
पहले नक्सली थे IED ब्लास्ट में शहीद हुए 8 में से 5 जवान, सरेंडर के बाद नक्सलियों के खिलाफ थामा था हथियार
रायपुर: छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में सोमवार को हुए ब्लास्ट में जिन डीआरजी जवानों की शहादत हुई है, उनमें 5 सरेंडर नक्सली थे. ये नक्सलवाद से परेशान होकर मुख्य धारा में लौटे थे और नक्सलियों के खिलाफ ही लड़ाई लड़ने के लिए डीआरजी की टीम में शामिल होकर हथियार उठाया था.
जिले के कुटरू थाना क्षेत्र के अंबेली गांव के पास सुरक्षाकर्मियों के काफिले में शामिल एक वाहन को नक्सलियों ने बारूदी सुरंग में विस्फोट करके उड़ा दिया था. इस घटना में सुरक्षाबल के आठ जवानों और वाहन चालक की मौत हो गई है. मृतकों में डीआरजी और बस्तर फाइटर्स के चार-चार जवान और एक वाहन चालक शामिल था. यह पिछले दो साल में छत्तीसगढ़ में नक्सलियों द्वारा सुरक्षाबलों पर किया गया सबसे बड़ा हमला है.
‘माटी पुत्र’ कहे जाने वाले डीआरजी जवानों की भर्ती बस्तर संभाग के स्थानीय युवाओं और आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में से की जाती है. इसे राज्य में अग्रिम पंक्ति का नक्सल विरोधी बल माना जाता है. ये नक्सल अभियान के लिए जवानों की सबसे मजबूत टीम है.
DRG के ये जवान पहले थे नक्सली
बस्तर क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी ने बताया कि विस्फोट में मारे गए जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी) के हेड कांस्टेबल बुधराम कोरसा और कांस्टेबल डूम्मा मरकाम,पंडरू राम, बामन सोढ़ी और बस्तर फाइटर्स के कांस्टेबल सोमडू वेट्टी सुरक्षाबल में शामिल होने से पहले नक्सली के रूप में सक्रिय थे. वे आत्मसमर्पण करने के बाद पुलिस में शामिल हुए थे. सुंदरराज ने बताया कि कोरसा और सोढ़ी बीजापुर जिले के रहने वाले थे, जबकि तीन अन्य पड़ोसी दंतेवाड़ा जिले के थे. उन्होंने बताया कि पिछले साल सात जिलों वाले बस्तर क्षेत्र में 792 नक्सलियों ने सरेंडर किया था.



