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CM डॉ. मोहन यादव ने परमपूज्य सद्गुरु श्री ऋतेश्वर जी के श्रीचरणों में किया प्रणाम, झाँसी में दिखी गुरु-परंपरा की गरिमा

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गुरु-परंपरा के प्रति श्रद्धा का अनुपम प्रतिमान : परमपूज्य सद्गुरु श्री ऋतेश्वर जी के श्रीचरणों में नतमस्तक हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, झाँसी बना आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक गरिमा और लोक-नेतृत्व के समन्वय का साक्षी 🕉️✨

झाँसी। भारतीय सभ्यता का दार्शनिक अधिष्ठान इस सनातन सत्य पर आधारित है कि गुरु केवल ज्ञान के संवाहक नहीं, बल्कि चेतना के प्रज्वालक, व्यक्तित्व के शिल्पकार, मूल्य-व्यवस्था के संरक्षक तथा राष्ट्र की सांस्कृतिक आत्मा के जीवंत प्रतिनिधि होते हैं। भारतीय मनीषा ने सदियों पूर्व उद्घोष किया था— “गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः।” यही कारण है कि जब सार्वजनिक जीवन का कोई शीर्ष नेतृत्व अपने दायित्वों की व्यस्तता के मध्य गुरुचरणों में विनम्रतापूर्वक उपस्थित होता है, तब वह दृश्य केवल व्यक्तिगत श्रद्धा का परिचायक नहीं रहता, बल्कि सांस्कृतिक उत्तरदायित्व, आध्यात्मिक संवेदनशीलता और नैतिक नेतृत्व का सार्वजनिक प्रतिरूप बन जाता है।

इसी आध्यात्मिक आलोक से अनुप्राणित गुरु पूर्णिमा महा-महोत्सव की पावन यात्रा के क्रम में झाँसी सर्किट हाउस एक अत्यंत भावपूर्ण, गरिमामय और प्रेरणास्पद क्षण का साक्षी बना। मध्यप्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने अत्यंत व्यस्त शासकीय दायित्वों के मध्य विशेष रूप से समय निकालकर परमपूज्य सद्गुरु श्री ऋतेश्वर जी के पावन दर्शन किए तथा श्रद्धा, विनय और पूर्ण समर्पण के साथ उनके श्रीचरणों में प्रणाम कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

यह केवल एक शिष्टाचार भेंट नहीं थी, बल्कि भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा के उस कालजयी दर्शन की सजीव अभिव्यक्ति थी, जिसमें ज्ञान को सत्ता से, संस्कार को सफलता से और अध्यात्म को लोकमंगल से श्रेष्ठ माना गया है। सार्वजनिक नेतृत्व और आध्यात्मिक मूल्यों के इस समन्वय ने उपस्थित जनसमूह के समक्ष भारतीय सांस्कृतिक विरासत की जीवंत अनुभूति कराई।

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राजनीतिक विज्ञान, नैतिक नेतृत्व (Ethical Leadership), सांस्कृतिक कूटनीति (Cultural Diplomacy), सामाजिक पूंजी (Social Capital) और मूल्य-आधारित शासन (Value-Based Governance) के विशेषज्ञ लंबे समय से यह मानते रहे हैं कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की स्थिरता केवल प्रशासनिक दक्षता से नहीं, बल्कि उसके नैतिक एवं सांस्कृतिक आधार से भी निर्मित होती है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का यह विनम्र भाव उसी मूल्य-आधारित नेतृत्व की एक प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति के रूप में देखा जा सकता है।

गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व से पूर्व सद्गुरु के श्रीचरणों में उपस्थित होकर आशीर्वाद ग्रहण करना भारतीय जीवन-दर्शन की उस शाश्वत परंपरा का स्मरण कराता है, जिसमें गुरु को आत्मबोध, विवेक, अनुशासन, चरित्र-निर्माण और लोककल्याण का सर्वोच्च प्रेरणा-स्रोत माना गया है। यह दृश्य श्रद्धा, संस्कार और आत्मिक विनम्रता की ऐसी अभिव्यक्ति बनकर उभरा, जिसने उपस्थित प्रत्येक श्रद्धालु के मन को गहराई से स्पर्श किया।

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परमपूज्य सद्गुरु श्री ऋतेश्वर जी का आध्यात्मिक मार्गदर्शन मानवता, नैतिकता, आत्म-विकास, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक जागरण के मूल्यों को सुदृढ़ करने की प्रेरणा देता है। ऐसे में मुख्यमंत्री का उनके श्रीचरणों में उपस्थित होना समाज के व्यापक सांस्कृतिक विमर्श में गुरु-परंपरा की प्रासंगिकता और आध्यात्मिक चेतना के महत्व को रेखांकित करने वाला एक महत्वपूर्ण अवसर माना जा सकता है।

आज जब वैश्विक परिदृश्य तीव्र तकनीकी परिवर्तन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल संक्रमण और सामाजिक परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है, तब भारतीय ज्ञान-परंपरा का मूल संदेश—संस्कार, विवेक, आत्मानुशासन और मानवीय मूल्यों का संरक्षण—और भी अधिक प्रासंगिक हो उठता है। गुरु-परंपरा इन मूल्यों की वाहक रही है और यही उसकी स्थायी शक्ति है।

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झाँसी सर्किट हाउस में घटित यह गरिमामय क्षण केवल एक भेंट का दृश्य नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक चेतना, आध्यात्मिक परंपरा और लोकसेवा की भावना के त्रिवेणी-संगम का सजीव प्रतीक बनकर उभरा। यह अवसर श्रद्धा, विनम्रता और सांस्कृतिक गौरव के उन मूल्यों को पुनर्स्मरण कराता है, जिन पर भारतीय सभ्यता की दीर्घकालिक वैचारिक यात्रा आधारित रही है।

संपादकीय दृष्टि

भारतीय लोकतांत्रिक परंपरा तब और अधिक सार्थक प्रतीत होती है जब सार्वजनिक नेतृत्व अपने संवैधानिक दायित्वों के साथ-साथ सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों के प्रति भी सम्मान प्रकट करता है। गुरु के प्रति श्रद्धा, ज्ञान के प्रति विनम्रता और लोककल्याण के प्रति समर्पण—ये तीनों तत्व भारतीय चिंतन की आधारशिला हैं। झाँसी में परमपूज्य सद्गुरु श्री ऋतेश्वर जी के सान्निध्य में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की यह उपस्थिति इन्हीं मूल्यों की सार्वजनिक अभिव्यक्ति के रूप में स्मरणीय रहेगी।

✍️ प्रस्तुति : मीडिया हाउस एमपी CG डॉट कॉम (Media House MP CG.com)

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