Advertisment
छत्तीसगढ़

कफ सिरप पर छत्तीसगढ़ में सख्ती: दो साल से कम उम्र के बच्चों को देने पर पाबंदी, मेडिकल स्टोर्स पर भी निगरानी

S-G-Travels
WhatsApp-Image-2026-06-17-at-4.28.41-PM-300x200
WhatsApp Image 2026-07-05 at 5.05.16 PM

रायपुर। छत्तीसगढ़ में 2 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को खांसी की सिरप देने पर पूर्णत: प्रतिबंध कर दिया गया है। इस संबंध में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने एक महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है। जिसके अनुसार, दो वर्ष से कम आयु के बच्चों को किसी भी प्रकार की खांसी की सिरप या सर्दी-जुकाम की दवाएं नहीं दी जानी चाहिए। साथ ही, यह दवाएं सामान्यतः पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए भी अनुशंसित नहीं हैं। साथ ही सभी औषध निर्माण इकाइयों और मेडिकल स्टोर्स पर निगरानी तेज करने के निर्देश दिए हैं।

एडवाइजरी जारी होते ही छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग ने तत्परता से कार्यवाही करते हुए सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों (CMHO) और सिविल सर्जनों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए हैं। सभी शासकीय और निजी स्वास्थ्य संस्थानों को निर्देशित किया गया है कि भारत सरकार की इस गाइडलाइन का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें।

इसे भी पढ़ें:  रायपुर के नाले में मछलियां पकड़ते समय बच्चों को मिले कारतूस, SLR, AK-47 और 3 नाट 3 राइफल की 70 गोलियां जब्त

खांसी या सर्दी की दवाई उपयोग करने से पहले डॉक्टर से लें सलाह
साथ ही आयुक्त स्वास्थ्य सेवाएं द्वारा इस संबंध में एक उच्चस्तरीय वीडियो कॉन्फ्रेंस आयोजित कर सभी जिलास्तरीय विभागीय अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि खांसी या सर्दी की दवाओं का उपयोग केवल चिकित्सकीय परामर्श पर आधारित होना चाहिए। इस संबंध में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए। विशेषज्ञों के अनुसार, अधिकांश मामलों में बच्चों में खांसी-जुकाम जैसी सामान्य बीमारियाँ अपने आप ठीक हो जाती हैं और इसके लिए दवा देना आवश्यक नहीं होता। इसलिए आम जनता को भी डॉक्टर की सलाह के बिना बच्चों को दवाएं न देने के प्रति जागरूक किया जाएगा।

इसे भी पढ़ें:  घर के बाहर खेल रहा तीन साल का बच्चा लापता, घटना स्थल पर तेंदुए के पैर के निशान

कड़ी निगरानी में है औषधि आपूर्ति प्रणाली
छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन (सीजीएमएससी) से प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिन दो कंपनियों के विरुद्ध अन्य राज्यों में कार्रवाई की गई है, उनकी राज्य में किसी भी प्रकार की सरकारी आपूर्ति नहीं रही है। ये कंपनियाँ सीजीएमएससी के डेटाबेस में पंजीकृत भी नहीं हैं। यह तथ्य राज्य में सरकारी स्तर पर आपूर्ति शृंखला की पारदर्शिता और सतर्कता की पुष्टि करता है।

निर्माण इकाइयों और निजी औषधालयों का निरीक्षण तेज
भारत सरकार के स्वास्थ्य सचिव ने 5 अक्टूबर को आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंस के पश्चात, छत्तीसगढ़ में खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने भी निगरानी और कार्रवाई को तेज कर दिया है। राज्यभर में औषध निर्माण इकाइयों का जोखिम-आधारित निरीक्षण (Risk-Based Inspection) करने हेतु औषधि निरीक्षकों के दल गठित किए गए हैं।

इसे भी पढ़ें:  संपत्ति बंटवारे को लेकर विवाद, भाई ने भाई को उतारा मौत के घाट, आरोपी गिरफ्तार

दवाई दुकानों के निरिक्षण के दिए निर्देश
प्रदेश के सभी सहायक औषधि नियंत्रकों और औषधि निरीक्षकों को पत्र जारी कर निर्देशित किया गया है कि वे सभी औषधि विक्रय संस्थानों का तत्काल निरीक्षण करें, ताकि एडवाइजरी के उल्लंघन की कोई संभावना न रहे। इसके साथ ही निजी फार्मेसियों का आकस्मिक निरीक्षण भी किया जा रहा है। इन कार्यवाहियों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बच्चों के संदर्भ में किसी भी प्रकार की दवाओं का अनुचित या असावधानीपूर्वक उपयोग पूर्णतः बंद हो। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों द्वारा अभिभावकों से अनुरोध किया गया है कि वे बिना चिकित्सकीय परामर्श के अपने बच्चों को कोई भी दवा न दें।

mediahousempcg

RAJIV RASTOGI NEWS NETWORK SERVICE

Related Articles