
रायपुर में संभावित ISIS मॉड्यूल का पर्दाफाश: दो नाबालिग ATS की निगरानी में, सोशल मीडिया के जरिए कट्टरपंथ फैलाने का आरोप
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी एक बेहद संवेदनशील और चौंकाने वाली जानकारी प्रकाश में आई है, जहां एंटी टेररिज्म स्क्वाड (Anti Terrorism Squad- ATS) ने साइबर जांच के दौरान कथित तौर पर इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (ISIS) (ISIS Network India Alert) से जुड़ी संदिग्ध गतिविधियों का सुराग पाया है।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, दो नाबालिगों पर शक जताया गया है कि वे सोशल मीडिया पर सक्रिय कुछ बाहरी ऑनलाइन हैंडलरों के संपर्क में आए थे, जिन पर युवाओं को कट्टरपंथी विचारधारा की ओर धकेलने का आरोप है।
एटीएस सूत्रों के अनुसार, जांच में यह संकेत मिले हैं कि पाकिस्तान स्थित हैंडलर (Cross Border Online Radicalization) सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम ग्रुप चैट के जरिए भारतीय युवाओं में जिहादी प्रोपेगैंडा, भारत विरोधी मैसेजिंग और हिंसक उग्रवाद जैसे कंटेंट भेजकर प्रभावित करने की कोशिश कर रहे थे। रिपोर्ट के अनुसार, बातचीत और डिजिटल कंटेंट में ऑनलाइन इंडोक्रिनेशन, साइकोलॉजिकल मैनिपुलेशन, और वर्चुअल प्रोपेगैंडा ट्रेनिंग पैटर्न जैसे तत्व देखे गए हैं।
शुरुआती जांच से संकेत मिला कि साइबर रेडिकलाइजेशन (cyber radicalisation) की यह प्रक्रिया योजनागत और चरणबद्ध तरीकों से चल रही थी, जिसमें कथित हैंडलर पहले भावनात्मक संपर्क, फिर धार्मिक भावना प्रभाव, और अंत में वैचारिक रूपांतरण जैसी रणनीति पर काम करते हुए दिख रहे थे। इस प्रकार की ऑनलाइन टेरर रिक्रूटमेंट टेक्निक विश्व स्तर पर कई मामलों में पाई जा चुकी है, जिसमें गेमिंग चैट (gaming chats), रील्स (reels), एन्क्रिप्टेड ऐप्स (encrypted apps), एनॉनिमस आईडी, डार्क वेब लिंक जैसे साधन उपयोग किए जाते हैं।
एटीएस ने मामले में यूएपीए एक्ट, 1967 (Unlawful Activities Prevention Act) के तहत अपराध पंजीबद्ध कर आगे की कानूनी और तकनीकी जांच शुरू कर दी है। सुरक्षा एजेंसियां अब डिजिटल फुटप्रिंट्स, डिवाइस फोरेंसिक्स, आईपी रूटिंग (IP routing), वीपीएन ट्रेल्स (VPN trails), क्लाउड बैकअप (cloud backup), डिलीटेड मीडिया रिट्रीवल जैसे पहलुओं पर कार्य कर रही हैं, ताकि नेटवर्क की गहराई और संभावित अन्य संपर्कों का पता लगाया जा सके।



