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‘महानदी’ का सीना चीरकर रेत माफिया कर रहा अवैध उत्खनन और परिवहन

वहीं कार्रवाई के नाम पर प्रशासन खानापूर्ति में जुटा

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आरंग। आरंग क्षेत्र के महानदी किनारे लगभग आधा दर्जन गांवों में रेत का अवैध उत्खनन और परिवहन धड़ल्ले से जारी है. रेत माफिया बेखौफ होकर दिन-रात ‘छत्तीसगढ़ की जीवन रेखा’ कही जाने वाले महानदी से बेहिसाब रेत निकाल कर नदी के अस्तित्व को खतरे में डाल रहे हैं. आरंग से महज पांच किलोमीटर दूर ग्राम पारागांव, राटाकाट, गौरभाट, हरदीडीह, कुटेला सहित महानदी के किनारे स्थित अनेक गांवों में रेत का अवैध उत्खनन जारी है. लेकिन रायपुर खनिज विभाग और स्थानीय प्रशासन की नजर इस पर नहीं जा रही.

बीती रात आरंग से लगभग 25 किमी दूर ग्राम कुरूद में जाकर खनिज विभाग, आरंग राजस्व विभाग और आरंग पुलिस की संयुक्त टीम ने एक चैन माउंटिंग मशीन और 4 रेत से भरी हाइवा को जब्त करने की कार्रवाई की. जबकि उसी दिन याने बुधवार को पारागांव में चार चैन माउंटिग मशीन के जरिए महानदी से बेखौफ रेत निकाल जा रही थी, इसके साथ लगभग 50 से 60 हाइवा के जरिए रेत का अवैध परिवहन भी किया जा रहा था. यही नहीं महानदी के किनारे लगभग तीन किमी तक रेत का अवैध भंडारण किया गया है.

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सूत्रों के अनुसार, इन जगहों पर राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण के कारण कोई कार्रवाई नहीं हो रही है. वहीं कुछ माह पहले हरदीडीह रेत खदान में खनिज विभाग की टीम को बंधक बनाने और मारपीट की घटना के बाद से डरी हुई खनिज विभाग की टीम भी बेबस और लाचार नजर आ रही है.

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RAJIV RASTOGI NEWS NETWORK SERVICE

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