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बिलासपुर लोकसभा में अब MLA रामकुमार यादव की एंट्री

भाजपा का मुकाबला करने कांग्रेस की रणनीति;OBC वर्ग के यादव समाज से ही तय होगा उम्मीदवार

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बिलासपुर लोकसभा के लिए कांग्रेस ने भी इस बार भाजपा से मुकाबला करने के लिए ओबीसी कैंडिडेट उतारने की रणनीति बनाई है। भिलाई विधायक देवेंद्र यादव के नाम के बाद अब चंद्रपुर विधानसभा के MLA रामकुमार यादव की एंट्री हो गई है। देवेंद्र यादव के ED के मनीलांड्रिंग केस में अग्रिम जमानत हाईकोर्ट से खारिज होने के बाद कांग्रेस यादव समाज से दूसरे मजबूत दावेदार की तलाश कर रही है। पहले पार्षद विष्णु यादव के नाम को तय माना जा रहा था।

छत्तीसगढ़ की हाई प्रोफाइल लोकसभा सीट बिलासपुर में पिछले कई वर्षों से भाजपा का कब्जा रहा है। पिछले लोकसभा चुनाव में अरुण साव यहां से भाजपा के टिकट पर सांसद बने थे। फिलहाल, वो प्रदेश सरकार में डिप्टी सीएम हैं। बीजेपी ने इस बार तोखन साहू को यहां से मैदान में उतारा है। पिछले दिनों दिल्ली में हुई कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक के बाद हाईकमान ने छत्तीसगढ़ की 11 में से 6 सीटों के लिए प्रत्याशियों के नामों का ऐलान कर दिया है। वहीं, बिलासपुर समेत 5 सीटों को लेकर बैठक में सहमति नहीं बन पाई है। भाजपा के ओबीसी वर्ग से साहू समाज के कैंडिडेट के मुकाबले कांग्रेस से पहले ओबीसी वर्ग के यादव समाज से पार्षद विष्णु यादव का नाम लभगत तय माना जा रहा था। लेकिन, केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में भिलाई विधायक देवेंद्र यादव के नाम की एंट्री के बाद मामला अटक गया है। इस बीच एमएलए यादव की अग्रिम जमानत याचिका हाईकोर्ट से खारिज होने के बाद उनकी जगह यादव समाज से दूसरे बड़े नेता को उतारने की रणनीति बनाई गई है। सूत्रों का कहना है कि प्रदेश कांग्रेस के सीनियर नेताओं ने बिलासपुर लोकसभा सीट से चंद्रपुर विधायक रामकुमार का नाम सुझाया है। रामकुमार को समाज के कद्दावर और सहज, सरल छवि नेता के रूप में सामने किया जा रहा है। हालांकि, कांग्रेस कमेटी के स्थानीय नेता और पदाधिकारी उनकी जगह विष्णु यादव को ही प्रत्याशी के लिए सटिक बता रहे हैं।

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बिलासपुर लोकसभा सीट पर पहली बार कांग्रेस जातिगत समीकरण के हिसाब से प्रत्याशी तय करने की रणनीति बनाई है। इससे पहले तक कांग्रेस इस पर विचार नहीं कर रही थी और सामान्प वर्ग के उम्मीदवार लगातार चुनाव हारते रहे। पिछले दो बार से भाजपा ने ओबीसी वर्ग के साहू समाज से कैंडिडेट उतार कर चुनाव में जीत दर्ज की। इस बार भी भाजपा ने साहू समाज से ही प्रत्याशी तय किया है। कांग्रेस के रणनीतिकारों का मानना है कि साहू समाज से उम्मीदवार तय करने पर कांग्रेस को इसका फायदा नहीं मिलने वाला है। ऐसे में ओबीसी कार्ड खेलने के लिए दूसरे विकल्प की तलाश की गई, जिसमें जातिगत वोटर्स की संख्या के आधार पर यादव समाज को सटिक माना गया। यही वजह है कि कांग्रेस यादव समाज से मजबूत प्रत्याशी की तलाश कर रही है।

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जानिए बिलासपुर लोकसभा में जातिगत वोटर्स की संख्या
बिलासपुर लोकसभा सीट पर करीब 16 लाख 3 हजार 607 वोटर हैं, जिसमें करीब 8 लाख 352 पुरुष तो 8 लाख 4 हजार 466 महिला मतदाताओं के साथ ही 89 तृतीय लिंग मतदाता हैं। जातिगत वोटर्स के आंकड़ों पर गौर करें तो यहां सबसे ज्यादा सतनामी समाज के करीब 3 लाख 11 हजार मतदाता हैं। जबकि, दूसरे नंबर पर आदिवासी समाज से करीब 2 लाख 65 हजार वोटर्स हैं। वहीं, साहू समाज से 2 लाख अधिक और यादव समाज के भी दो लाख से ज्यादा वोटर्स हैं। बिलासपुर लोकसभा में कुर्मी समाज के वोटर्स की संख्या एक लाख से अधिक है। जबकि, केंवट समाज के वोटर्स 95 हजार से ज्यादा हैं। इसके बाद ब्राम्हण समाज के 88 हजार और मरार समाज 75 हजार मतदाता हैं। वहीं, 70 हजार से अधिक सूर्यवंशी समाज और 46 हजार से ज्यादा मुस्लिम समुदाय के वोटर्स हैं। इस तरह से 16 लाख 3 हजार 607 वोटर्स में 12 लाख 25 हजार समाज विशेष से आते हैं तो वहीं 3 लाख 78 हजार 607 वोटर्स बाकी दूसरे समाज से हैं।

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