
वो लोकसभा सीट, जहां अपने ही कैंडिडेट के खिलाफ प्रचार कर रही कांग्रेस पार्टी
राजस्थान की एक लोकसभा सीट ऐसी है, जहां कांग्रेस पार्टी अपने ही कैंडिडेट के खिलाफ प्रचार कर रही है. हां, पढ़ने या सुनने में थोड़ा अटपटा लगता है लेकिन यह सच है. बांसवाड़ा सीट पर समीकरण ऐसे उलझे कि कांग्रेस का सिरदर्द बढ़ गया. यह आदिवासी बहुल क्षेत्र है. यहां कांग्रेस पार्टी अपने उम्मीदवार के खिलाफ और नई नवेली भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के कैंडिडेट का प्रचार कर रही है. दरअसल, ग्रैंड ओल्ड पार्टी के भीतर आंतरिक खींचतान, केंद्रीय और राज्य यूनिट के बीच समन्वय की कमी और हाईकमान के फैसले के चलते पार्टी को पांच महीने पुरानी पार्टी BAP के साथ गठबंधन करना पड़ा. दिलचस्प यह रहा कि कांग्रेस के उम्मीदवार अरविंद डामोर भी मैदान में बने हुए हैं.
बांसवाड़ा लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली बागीदौरा विधानसभा में भी कुछ ऐसा ही सीन बना है. यहां कांग्रेस कार्यकर्ता अपने ही उम्मीदवार कपूर सिंह का विरोध करते हुए BAP कैंडिडेट जयकृष्ण पटेल का घर-घर प्रचार कर रहे हैं. दोनों सीटों पर 26 अप्रैल को मतदान होगा.
ये कैसे हो गया?
दरअसल, 2023 के विधानसभा चुनावों में हार के बाद कांग्रेस ने आदिवासी क्षेत्र में तीन सीटें जीतने वाली पार्टी BAP (Bharat Adivasi Party) के साथ गठबंधन करने के लिए बातचीत शुरू की. इसमें रुकावट पैदा हो गई क्योंकि BAP ने तीन लोकसभा सीटों- उदयपुर, बांसवाड़ा और चित्तौड़गढ़ में अपना कैंडिडेट खड़ा करने की शर्त रखी, बाकी 22 लोकसभा सीटों पर कांग्रेस उम्मीदवार उतारने की बात कही.
फरवरी का महीना
बताते हैं कि पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, सचिन पायलट और स्थानीय पदाधिकारी BAP के साथ गठबंधन को लेकर चिंतित थे. पार्टी के भीतर कुछ लोगों का मानना था कि यह आदिवासी पार्टी महत्वाकांक्षी है. ऐसे में कांग्रेस ने चार बार के विधायक और पूर्व कैबिनेट मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीय को बांसवाड़ा से अपने लोकसभा उम्मीदवार के रूप में उतारने का फैसला कर लिया. फरवरी के पहले हफ्ते में बांसवाड़ा और डूंगरपुर में पार्टी की कोर कमेटी ने उनकी उम्मीदवारी का समर्थन किया. हालांकि विधानसभा में विपक्ष का नेता नहीं बनाए जाने पर कथित रूप से नाराज होकर 19 फरवरी को मालवीय भाजपा में चले गए.
भाजपा में शामिल होने के बाद यह साफ था कि मालवीय को बांसवाड़ा से कैंडिडेट बनाया जाएगा. मालवीय के जाने से एक बड़ा नेता ही नहीं, एक बड़ा वोटर समूह भी कांग्रेस से दूर हो गया. इससे BAP के साथ गठबंधन पर चर्चा करने की जरूरत महसूस की गई और नए सिरे से बात शुरू हुई. तब तक BAP साफ कर चुकी थी कि उसके संस्थापक सदस्य और दो बार के विधायक राजकुमार रोत बांसवाड़ा से चुनाव लड़ेंगे.
अप्रैल में BAP का नामांकन
BAP की उम्मीदवारी से नाराज कांग्रेस ने बांसवाड़ा और डूंगरपुर में अपनी जिला यूनिटों को 4 अप्रैल को नामांकन की अंतिम तिथि से एक रात पहले लोकसभा और विधानसभा उपचुनाव के लिए उम्मीदवारों को अंतिम रूप देने को कहा. पार्टी ने अपने NSUI पदाधिकारी अरविंद डामोर को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया. नामांकन दाखिल होते ही प्रचार शुरू हो गया.
हालांकि देखा यह गया कि डामोर के साथ सपोर्ट कम था और रोत-मालवीय के नामांकन में बड़ी संख्या में लोग उमड़े. कांग्रेस के भीतर एक तबका ऐसा था जो चाहता था कि पूर्व साथी मालवीय को हराने के लिए रोत को समर्थन दिया जाए.
7 अप्रैल को बदला सीन
कांग्रेस ने तुरंत कहा कि डामोर और कपूर को पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए छह महीने के लिए निलंबित कर दिया जाएगा और अपने कार्यकर्ताओं को BAP के लिए प्रचार करने का निर्देश दिया. हालांकि औपचारिक तौर पर निलंबन आदेश नहीं आया. कांग्रेस का कहना है कि बीजेपी को हराने के लिए BAP के साथ गठबंधन किया गया है. खैर, कांग्रेस के लोग अब BAP के लिए प्रचार कर रहे हैं और कैंडिडेट अपना दावा कर रहे हैं.



