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छत्तीसगढ़जांजगीर-चांपा

“एक पेड़ की कटाई या पूरी व्यवस्था की चुप्पी?” 120 दिनों से अधिक समय से लंबित जांच, आरटीआई का जवाब नहीं, अपील की सुनवाई भी टली — आखिर किसे बचाया जा रहा है?

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विशेष खोजी रिपोर्ट | MEDIA HOUSE MPCG INVESTIGATION DESK

जांजगीर-चांपा जिले में एक ऐसा प्रकरण सामने आया है जिसने प्रशासनिक जवाबदेही, सूचना के अधिकार व्यवस्था तथा पर्यावरणीय संरक्षण तंत्र की प्रभावशीलता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

हसदेव नहर जल प्रबंधन संभाग, जांजगीर के कार्यालय परिसर में स्थित एक विशाल जीवित एवं हरे-भरे वृक्ष की कटाई को लेकर प्रस्तुत शिकायतों, आरटीआई आवेदन, प्रथम अपील एवं विभागीय पत्राचार के बावजूद कई महीनों बाद भी कोई स्पष्ट जांच निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

दस्तावेज बताते हैं कि शिकायतकर्ता द्वारा संबंधित अधिकारियों को बार-बार आवेदन प्रस्तुत किए गए, परंतु आज तक न तो जांच प्रतिवेदन सार्वजनिक हुआ और न ही जिम्मेदारी तय होने की कोई आधिकारिक जानकारी सामने आई।

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⚖️ POINT–1 : शिकायत हुई, लेकिन कार्रवाई कहां हुई?

✔️ 28 जनवरी 2026 को प्रथम शिकायत प्रस्तुत की गई।

✔️ शिकायत में वृक्ष कटाई की वैधता, अनुमति, एनओसी, विभागीय स्वीकृति तथा लकड़ी के निस्तारण की जांच की मांग की गई।

✔️ 06 फरवरी 2026 को पुनः अनुस्मारक शिकायत दी गई।

✔️ शिकायतकर्ता का आरोप है कि इतने महत्वपूर्ण मामले में अब तक किसी भी प्रकार की निर्णायक प्रशासनिक कार्रवाई सामने नहीं आई।

प्रश्न यह उठता है कि यदि सब कुछ नियमसम्मत था तो जांच प्रतिवेदन सार्वजनिक क्यों नहीं हुआ?

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📑 POINT–2 : कलेक्टर कार्यालय ने पत्र भेजा, फिर फाइल कहां अटक गई?

उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार कलेक्टर कार्यालय द्वारा प्रकरण को गंभीर मानते हुए संबंधित विभाग को जांच एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु अग्रेषित किया गया।

यह तथ्य महत्वपूर्ण है क्योंकि किसी शिकायत का विभागीय स्तर पर संदर्भित किया जाना स्वयं इस बात का संकेत है कि मामले को प्रथम दृष्टया परीक्षण योग्य माना गया था।

इसके बावजूद कई माह बीत जाने के बाद भी परिणाम सार्वजनिक नहीं होना अनेक प्रश्न उत्पन्न करता है।

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🔍 POINT–3 : आरटीआई में मांगी गई जानकारी भी नहीं मिली

शिकायतकर्ता द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत जांच प्रतिवेदन, अनुमति दस्तावेज, विभागीय अभिलेख एवं संबंधित सूचनाएं मांगी गईं।

आरोप है कि निर्धारित अवधि के भीतर पूर्ण जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।

यदि ऐसा है तो यह केवल सूचना उपलब्ध कराने में देरी का विषय नहीं बल्कि पारदर्शिता के प्रश्न से भी जुड़ जाता है।

सूचना का अधिकार अधिनियम का मूल उद्देश्य प्रशासनिक कार्यप्रणाली को जनता के प्रति जवाबदेह बनाना है।

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📢 POINT–4 : प्रथम अपील की सुनवाई भी अधर में

आरटीआई का संतोषजनक उत्तर नहीं मिलने पर प्रथम अपील प्रस्तुत की गई।

दस्तावेजों के अनुसार सुनवाई की तिथि भी निर्धारित हुई।

किन्तु शिकायतकर्ता का कहना है कि निर्धारित तिथि पर अंतिम सुनवाई नहीं हुई तथा आगे की तिथि देने का आश्वासन दिया गया, जो अब तक प्राप्त नहीं हुआ।

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यदि यह तथ्य सही है तो यह प्रशासनिक विलंब की एक और परत को उजागर करता है।

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🌳 POINT–5 : क्या पर्यावरणीय संपदा की वास्तविक क्षति हुई?

शिकायतों में उल्लेखित वृक्ष का आकार अत्यंत विशाल बताया गया है।

यदि वृक्ष कटाई नियमों के अनुरूप हुई होगी तो संबंधित अनुमति एवं अभिलेख उपलब्ध होने चाहिए।

यदि अनुमति उपलब्ध नहीं है तो पर्यावरणीय, प्रशासनिक एवं वित्तीय उत्तरदायित्व का प्रश्न स्वतः उत्पन्न होता है।

यही कारण है कि स्वतंत्र जांच की मांग लगातार उठाई जा रही है।

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🚨 POINT–6 : सबसे बड़ा प्रश्न — जांच क्यों नहीं पूरी हुई?

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि—

✅ शिकायत हुई

✅ अनुस्मारक दिया गया

✅ कलेक्टर कार्यालय ने संज्ञान लिया

✅ आरटीआई दायर हुई

✅ प्रथम अपील दायर हुई

✅ सुनवाई तिथि निर्धारित हुई

फिर भी अंतिम निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं हुआ।

यही वह बिंदु है जिसने पूरे मामले को सामान्य शिकायत से आगे बढ़ाकर सार्वजनिक महत्व के विषय में परिवर्तित कर दिया है।

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⚖️ विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

प्रशासनिक एवं सूचना अधिकार विषयों के जानकारों का मानना है कि किसी भी शिकायत का अंतिम परिणाम चाहे जो हो, जांच प्रक्रिया का समयबद्ध एवं पारदर्शी होना लोकतांत्रिक प्रशासन की मूल आवश्यकता है।

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यदि किसी प्रकरण में लंबे समय तक स्थिति अस्पष्ट बनी रहती है तो स्वाभाविक रूप से जनसामान्य के मन में प्रश्न उत्पन्न होते हैं।

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📌 MEDIA HOUSE MPCG का प्रश्न

🔴 क्या जांच प्रतिवेदन तैयार हुआ?

🔴 यदि हुआ तो सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया?

🔴 वृक्ष कटाई की अनुमति किसने दी?

🔴 लकड़ी का निस्तारण कैसे हुआ?

🔴 आरटीआई के प्रश्नों का उत्तर क्यों लंबित है?

🔴 प्रथम अपील का अंतिम निर्णय कब होगा?

🔴 क्या स्वतंत्र जांच की आवश्यकता है?

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📢 MEDIA HOUSE MPCG की मांग

✔️ जांच प्रतिवेदन सार्वजनिक किया जाए।

✔️ आरटीआई के अंतर्गत मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराई जाए।

✔️ प्रथम अपील का शीघ्र निस्तारण किया जाए।

✔️ समस्त अभिलेख सुरक्षित रखे जाएं।

✔️ यदि आवश्यक हो तो स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए।

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⚖️ निष्कर्ष

यह मामला केवल एक वृक्ष की कटाई तक सीमित नहीं है।

यह मामला प्रशासनिक पारदर्शिता, सूचना के अधिकार, पर्यावरणीय उत्तरदायित्व और जनविश्वास से जुड़ा हुआ प्रतीत होता है।

जब तक संबंधित विभाग तथ्यात्मक स्थिति सार्वजनिक नहीं करता, तब तक यह प्रकरण जनचर्चा और प्रशासनिक जवाबदेही का विषय बना रहेगा।

✍️ INVESTIGATION DESK
MEDIA HOUSE MPCG

“सवाल व्यवस्था से है, निष्कर्ष जांच बताएगी।”

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