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छत्तीसगढ़

कागजों में बन गए गरीबों के PMAY के मकान, हकीकत में झोपड़ी में गुजर-बसर

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राजिम। प्रधानमंत्री का सपना सबको पक्का मकान कोपरा नगर पंचायत में अफसरों की लापरवाही की भेंट चढ़ गया है। प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 के तहत आवेदन करने वाले 13 गरीब परिवार आज सड़क, सिस्टम और सरकारी पोर्टल तीनों से ठुकराए जा रहे हैं। वजह? इनके नाम PMAY ग्रामीण के पोर्टल पर पहले से लाभार्थी दिख रहे हैं। लेकिन सच यह है कि न तो इनके खाते में एक पैसा आया, न घर बना, न कोई अधिकारी कभी इनके द्वार तक पहुँचा।

एक बुजुर्ग लाभार्थी ने आँखों में आँसू भरकर कहा, बाबू लोग कहते हैं कंप्यूटर में आपका मकान बन चुका है। हम कहते हैं चलो दिखाओ, तो चुप हो जाते हैं। अब हमारी झोपड़ी भी टपक रही है, पर नया मकान मिलने का रास्ता बंद कर दिया गया है।

मामला गरमाता देख नगर पंचायत ने जनपद पंचायत फ़िंगेश्वर को पत्र लिखा है कि या तो ग्रामीण पोर्टल से इन 13 नामों को हटाया जाए या साफ-साफ लिखकर दिया जाए कि इन्हें ग्रामीण योजना का लाभ मिल चुका है। लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी कोई जवाब नहीं आया।

अब सवाल यह है कि आखिर यह गलती किसकी है? ग्रामीण विभाग की, शहरी विभाग की, या उस डिजिटल इंडिया की जिसने गरीब को कंप्यूटर की गलती का शिकार बना दिया?

कोपरा की जनता इंतज़ार कर रही है, या तो पक्का मकान मिले, या दोषियों पर कार्रवाई हो। नगर पंचायत के यह 13 हितग्राही आप उच्च अधिकारी जिला कलेक्टर गरियाबंद के समक्ष अपनी परियाद करने वाले है।

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RAJIV RASTOGI NEWS NETWORK SERVICE

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