
खुद को पुलिस अफसर और अविवाहित बताकर रायपुर के टिकरापारा निवासी पीयूष तिवारी ने एससी युवती को प्रेम जाल में फंसाया। फिर शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करता रहा। युवती को जब पता चला कि वह पुलिस अधिकारी नहीं है और विवाहित है। इस पर उसने रिश्ता तोड़कर दूसरी जगह शादी कर ली। इस पर आरोपी ने युवती, उसके पति और रिश्तेदारों को परेशान करने के लिए 8 एफआईआर दर्ज करवा दी। मामले में पीड़ित पक्ष ने याचिका दायर कर आरोप लगाया कि तिवारी की एफआईआर दर्ज कराने में आईपीएस अधिकारी और वर्तमान में तीसरी बटालियन, अमलेश्वर, दुर्ग में कमांडेंट अरविंद कुजूर ने मदद की।
पीड़ित पक्ष की याचिका पर सुनवाई के बाद शुक्रवार को चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा के नेतृत्व वाली बेंच ने पुलिस अधिकारी समेत सभी को नोटिस जारी किया है। साथ ही कार्रवाई पर रोक लगा दी है। इसके अलावा राज्य सरकार से पूछा गया कि मामले पुलिस अफसर पर क्या कार्रवाई की गई है?
बिलासपुर के उसलापुर निवासी अतुल समेत 5 ने एडवोकेट अमन सक्सेना के जरिए हाई कोर्ट में याचिका लगाई है। इसमें बताया कि रायपुर के टिकरापारा में रहने वाले पीयूष तिवारी ने खुद को पुलिस अधिकारी और अविवाहित बताकर एससी वर्ग की युवती को प्रेम जाल में फंसाया और शादी करने का झांसा देकर दुष्कर्म करता रहा। बाद में युवती को पता चला कि तिवारी पुलिस अधिकारी नहीं है, साथ ही विवाहित भी है। इसके बाद उसने संपर्क खत्म कर लिया और दूसरे युवक से शादी कर ली। लेकिन तिवारी ने उसे परेशान करना नहीं छोड़ा और शारीरिक संबंध बनाने के लिए दबाव बनाता रहा।
आरोप है कि युवती के ऐसा करने से इनकार करने पर उसने युवती, उसके भाई, पति और पति के भाई के खिलाफ रायपुर, दुर्ग, मुंगेली और बेमेतरा थाने में 8 झूठी एफआईआर दर्ज करा दी। याचिका में बताया गया है कि इस काम में आईपीएस अधिकारी और वर्तमान में तीसरी बटालियन, अमलेश्वर, दुर्ग में कमांडेंट अरविंद कुजूर ने मदद की।
एक केस में जमानत मिलते ही नए केस में गिरफ्तारी
पीड़िता, उसके पति, देवर और भाई के खिलाफ अलग-अलग थानों में 8 एफआईआर दर्ज करवाई गई है। एक मामले में जमानत मिलते ही नई एफआईआर दर्ज कर पुलिस सभी को गिरफ्तार कर लेती थी। सुनवाई के दौरान बताया गया कि पीड़िता ने आईपीसी की धारा 376, 384 और 420 और एट्रोसिटीज एक्ट की धारा 3(2)(va) के तहत एफआईआर दर्ज कराई है।
कोर्ट से दोषी ठहराते हुए दी है उम्रकैद की सजा
मामले में मुख्य आरोपी पीयूष तिवारी को रायपुर की कोर्ट ने आईपीसी की धारा 342, 506 भाग- II और 376(2)(k)(n) के साथ 1989 के अधिनियम की धारा 3(1)(v) के तहत दोषी ठहराते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई है। वर्तमान में वह रायपुर के सेंट्रल जेल में है, लेकिन इसके बाद भी पुलिस ने युवती व उसके परिवार को परेशान करना नहीं छोड़ा है। हाल ही में मुंगेली के जरहागांव थाने में एक और एफआईआर दर्ज करवाई गई है।
आईपीएस और सजायाफ्ता को नोटिस
हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार, डीजीपी, 6 थानों के टीआई, आईपीएस अरविंद कुजूर और वर्तमान में रायपुर के सेंट्रल जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे पीयूष तिवारी को नोटिस जारी किया है। तिवारी को रायपुर के सीजेएम के जरिए जेल में नोटिस की तामीली की जाएगी।



