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छत्तीसगढ़

इंद्रावती नदी में डूबा पूरा परिवार: तीन पीढ़ियां खत्म, पिता आज भी बेखबर… साप्ताहिक बाजार से लौटते वक्त हादसा

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बीजापुर के इंद्रावती नदी एक बार फिर लापरवाही, मजबूरी और विकास की कमी की भयावह कहानी लिख गई… नदी में बहे चारों शव आखिरकार बरामद कर लिए गए हैं. इस हादसे में एक ही परिवार की मां, बेटा और ससुर की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि बताया जा रहा है कि परिवार का मुखिया पिता सन्नू मजदूरी करने आंध्रप्रदेश गया हुआ है और उसे अब तक इस घटना की कोई जानकारी नहीं मिल पाई है, क्योकि परिवार वालों से उसका कोई फोन पर संपर्क भी नहीं हुआ है.

साप्ताहिक बाजार से लौटने के दौरान हादसा

यह हादसा उस वक्त हुआ, जब इंद्रावती नदी पार बसे बोड़गा गांव के निवासी उसपरी गांव से साप्ताहिक बाजार कर लौट रहे थे. नदी पार करने का एकमात्र साधन डोंगी है. लौटते समय डोंगी असंतुलित होकर पलट गई और चार लोग नदी की तेज धारा में बह गए.

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दो दिन पहले मां-बेटे का मिला था शव

मृतकों में मां पोदिया, उसका बेटा राकेश, बहू सुनीता कवासी और राकेश के दादा भादो शामिल हैं. दो दिन पहले पोदिया और राकेश का शव एक-दूसरे से टॉवेल से बंधा हुआ मिला था, जो आखिरी पल की मां-बेटे की जद्दोजहद और बेबसी को बयान करता है.

एक का शव आज बरामद

शुक्रवार को सुनीता कवासी का शव घटनास्थल से करीब 500 मीटर दूर नदी किनारे मिला, जबकि आज भादो का शव झाड़ियों में फंसा हुआ बरामद हुआ. सबसे मार्मिक पहलू यह है कि राकेश का पिता सन्नू, जो रोज़गार की तलाश में आंध्रप्रदेश गया था, आज भी इस बात से अनजान है कि उसका पूरा परिवार इंद्रावती में समा चुका है. गांव में मातम पसरा है, लेकिन परिवार को यह दुखद खबर कौन और कैसे देगा? यह सवाल बना हुआ है.

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डोंगी के सहारे नदी पार करते हैं लोग

इंद्रावती नदी के घाटों पर पुल, सड़क या सुरक्षित परिवहन का कोई इंतजाम नहीं है. डोंगी ही जीवन और मौत के बीच की एकमात्र कड़ी बनी हुई है. ग्रामीणों का कहना है कि अब तक सैकड़ों लोग इसी नदी में डूबकर जान गंवा चुके हैं, खासकर बारिश और बाढ़ के दिनों में.

नक्सल प्रभावित और अबूझमाड़ से सटे इस इलाके में वर्षों तक विकास नहीं पहुंच सका. हालांकि अब क्षेत्र नक्सल मुक्त होने की दिशा में बढ़ रहा है, लेकिन जब तक बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलेंगी, तब तक हर नदी पार एक नई मौत का खतरा बनी रहेगी.

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RAJIV RASTOGI NEWS NETWORK SERVICE

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