
कोंडागांव जिले के पांच ब्लॉक के 28 गांवों के पानी में फ्लोराइड की ज्यादा मात्रा परेशानी का सबब बन रही है। स्वास्थ्य अमले ने जिले के 494 स्कूलों में छात्र-छात्राओं की सेहत जांची तो चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए। विभाग ने 21284 बच्चों की जांच की, जिसमें 1664 फ्लोराइड की अधिकता से पीड़ित मिले। इन गांवों में सामान्य से दो गुना तक ज्यादा फ्लोराइड वाला पानी पीने से ग्रामीणों के साथ छात्र-छात्राओं के दांत पीले पड़ रहे हैं और दांत निकलने भी लगे हैं, जो चिंता का विषय है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आरके सिंह ने बताया जिन गांवों में फ्लोराइड से लोग प्रभावित हो रहे हैं, उन्हें कैल्शियम और मल्टी विटामिन की गोली दी जा रही है। साथ ही दांतों की अच्छी तरह से सफाई करने की समझाइश भी दी जा रही है। फ्लोराइड से सबसे ज्यादा प्रभावित ग्राम घोड़ागांव है।
पूर्व में पंचायत स्तर पर फ्लोराइड युक्त पानी से निजात पाने की कोशिश की गई थी, जिसके लिए अलग से मशीनरी लगवाई गई और नदी से पाइप लाइन के जरिए गांव तक पानी लाकर उसे फिल्टर कर पीने योग्य बनाने की कोशिश की गई, पर ये उपाय सफल नहीं हो पाया। इस बारे में कार्यपालन अभियंता लोक स्वास्थ्य यांत्रिक हरि सिंह मरकाम ने कहा कि स्थानीय विधायक लता उसेंडी ने भी मामले को गंभीरता से लिया है। विभाग भी प्रस्ताव बना रहा है जिससे इन गांवों में स्थाई निराकरण किया जा सके। पहले 10 हैंडपंप में फ्लोराइड रिमूवल प्लांट लगाने की तैयारी कर रहे हैं।
ज्यादा फ्लोराइड से कैंसर, बांझपन तक का खतरा
ज्यादा फ्लोराइड वाला पानी पीने से कैंसर, स्मरण शक्तिकमजोर होना, गुर्दे की बीमारी व बांझपन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। विदेश में पानी में फ्लोराइड की मात्रा 0.5 मिलीग्राम प्रति लीटर तक सामान्य मानी जाती है। भारत में यह दर 1.0 मिलीग्राम निर्धारित है। जबकी इन गांवों में 1.5 से 2 मिलीग्राम मात्रा पाई जा रही है।
ये गांव हैं प्रभावित
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार बावनी मारी, भागदेवा, बड़े भीरावंड, कोकोड़ी, करंजी, बाखरा, कमेला, कुकाड़ गारकापाल, पुसावंड, माकड़ी, बिंजोली, छिनारी, बड़े घरसोडा, अनंतपुर, मालगांव, बिलोंडी, हीरापुर, बबई आदि गांव शामिल हैं।



