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बजट की कमी से जूझ रहे स्कूल:आत्मानंद स्कूलों को सालाना मिल रहे पांच लाख, पर चाहिए 12 लाख

पैसे नहीं इसलिए वार्षिक उत्सव रद्द

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आत्मानंद स्कूल बजट की कमी से जूझ रहे हैं। कमी ऐसी कि अधिकांश स्कूलों में वार्षिक उत्सव रद्द कर दिए गए हैं। इनमें मायाराम सुरजन, सप्रे शाला जैसे बड़े स्कूल शामिल हैं। इनका औसत खर्च 12 लाख रुपए सालाना से ज्यादा है, जबकि सिर्फ 5 लाख रुपए मिल रहे हैं। प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों में कक्षा पहली से 8वीं तक पढ़ाई पूरी तरह से नि:शुल्क है। मगर, आपको जानकर आश्चर्य होगा कि कांग्रेस सरकार ने सत्ता में रहते हुए प्रदेश में 751 आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय खोले। इन स्कूलों में 9वीं से 12वीं तक की पढ़ाई नि:शुल्क कर दी गई। वहीं गैर आत्मानंद यानी की सरकार के दूसरे स्कूलों के छात्र वार्षिक शुल्क और शाला विकास शुल्क दे रहे हैं।शेष|पेज 13 स्पष्ट है कि एक राज्य, एक सरकार मगर सरकारी स्कूलों की फीस के नाम पर भेदभाव हो रहा है।

भास्कर पड़ताल में सामने आया कि गैर आत्मानंद स्कूलों में 9वीं-10वीं में दाखिला लेने वाले छात्र को सालाना 415 रुपए और 11वीं-12वीं के छात्रों से 415 रुपए शुल्क देना होता है। इसके अलावा हर स्कूल शाला विकास समिति के नाम से 300 से 800 रुपए तक शुल्क लेते हैं। उधर, आत्मानंद स्कूल छात्रों से फीस लेते हैं, न अन्य शुल्क। इन्हें शासन से स्कूल संचालन के लिए सालाना 5 लाख रुपए मिलते हैं। यह राशि कम पड़ रही है। यही वजह है कि रायपुर समेत प्रदेश के आत्मानंद स्कूल प्राचार्यों ने सत्र 2023-24 में वार्षिकोत्सव का आयोजन नहीं किया।

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पूर्व में स्कूल प्रबंधन द्वारा रखे गए माली, चपरासी और सफाई कर्मियों की संख्या में कटौती की गई है। प्राचार्यों का कहना है कि कम से कम 12-15 लाख रुपए सालाना अनुदान से ही स्कूल संचालन हो सकता है। ‍प्राचार्यों ने कहा कि वे लिखकर नहीं दे सकते, मगर मौखिक रूप से जिला शिक्षा अधिकारियों से लेकर विभाग के आला अधिकारियों को बजट कम पड़ रहा है, इसकी जानकारी है। मगर, पूर्व की सरकार ने प्रावधान ही ऐसा किए हैं कि कोई कुछ नहीं कर पा रहा। इन्हें बदलकर ही समस्या हल हो सकती है।

पड़ताल में सामने आया कि आरडी तिवारी शासकीय इंग्लिश मीडियम उत्कृष्ट विद्यालय में प्राचार्य के केबिन से अटैच टायलेट की टाइल्स निकल रही है। टाइल्स लगाने के पहले दीवार में टाचें नहीं मारे गए। सीमेंट नाममात्र की इस्तेमाल की गई। इस स्कूल की फॉल सीलिंग गिर हुई है। इस स्कूल को आत्मानंद बनाने में सिर्फ रिनोवेशन में 4.50 करोड़ रुपए खर्च हुए। जिन पुराने स्कूलों को आत्मानंद के तहत रिनोवेट किया गया है, सबमें शिकायत है। रिनोवेशन का काम रायपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने किया है।

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निजी स्कूलों से प्रतिस्पर्धा
प्राइवेट स्कूलों की तर्ज पर पुराने सरकारी स्कूल भवनों का रिनोवेशन करवाया गया। स्मार्ट सिटी को नोडल एजेंसी नियुक्त किया गया। मॉर्डन लैब, लाइब्रेरी, स्पोर्ट्स जोन बनाए गए। अंग्रेजी में सिलेबस, नया ड्रेस कोड तय किया गया। लॉटरी सिस्टम से दाखिले दिए जाते हैं।

अन्य स्कूलों को अनुदान
छात्रों से वार्षिक शुल्क, शाला विकास शुल्क, समग्र और डीईओ के मद से अनुदान, प्रश्न पत्र, उत्तर पुस्तिका, अन्य स्टेशनरी, बिजली बिल और भवन मरम्मत समेत अन्य सभी खर्चों के लिए शासन से बजट मिलता ही है, जो सालाना 12 से 15 लाख तक पहुंचता है।गड़बड़ी: ये तस्वीर भ्रष्टाचार का प्रमाण- पीजी उमाठे उत्कृष्ट इंग्लिश मीडियम स्कूल, शांतिनगर के पुराने भवन को आत्मानंद स्कूल में बदला गया। इसकी मरम्मत में 87 लाख रुपए खर्च हुए। स्थिति यह है कि भवन के टाइल्स निकल रहे हैं। टॉयलट की सीट, बेसिन नहीं बदली गई।

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गड़बड़ी: ये तस्वीर भ्रष्टाचार का प्रमाण- पीजी उमाठे उत्कृष्ट इंग्लिश मीडियम स्कूल, शांतिनगर के पुराने भवन को आत्मानंद स्कूल में बदला गया। इसकी मरम्मत में 87 लाख रुपए खर्च हुए। स्थिति यह है कि भवन के टाइल्स निकल रहे हैं। टॉयलट की सीट, बेसिन नहीं बदली गई।

आंकड़ों में समझें पूरा खर्च

(नोट- 1000 से अधिक छात्र संख्या वाले स्कूलों का खर्च। )

आत्मानंद स्कूलों के संचालन में बजट और स्थापना संबंधी जो भी इश्यू आ रहे हैं, उनका निराकरण किया जाएगा। विभाग पूरे सिस्टम की समीक्षा कर रहा है। नए सत्र में बदलाव दिखेंगे।-बृजमोहन अग्रवाल, मंत्री, स्कूल शिक्षा विभाग

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RAJIV RASTOGI NEWS NETWORK SERVICE

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