे अतिरिक्त अवैध शराब भेजी जाती थी, जिसे वैध शराब के साथ समानांतर बेचा जाता था। इस प्रकरण में अब तक अनिल टुटेजा, अनवर ढेबर, अरुणपति त्रिपाठी, कवासी लखमा, विजय भाटिया सहित 13 लोगों की गिरफ्तारी की जा चुकी है और एफआईआर में 70 आरोपी नामजद हैं।

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