
किचन की छत से पानी टपक रहा है। दीवारें जर्जर हो हैं। पास ही टॉयलेट भी है। कमोड पर किताबें और अन्य सामान रखा है। उसी के ऊपर मां सरस्वती की तस्वीर है। दोनों जगहों पर बच्चे बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं… ये किसी मूवी का दृश्य नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के सरकारी स्कूल की तस्वीर है।
दरअसल, तुनगुरी अहिरापारा ब्लॉक के शासकीय स्कूल के पास खुद का भवन नहीं है। वहीं लखनपुर ब्लॉक में तो ऐसे 8 स्कूल हैं, जिनके पास खुद का भवन नहीं है या फिर जर्जर हालत में संचालित हो रहा है। इसका वीडियो भी वायरल है।
पेरेंट्स गोवर्धन यादव बताते हैं कि, बच्चों को बहुत परेशानी है। स्कूल भवन डेढ़ साल पहले तोड़ दिया गया। किचन शेड जर्जर है, छत से पानी टपक रहा है। बच्चे वहीं बैठकर पड़ते हैं। ऐसे में बच्चों को आगे पढ़ाने-लिखाने में दिक्कत है।
पहले तस्वीरों में देखिए स्कूल की स्थिति…





सरकार बदली तो निर्माण कार्य निरस्त
बच्चों के पेरेंट्स और स्थानीय ग्रामीण बताते हैं कि, मुख्यमंत्री जतन योजना के तहत स्कूल भवन की स्वीकृति मिली थी। उस समय स्कूल भवन को ढहा दिया गया। इससे पहले कि स्कूल के नए भवन का काम शुरू होता, प्रदेश में सरकार बदल गई और फिर निर्माण कार्यों की अनुमति को निरस्त कर दिया गया।
वहीं स्कूल के टीचर बताते हैं कि, करीब डेढ़ महीने से किचन शेड और टॉयलेट में स्कूल का संचालन कर रहे हैं। पहले किराये के घर में स्कूल का संचालन कर रहे थे, फिर किसी कारण से उसे छोड़ना पड़ा। इसके बाद बाहर चबूतरे पर करने लगे, लेकिन बारिश के कारण यहां शिफ्ट होना पड़ा है।
स्कूल के दस्तावेज भी टॉयलेट में
बताया जा रहा है कि तुनगुरीपारा में स्कूल का भवन नहीं होने के चलते गांव में ही एक किराये के कमरे में संचालन किया था। इस शैक्षणिक सत्र में कमरा भी स्कूल को नहीं मिला। ऐसे में बच्चों को जर्जर किचन शेड और बाथरुम में पढ़ाया जा रहा। बाथरुम में स्कूल के कार्यालय के दस्तावेज भी रखे गए हैं।
आंगबाड़ी में शिफ्ट किया गया स्कूल
बाथरुम में स्कूल लगने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो जिला शिक्षा अधिकारी अशोक सिन्हा और BEO प्रदीप कुमार राय तुनगुरी पहुंचे। किचन शेड और बाथरुम में लग रहे स्कूल को गांव के आंगनबाड़ी केंद्र में शिफ्ट कराया गया।
DEO अशोक सिन्हा ने बताया कि, स्कूल को आंगनबाड़ी केंद्र में शिफ्ट कर दिया गया है। जल्द ही स्कूल बिल्डिंग के लिए पहल की जाएगी। स्कूल बिल्डिंग का कार्य स्वीकृत हुआ था, लेकिन नहीं बन सका। वर्तमान में आंगनबाड़ी केंद्र में 2 बड़े कमरे हैं। स्कूल के 22 बच्चे और आंगनबाड़ी केंद्र के बच्चों के लिए अलग-अलग कमरों में संचालन होगा। स्कूल भवन के लिए सरगुजा कलेक्टर ने भी जल्द से जल्द स्वीकृति का आश्वासन दिया है।

पुराने भवन तोड़े, नए का काम भी रुका
लखनपुर ब्लॉक के 8 स्कूल वर्तमान में भवन विहीन हैं। इनमें छह प्राइमरी और 2 मिडिल स्कूल हैं। इनके पुराने भवनों के जर्जर होने के स्कूल जतन योजना के तहत स्वीकृति दी गई थी। पुराने स्कूल भवनों को तोड़ा गया और नए भवनों का कार्य शुरू नहीं हो सका। फिलहाल बीजेपी की सरकार ने निर्माण कार्य निरस्त कर दिया है, जिससे बच्चों की पढ़ाई नहीं हो रही है।
स्टेडियम में बने कमरे में स्कूल संचालित
इसके अलावा भवन विहीन स्कूलों का संचालन जिम्मेदारों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। सिरकोतंगा के मिडिल स्कूल का संचालन स्टेडियम में बने कमरे में किया जा रहा है। सोयदा का प्राइमरी स्कूल जर्जर घोषित हो चुके आंगनबाड़ी भवन में किया जा रहा है। कुसु में ही 3 प्राइमरी स्कूल भवन विहीन हैं। तुरना का प्राइमरी स्कूल भी भवन विहीन है।



