
बलरामपुर जिले में बेमौसम हो रही बारिश से कुसमी ब्लॉक अन्तर्गत जवाहरनगर धान उपार्जन केन्द्र में जाम हजारों क्विंटल धान के भीगने का मामला सामने आया है। जिले में पिछले 2 दिनों से अलग-अलग क्षेत्रों में रुक- रुककर बारिश हो रही है।
इसकी वजह से खुले आसमान के नीचे रखा लाखों का धान भीग गया है। धान उपार्जन केन्द्र में रखरखाव के लिए किसी भी तरह की पर्याप्त व्यवस्था नहीं दिखी। मंडी में जाम में फंसी धान की बोरियों को खुले आसमान के नीचे बिना तिरपाल ढंके छोड़ दिया गया है, जो कहीं ना कहीं समिति प्रबंधन की लापरवाही को दिखाता है।
उपार्जन केन्द्रों में अभी तक धान जाम होने की वजह
जिले में इस साल खरीफ विपणन वर्ष 2023-24 में समर्थन मूल्य पर किसानों से धान खरीदी का लक्ष्य 20 लाख 87 हजार क्विंटल का लक्ष्य दिया गया था। नई सरकार के गठन के बाद जिले में कुल 25 लाख 85 हजार 980 क्विंटल धान की बंपर खरीदी हुई।
वजह ये भी रही कि इस साल किसानों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। यही वजह है कि धान खरीदी खत्म हुए 3 महीने बीत गए, लेकिन अभी तक समितियों में धान का उठाव नहीं हो सका है। जिसके कारण समितियों में पड़े-पड़े धान सड़ने के साथ-साथ अंकुरित भी हो रहे हैं।

अब तक 57 हजार क्विंटल धान का नहीं हो सका है उठाव
जिले के विपणन अधिकारी ने बताया कि इस बार लक्ष्य से अधिक धान की जिले में समर्थन मूल्य पर खरीदी की गई थी। 25 लाख 85 हजार 980 क्विंटल धान की खरीदी की गई थी, जिसमें 25 लाख 57 हजार 490 क्विंटल धान का उठाव किया जा चुका है। बाकी 47 धान खरीदी केन्द्रों में कुल 58 हजार क्विंटल धान अभी भी जाम पड़ा हुआ है। इसका जल्द ही उठाव कर लिया जाएगा। हालांकि उठाव में देरी की वजह अधिकारी लोकसभा चुनाव को बता रहे हैं।
अधिकारी धान के जल्द से जल्द उठाव की बात कह रहे हैं। प्रदेश में विधानसभा चुनाव के पेंच में किसानों को धान बेचने में काफी देरी हुई। किसान नई सरकार के गठन और प्रति एकड़ 21 क्विंटल 3100 रुपए में धान खरीदे जाने की घोषणा के इंतजार में थे। इधर नई सरकार का गठन भी हुआ और घोषणा पर अमल करते हुए सभी समितियों में लक्ष्य से कई गुणा अधिक धान की खरीदी भी हुई। इसके कारण उठाव में काफी देरी भी हुई। वहीं अधिकारी खुले में पड़े धान के रखरखाव की व्यवस्था सुचारू रूप से करने के साथ ही इसका जल्द से जल्द उठाव करने की बात कह रहे हैं।



