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बांग्लादेश में आरक्षण के खिलाफ हिंसा में 105 मौतें:पूरे देश में कर्फ्यू; 778 भारतीय स्टूडेंट्स को वापस लाया गया

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बांग्लादेश में सरकारी नौकरियों में आरक्षण बहाली के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ हिंसा जारी है। इस पर काबू पाने के लिए सरकार ने पूरे देश में कर्फ्यू लगा दिया है। प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग पार्टी के जनरल सेक्रेटरी ओबैदुल कादर ने शुक्रवार (19 जुलाई) देर रात कर्फ्यू लगाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि हिंसा काबू करने के लिए सेना को तैनात किया गया है।

शुक्रवार को पुलिस और सुरक्षाकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि इसमें 105 लोग मारे गए हैं। बांग्लादेश में बढ़ते तनाव के बीच अब तक 778 भारतीय स्टूडेंट्स अपने घर लौट आए हैं। ढाका यूनिवर्सिटी को अगले आदेश तक के लिए बंद दिया है। छात्रों को बुधवार तक हॉस्टल खाली करने को कहा गया है।

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न्यूज एजेंसी AFP की रिपोर्ट के मुताबिक प्रदर्शनकारी छात्रों ने शुक्रवार को नरसिंगडी जिले में एक जेल पर धावा बोल दिया था। उन्होंने सैकड़ों कैदियों को जेल से छुड़ाने के बाद वहां आग लगा दी थी।

इससे पहले गुरुवार को सैकड़ों प्रदर्शनकारी BTV ऑफिस के कैंपस में घुस आए और 60 से ज्यादा गाड़ियां फूंक दी। उसी दिन प्रधानमंत्री शेख हसीना ने BTV को इंटरव्यू दिया था।

ढाका में 18 जुलाई को छात्रों के साथ झड़प के दौरान एक घायल पुलिसकर्मी सड़क पर पड़ा हुआ था।
BBC के मुताबिक, बांग्लादेश की राजधानी ढाका में कई जगह आगजनी की घटनाएं हुईं।

हिंसा में अब तक 105 लोगों की मौत
अस्पतालों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस हफ्ते छात्र प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच ​​​​​​झड़पों में अब तक कम से कम 105 लोग मारे गए हैं। 2,500 से ज्यादा घायल हुए हैं। इंडिपेंडेंट टेलीविजन ने सिर्फ शुक्रवार को 17 लोगों की मौत की जानकारी दी। सोमोय टीवी ने 30 लोगों की मौत का दावा किया।

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एक एसोसिएटेड प्रेस रिपोर्टर ने ढाका मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में 23 शव देखे। इससे पहले गुरुवार (18 जुलाई) को 22 लोगों की मौत की खबर आई थी।

778 भारतीय स्टूडेंट्स अपने घर लौटे
बांग्लादेश से अब तक 778 भारतीय स्टूडेंट्स लौट आए हैं। मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने शुक्रवार को बताया कि भारतीय स्टूडेंट्स को डॉकी इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट के जरिए बांग्लादेश से निकाला गया है। उनमें से लगभग 80 मेघालय से हैं और बाकी अन्य राज्यों से हैं। नेपाल, भूटान के कुछ छात्रों और पर्यटकों को भी निकाला गया है।

मेघालय सीएम ने बताया कि बांग्लादेश के ईस्टर्न मेडिकल कॉलेज में करीब 36 छात्र फंसे हुए हैं। हम वहां के अधिकारियों के संपर्क में हैं। कॉलेज और उसके आसपास की स्थिति ठीक है। हालांकि, स्टूडेंट्स के माता-पिता वहां के हालात को लेकर चिंता में हैं।

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जब तक भारत सरकार पूरी तरह आश्वस्त नहीं हो जाती कि रास्ता साफ और सुरक्षित हो गया है, तब तक स्थिति पर नजर रखने की जरूरत है। इसके बाद ही स्टूडेंट्स को भारत लाया जाएगा। बांग्लादेश में कुल भारतीय नागरिकों की संख्या लगभग 15,000 होने का अनुमान है, जिसमें लगभग 8,500 स्टूडेंट्स शामिल हैं।

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RAJIV RASTOGI NEWS NETWORK SERVICE

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