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RTI में मिला ऐसा पंचनामा जिसने खड़े कर दिए बड़े सवाल!

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🚨💥 EXCLUSIVE INVESTIGATION | MEDIA HOUSE MP CG 💥🚨

“जब शिकायतकर्ता मौके पर था ही नहीं, तो उसके नाम से दर्ज हुआ कथन कैसे?”

⚖️ फ्लाई ऐश (राखड़) प्रकरण में जांच रिपोर्ट पर उठे गंभीर प्रश्न, प्रशासनिक पारदर्शिता पर बहस तेज

📍 जांजगीर-चांपा | विशेष खोजी रिपोर्ट | Media House MP CG

🛑🔎 मामला क्या है?

जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम बिरगहनी क्षेत्र में कथित अवैध फ्लाई ऐश (राखड़) भंडारण और पर्यावरण प्रदूषण को लेकर की गई शिकायत अब एक नए विवाद का केंद्र बन गई है।

शिकायतकर्ता राज कुमार (राजीव रस्तोगी) द्वारा पूर्व में विभिन्न विभागों को शिकायत भेजकर आरोप लगाया गया था कि क्षेत्र में बड़े पैमाने पर राखड़ का भंडारण एवं परिवहन किया जा रहा है, जिससे ग्रामीणों के स्वास्थ्य और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

बाद में सूचना का अधिकार (RTI) के माध्यम से प्राप्त दस्तावेजों में एक निरीक्षण पंचनामा सामने आया, जिसे लेकर शिकायतकर्ता ने गंभीर आपत्ति दर्ज की है।

⚠️❓ सबसे बड़ा सवाल : शिकायतकर्ता की गैर-मौजूदगी में उसका कथन किसने लिखा?

RTI के तहत प्राप्त निरीक्षण पंचनामा में उल्लेख किया गया—

📄 “शिकायतकर्ता के कथन अनुसार…”

लेकिन शिकायतकर्ता का दावा है—

🔹 निरीक्षण के समय वह स्थल पर उपस्थित नहीं था।
🔹 उसका कोई बयान दर्ज नहीं हुआ।
🔹 कोई हस्ताक्षर नहीं लिया गया।
🔹 कोई वीडियो रिकॉर्डिंग नहीं हुई।
🔹 कोई उपस्थिति पत्रक नहीं बनाया गया।

🚨 अब सबसे बड़ा प्रश्न यही उठ रहा है—

👉 यदि शिकायतकर्ता मौके पर उपस्थित ही नहीं था, तो पंचनामा में उसके कथन का उल्लेख किस आधार पर किया गया?

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🔥📑 RTI में मिली रिपोर्ट का विरोधाभास बना चर्चा का विषय

निरीक्षण रिपोर्ट में एक ओर कहा गया—

✅ “डंपिंग कार्य नहीं पाया गया”

लेकिन दूसरी ओर उसी रिपोर्ट में यह भी दर्ज है—

✅ “स्थल पर बड़ी मात्रा में फ्लाई ऐश (राखड़) का भंडारण पाया गया”

⚠️ यही विरोधाभास अब पूरे प्रकरण का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु बन गया है।

स्थानीय स्तर पर लोग सवाल पूछ रहे हैं—

🔸 यदि डंपिंग नहीं हुई तो राखड़ आई कहां से?
🔸 किसके माध्यम से पहुंची?
🔸 किस अनुमति के तहत भंडारण हुआ?
🔸 पर्यावरणीय मानकों का पालन हुआ या नहीं?

🌫️☣️ क्या पर्यावरणीय प्रभावों की वैज्ञानिक जांच हुई?

मूल शिकायत में आरोप लगाए गए थे कि—

⚫ क्षेत्र में धूल प्रदूषण बढ़ रहा है।
⚫ PM 2.5 और PM 10 कण वातावरण में फैल रहे हैं।
⚫ जल स्रोत प्रभावित हो रहे हैं।
⚫ ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ रहा है।
⚫ कृषि भूमि की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।

लेकिन शिकायतकर्ता का आरोप है कि निरीक्षण प्रतिवेदन में इन पहलुओं की वैज्ञानिक जांच का उल्लेख नहीं मिलता।

📸🚁 न ड्रोन सर्वे, न GPS, न सैंपलिंग!

शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि निरीक्षण प्रक्रिया में कई महत्वपूर्ण तकनीकी पहलुओं का पालन नहीं किया गया।

रिपोर्ट में उल्लेख नहीं मिलता कि—

❌ ड्रोन सर्वे किया गया
❌ GPS लोकेशन दर्ज की गई
❌ राखड़ का नमूना परीक्षण हुआ
❌ प्रदूषण स्तर की जांच हुई
❌ वैज्ञानिक मात्रा आकलन किया गया
❌ वीडियोग्राफी की गई
❌ विस्तृत फोटोग्राफिक रिकॉर्ड तैयार किया गया

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🔍 ऐसे में सवाल उठता है कि क्या जांच पर्याप्त रूप से वैज्ञानिक और दस्तावेजीय थी?

⚖️📂 शासकीय अभिलेखों की विश्वसनीयता पर भी उठे प्रश्न

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी सरकारी दस्तावेज में ऐसे व्यक्ति का कथन दर्ज हो जिसकी उपस्थिति प्रमाणित न हो, तो दस्तावेज की विश्वसनीयता की स्वतंत्र जांच आवश्यक हो जाती है।

यही कारण है कि शिकायतकर्ता ने पूरे प्रकरण की स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

🚨🧾 शिकायतकर्ता ने मांगी ये प्रमुख जांच

📌 निरीक्षण के दिन वास्तव में कौन उपस्थित था?
📌 शिकायतकर्ता का कथन किस आधार पर दर्ज किया गया?
📌 मूल उपस्थिति रजिस्टर उपलब्ध है या नहीं?
📌 निरीक्षण के फोटो-वीडियो रिकॉर्ड मौजूद हैं या नहीं?
📌 स्थल पर राखड़ की वास्तविक मात्रा कितनी थी?
📌 पर्यावरणीय अनुमति प्राप्त थी या नहीं?
📌 अवैध भंडारण या परिवहन के आरोपों की जांच हुई या नहीं?

🔐📁 साक्ष्य संरक्षण की भी उठी मांग

शिकायतकर्ता ने मांग की है कि जांच प्रभावित न हो, इसलिए—

✅ मूल पंचनामा
✅ निरीक्षण डायरी
✅ नोटशीट
✅ फाइल मूवमेंट रजिस्टर
✅ फोटो एवं वीडियो रिकॉर्ड
✅ RTI फाइल
✅ संबंधित विभागीय अभिलेख

तत्काल सुरक्षित किए जाएं।

🏛️⚡ प्रशासन के सामने चुनौती : विश्वास की परीक्षा

यह मामला केवल एक निरीक्षण रिपोर्ट का नहीं है।

यह मामला उन हजारों नागरिकों की अपेक्षाओं का भी है जो अपनी शिकायत लेकर प्रशासन तक पहुंचते हैं और उम्मीद करते हैं कि उनकी बात निष्पक्ष रूप से सुनी जाएगी।

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यदि जांच सही है तो उसे तथ्यों के साथ सामने आना चाहिए।

यदि जांच में कोई त्रुटि हुई है तो उसे भी निष्पक्ष रूप से सुधारा जाना चाहिए।

लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत जवाबदेही और पारदर्शिता है।

🌿💚 जनसंदेश : पर्यावरण बचेगा तो भविष्य बचेगा

📢 पर्यावरण किसी एक गांव या जिले का मुद्दा नहीं, आने वाली पीढ़ियों के जीवन का प्रश्न है।

📢 प्रशासन की प्रतिष्ठा कार्रवाई से नहीं, निष्पक्ष कार्रवाई से बनती है।

📢 नागरिकों की शिकायतों का सम्मान लोकतंत्र की बुनियाद है।

📢 सत्य चाहे किसी के पक्ष में हो या विपक्ष में, उसका सामने आना ही सुशासन की पहचान है।

📢 एक ईमानदार जांच केवल दोषी खोजने के लिए नहीं, बल्कि जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए भी आवश्यक होती है।

⭐ MEDIA HOUSE MP CG SPECIAL NOTE

“यदि शिकायत गलत है तो निष्पक्ष जांच उसे गलत सिद्ध करे,

यदि शिकायत सही है तो कानून अपना काम करे,

लेकिन हर परिस्थिति में सत्य का सामने आना ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी जीत है।”

✍️ Media House MP CG

🏛️ “जनहित • पारदर्शिता • जवाबदेही • सत्य”

(यह रिपोर्ट शिकायतकर्ता द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों, RTI अभिलेखों एवं आरोपों पर आधारित है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि संबंधित सक्षम जांच एजेंसियों द्वारा की जानी शेष है। संबंधित पक्ष का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)

 

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