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आरबीसी 6-4 सहायता प्रकरणों पर फिर उठे बड़े सवाल | वर्ष 2019–2026 के सभी मामलों की उच्च स्तरीय जांच की मांग, शिकायत में कई बिंदुओं पर सत्यापन का आग्रह

जनहित बनाम जवाबदेही : क्या आपदा राहत व्यवस्था का स्वतंत्र ऑडिट होगा?

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जांजगीर-चांपा। जिले में राजस्व पुस्तक परिपत्र (RBC) 6-4 के अंतर्गत वर्ष 2019 से वर्ष 2026 तक स्वीकृत आकस्मिक मृत्यु एवं वन्य प्राणी जनहानि सहायता प्रकरणों को लेकर एक विस्तृत शिकायत जिला प्रशासन को प्रस्तुत की गई है। शिकायत में इन सभी मामलों की स्वतंत्र, निष्पक्ष, समयबद्ध एवं उच्च स्तरीय जांच कराए जाने की मांग की गई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि पूर्व में भी इस विषय पर कई आवेदन दिए गए, लेकिन अपेक्षित स्तर की स्वतंत्र जांच नहीं हो सकी।

⚖️ ◆ शिकायत में क्या उठाए गए प्रमुख प्रश्न?

शिकायत के अनुसार वर्ष 2019 से 2026 तक आरबीसी 6-4 के अंतर्गत स्वीकृत सभी सहायता प्रकरणों का रिकॉर्ड पुनः परीक्षण किया जाए। इसमें प्रत्येक मामले के दस्तावेज़, मृत्यु के कारण, पात्रता, भुगतान प्रक्रिया तथा संबंधित अभिलेखों का स्वतंत्र सत्यापन कराने की मांग की गई है।

📂 ◆ किन अभिलेखों के परीक्षण की मांग?

शिकायत में सुझाव दिया गया है कि जांच के दौरान निम्न अभिलेखों का परीक्षण किया जाए—

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🔹 आवेदन पत्र
🔹 मृत्यु प्रमाण पत्र
🔹 पोस्टमार्टम रिपोर्ट (जहाँ लागू हो)
🔹 पुलिस मर्ग एवं पंचनामा
🔹 पटवारी स्थल निरीक्षण प्रतिवेदन
🔹 तहसीलदार की अनुशंसा
🔹 सहायता स्वीकृति आदेश
🔹 बैंक भुगतान संबंधी अभिलेख

🧾 ◆ वास्तविक हितग्राही के सत्यापन की मांग

शिकायत में कहा गया है कि जिस उत्तराधिकारी को सहायता राशि प्रदान की गई, उसका व्यक्तिगत बयान दर्ज कर यह सुनिश्चित किया जाए कि सहायता राशि वास्तविक एवं वैधानिक पात्र व्यक्ति तक ही पहुँची है।

🌩️🐘⚡ ◆ किन श्रेणियों के मामलों की जांच की मांग?

शिकायत में वन्य प्राणी हमले, सर्पदंश, बिच्छू दंश, जल में डूबना, विद्युत करंट, आकाशीय बिजली तथा अन्य पात्र आकस्मिक मृत्यु श्रेणियों के सभी प्रकरणों का समग्र परीक्षण कराने का आग्रह किया गया है।

🛰️ ◆ स्वतंत्र मैदानी जांच की मांग

शिकायत में यह भी सुझाव दिया गया है कि जिन मामलों में आवश्यकता प्रतीत हो, वहाँ स्वतंत्र जांच दल द्वारा पुनः स्थल निरीक्षण कर स्थानीय गवाहों एवं संबंधित पक्षों के कथन लिए जाएँ।

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🏛️ ◆ बहु-विभागीय विशेष जांच दल गठित करने का प्रस्ताव

शिकायतकर्ता ने मांग की है कि जांच दल में राजस्व, पुलिस, वित्त, आपदा प्रबंधन, विधि तथा आवश्यकता अनुसार चिकित्सा विशेषज्ञों को शामिल किया जाए, ताकि सभी पहलुओं का निष्पक्ष परीक्षण हो सके।

⏳ ◆ समयबद्ध जांच और सार्वजनिक जवाबदेही

शिकायत में यह भी आग्रह किया गया है कि जांच प्रारंभ होने की तिथि, जांच अधिकारी का नाम, जांच की समय-सीमा तथा अंतिम प्रतिवेदन की प्रक्रिया स्पष्ट रूप से निर्धारित की जाए और शिकायतकर्ता को इसकी जानकारी उपलब्ध कराई जाए।

📊 ◆ सार्वजनिक धन के उपयोग पर पारदर्शिता की मांग

शिकायत का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक धन के उपयोग में पारदर्शिता, पात्र हितग्राहियों के अधिकारों की रक्षा तथा प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करना बताया गया है। शिकायतकर्ता ने प्रशासन से अनुरोध किया है कि सभी तथ्यों का निष्पक्ष परीक्षण कर आवश्यकतानुसार आगे की कार्रवाई की जाए।

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📰 Media House MPCG | Rajeev Rastogi News Network की संपादकीय टिप्पणी

लोकतांत्रिक व्यवस्था में शिकायत दर्ज कराना प्रत्येक नागरिक का वैधानिक अधिकार है और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह प्राप्त शिकायतों का नियमों के अनुरूप परीक्षण करे। इस प्रकरण में प्रस्तुत शिकायत में कई बिंदुओं पर विस्तृत जांच की मांग की गई है। समाचार प्रकाशित किए जाने तक प्रशासन की ओर से इस शिकायत पर किसी अंतिम जांच निष्कर्ष या दोष सिद्धि संबंधी आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं हुई है।

(यह समाचार शिकायत में किए गए दावों एवं जांच की मांग पर आधारित है। किसी भी व्यक्ति, अधिकारी या विभाग की जिम्मेदारी अथवा दोष का अंतिम निर्धारण सक्षम जांच एवं विधिक प्रक्रिया के बाद ही माना जाएगा।)

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RAJIV RASTOGI NEWS NETWORK SERVICE

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