Advertisment
अयोध्यारामलला का सूर्य तिलक

अयोध्या में रामलला के सूर्य तिलक का ट्रायल

तीसरी मंजिल पर सिस्टम, लेंस और पीतल के पाइप से पहुंचीं किरणें; रामनवमी पर होगा तिलक

contact for Ad1
S G Travels
Screenshot 2026-01-25 175805
Screenshot 2026-01-25 175719
Screenshot 2026-01-25 175938
Screenshot 2026-01-25 180111
Screenshot 2026-01-25 180040
Screenshot 2026-01-25 180006
Screenshot 2026-01-25 175908
Screenshot 2026-01-25 175838

अयोध्या में शुक्रवार को राम जन्मभूमि मंदिर में रामलला के सूर्य तिलक का सफल ट्रायल किया गया। दर्पण के जरिए भगवान के मस्तक पर सूर्य की किरण डाली गई।

राम जन्मभूमि ट्रस्ट ने बताया कि वैज्ञानिकों की मौजूदगी में शुक्रवार दोपहर 12 बजे सूर्य तिलक किया गया। इस सूर्य तिलक के एक मिनट 19 सेकेंड के वीडियो में रामलला के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास आरती उतार रहे हैं। इसी बीच सूर्य की किरणें रामलला के मस्तक पर तिलक करती हैं।

17 अप्रैल को रामनवमी के मौके पर दोपहर ठीक 12 बजे रामलला का सूर्य तिलक किया जाएगा।

सूर्य तिलक के ट्रायल का विजुअल…

शुक्रवार दोपहर में सूर्य तिलक के दौरान प्रभु रामलला की आरती उतारी गई।
शुक्रवार दोपहर में सूर्य तिलक के दौरान प्रभु रामलला की आरती उतारी गई।
सूर्य तिलक ट्रॉयल के दौरान गर्भगृह की लाइट को कुछ देर के लिए बंद कर दिया गया था।
सूर्य तिलक ट्रॉयल के दौरान गर्भगृह की लाइट को कुछ देर के लिए बंद कर दिया गया था।

मुख्य पुजारी बोले- राम जन्म पर एक महीने अयोध्या में रुके थे सूर्य
आचार्य सत्येंद्र दास ने बताया कि सूर्य तिलक का दृश्य अद्भुत था। वैज्ञानिकों ने जिस तरह से प्रयास किया, वह बहुत सराहनीय है। त्रेतायुग में भी जब प्रभु राम ने जन्म लिया थे तो उस दौरान सूर्य देव 1 महीने तक अयोध्या में रुके थे। त्रेतायुग का वह दृश्य अब कलयुग में भी साकार हो रहा है।

इसे भी पढ़ें:  झारखंड में पहली बार तक्षक नाग का रेस्क्यू, उड़ने वाले इस सांप की जानिए खासियत

CBRI ने बनाया सूर्य तिलक का सिस्टम
IIT रुड़की के सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (CBRI) ने यह सिस्टम बनाया है। प्रोजेक्ट के वैज्ञानिक देवदत्त घोष के मुताबिक, यह सूर्य के रास्ता बदलने के सिद्धांतों पर आधारित है। इसमें एक रिफ्लेक्टर, 2 दर्पण, 3 लेंस, पीतल पाइप से किरणें मस्तक तक पहुंचाई गईं।

CBRI के वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप चौहान ने बताया कि रामनवमी की तारीख चंद्र कैलेंडर से तय होती है। सूर्य तिलक तय समय पर हो, इसीलिए सिस्टम में 19 गियर लगाए गए हैं, जो सेकेंड्स में दर्पण और लेंस पर किरणों की चाल बदलेंगे। बेंगलुरु की कंपनी ऑप्टिका ने लेंस और पीतल के पाइप बनाए हैं। प्रोजेक्ट में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स भी शामिल है।

इसे भी पढ़ें:  गौतम अडाणी को एक और बड़ा झटका, केन्या ने अडानी ग्रुप के साथ 1.15 बिलियन डॉलर के अहम सौदे रद्द किए

50 क्विंटल फूलों से सजेगी राम जन्मभूमि, हेलिकॉप्टर से बरसाएंगे फूल

  • रामनवमी पर करीब 50 क्विंटल​ फूलों से राम मंदिर और 70 एकड़ में फैले परिसर को सजाया जाएगा। राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा ने बतयाा कि देश और विदेश के करीब 20 प्रकार से फूल इस्तेमाल किए जाएंगे।
  • फूल बेंगलुरु और दिल्ली से मंगाए गए हैं। ​​​​​राम मंदिर के साथ ही कनक भवन और हनुमानगढ़ी को भी फूलों से सजाया जाएगा।
  • प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दिन जिस तरह हेलिकॉप्टर से पुष्प वर्षा की गई थी, उसी तरह रामनवमी पर हेलिकॉप्टर से गुलाब की पंखुड़ियों की वर्षा राम भक्तों पर की जाएगी।
इसे भी पढ़ें:  हरिद्वार में आचमन लायक नहीं है गंगाजल, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सनसनीखेज रिपोर्ट

mediahousempcg

RAJIV RASTOGI NEWS NETWORK SERVICE

Related Articles