
छत्तीसगढ़ की चर्चित IAS अफसर रहीं रानू साहू को फिर हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। उनकी ओर से लगाई दो अग्रिम जमानत याचिका को शुक्रवार को खारिज कर दिया गया। जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की बेंच ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि, आरोपी अफसर के खिलाफ जांच एजेंसी के पास पर्याप्त सबूत हैं।
दरअसल, निलंबित IAS रानू साहू रायपुर सेंट्रल जेल में बंद है। उनके खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) और आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने दो अलग-अलग FIR की है। इन मामलों में भी उन्हें गिरफ्तारी की आशंका लग रही है। इससे बचने के लिए उसने अग्रिम जमानत अर्जियां लगाई थी। इसके लिए केजरीवाल और सिसोदिया केस का हवाला भी दिया गया।
क्यों नहीं मिली अग्रिम जमानत?
रानू साहू कोल, DMF घोटाले के अलावा आय से अधिक संपत्ति में भी आरोपी है। इसमें 2015 से 2022 के बीच उसने 3.93 करोड़ रुपए की बेमानी संपत्तियां अर्जित की है। ऐसे में आरोपी अग्रिम जमानत की शर्तें पूरी नहीं करता। अपराध की गंभीरता और गवाहों से छेड़छाड़ की संभावना है।
लेवी सिंडिकेट की मदद का दावा
एसीबी और ईओडब्ल्यू में दर्ज शिकायत के अनुसार, रानू साहू पर आरोप है कि उसने अपने और परिवार के सदस्यों के नाम से आय से अधिक संपत्ति अर्जित की है। उसने कोयला कारोबारी सूर्यकांत तिवारी के कोयला लेवी सिंडिकेट की मदद की। यह सिंडिकेट कोयला डिलीवरी ऑर्डर पर परमिट जारी करने के लिए हर टन 25 रुपए की अवैध वसूली करता था।
शिकायत में कहा गया कि, 2015 से अक्टूबर 2022 तक आवेदक और उसके परिवार ने 24 अचल संपत्तियां खरीदीं। 2011 से 2022 तक उसे वेतन के रूप में 92 लाख रुपए मिले। जबकि उसने 3.93 करोड़ रुपए की संपत्तियां खरीदी। इस आधार पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में FIR दर्ज की गई। इसके अलावा एक अन्य मामला भी दर्ज कराया गया है।



