
‘VPN हराम है…’, पाकिस्तान में इंटरनेट को लेकर जारी हुआ फतवा, जानें क्या है वीपीएन
भारत के पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में इंटरनेट को लेकर बवाल मच गया है। पाकिस्तान में वीपीएन (VPN ) के इस्तेमाल करने पर फतवा जारी किया गया है। इस्लामिक कानून के अंतर्गत प्रतिबंध की घोषणा की गई है। पाकिस्तान में धार्मिक मामलों पर देश की शीर्ष सलाहकार संस्था ने यह अजीबो गरीब फरमान जारी किया है। उन्होंने घोषणा की कि इंटरनेट पर बैन कंटेंट को देखने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (VPN) इस्लामी कानून के खिलाफ है। हालांकि इसे लेकर पाकिस्तान की आवाम में जबरदस्त गुस्सा है।
इसके तहत यूजर को अपने वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (VPN) को पाकिस्तान टेलिकम्युनिकेशन अथॉरिटी (PTA) के साथ रजिस्टर करना अनिवार्य कर दिया है। सरकार ने यह कदम साइबर सुरक्षा को मजबूत करने और आतंकवाद से लड़ने के उद्देश्य से उठाया है। पाकिस्तान में VPN के खिलाफ फतवा भी जारी करने की बात की गई है।
सरकार का तर्क है कि VPN का गलत इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों, वित्तीय अपराधों और पोर्नोग्राफी तक पहुंचने के लिए किया जा रहा है। आंतरिक मंत्रालय ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बताते हुए PTA को अवैध वीपीएन को ब्लॉक करने का निर्देश दिया। हालांकि, आलोचकों का मानना है कि यह कदम स्वतंत्रता पर असंगत नियंत्रण का प्रतीक है. जबकि सरकार का दावा है कि यह सुरक्षा के लिए जरूरी है, आलोचकों का तर्क है कि यह सेंसरशिप और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर हमला है।
इस्लाम के विद्वानों ने घेरा
पाकिस्तान के डॉन अखबार के मुताबिक, सीआईआई के प्रमुख रघी नईमी ने कहा कि वीपीएन के जरिए इंटरनेट पर अवैध सामग्री देखना शरिया के खिलाफ है। सोशल मीडिया पर एक बयान में पाकिस्तान के जाने-माने धार्मिक नेता मौलाना तारिक जमील ने कहा कि अगर वयस्क सामग्री या ईशनिंदा से जुड़ी सामग्री देखना ही मुद्दा है तो वीपीएन से पहले मोबाइल फोन को भी इस्लाम विरोधी घोषित कर देना चाहिए।
दूसरी तरफ पाकिस्तान के एक सांसद और शिया संगठन मजलिस वहादत मुस्लिमीन के प्रमुख अल्लमा नसीर अब्बास ने कहा कि देश को अयोग्य और भ्रष्ट उच्च वर्ग चला रहा है, जो लोगों के असल प्रतिनिधि भी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वह ऐसे कानून बनाते हैं और फतवे का इस्तेमाल अपने मन से करते हैं।



