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आरबीसी 6(4) का सबसे बड़ा सवाल: क्या बिलासपुर की कार्रवाई अब पूरे छत्तीसगढ़ में खोलेगी नए राज?

17.24 करोड़ रुपये के कथित सर्पदंश मुआवजा घोटाले ने प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था पर खड़े किए गंभीर प्रश्न

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𝐌𝐄𝐃𝐈𝐀 𝐇𝐎𝐔𝐒𝐄 𝐌𝐏𝐂𝐆.𝐂𝐎𝐌◼️ 𝐑𝐀𝐉𝐄𝐄𝐕 𝐑𝐀𝐒𝐓𝐎𝐆𝐈 𝐍𝐄𝐖𝐒 𝐍𝐄𝐓𝐖𝐎𝐑𝐊

रायपुर/बिलासपुर। राजस्व पुस्तक परिपत्र (RBC) 6(4) के तहत सर्पदंश से मृत्यु होने पर मिलने वाली सरकारी आर्थिक सहायता में कथित अनियमितताओं ने पूरे छत्तीसगढ़ को झकझोर दिया है। बिलासपुर में सामने आए लगभग 17.24 करोड़ रुपये के कथित घोटाले की जांच लगातार नई परतें खोल रही है। पुलिस ने विभिन्न चरणों में डॉक्टर, राजस्व कर्मियों, वकीलों, बैंक कर्मियों और अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है तथा कई एफआईआर दर्ज कर जांच का दायरा बढ़ाया है।

◆ विधानसभा से सड़क तक गूंजा मामला

यह मामला तब और गंभीर हो गया जब इसे विधानसभा में उठाया गया। बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने बिलासपुर जिले में सर्पदंश से मौतों और मुआवजा वितरण के आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए व्यापक जांच की मांग की। इसके बाद पुलिस और प्रशासनिक एजेंसियों ने जांच तेज की, जिसके बाद लगातार गिरफ्तारियां और एफआईआर सामने आईं।

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◆ जांच में सामने आया कथित सिंडिकेट

पुलिस के अनुसार, जांच में ऐसे आरोप सामने आए हैं कि कुछ मामलों में वास्तविक मृत्यु के कारण को बदलकर सर्पदंश दर्शाया गया और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी सहायता राशि स्वीकृत कराई गई। जांच एजेंसियां इसे संगठित नेटवर्क के रूप में भी देख रही हैं। हालांकि इन आरोपों का अंतिम सत्यापन न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।

◆ क्या जांजगीर-चांपा भी जांच के दायरे में आ सकता है?

बिलासपुर में हुई कार्रवाई के बाद यह प्रश्न भी उठ रहा है कि क्या अन्य जिलों में भी आरबीसी 6(4) के तहत स्वीकृत प्रकरणों की समीक्षा होगी। जांजगीर-चांपा में भी अतीत में कुछ मामलों में शिकायतों के बाद सहायता राशि वापस शासकीय कोष में जमा कराए जाने की बातें सार्वजनिक चर्चा में रही हैं। यदि किसी जिले में शिकायत, दस्तावेजी साक्ष्य या प्रारंभिक जांच में अनियमितता मिलती है, तो संबंधित एजेंसियां कानूनी कार्रवाई कर सकती हैं। फिलहाल जांजगीर-चांपा में इस मामले में किसी नई गिरफ्तारी या एफआईआर की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

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◆ अधिकारियों की भूमिका पर उठ रहे प्रश्न

जांच के साथ-साथ यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि किसी प्रकरण में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मुआवजा स्वीकृत हुआ, तो उस पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया में किन-किन स्तरों पर जिम्मेदारी तय होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि जांच पूरी होने के बाद यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका के साक्ष्य मिलते हैं तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।

◆ पूरे प्रदेश के लिए चेतावनी

बिलासपुर की कार्रवाई केवल एक जिले तक सीमित मामला नहीं मानी जा रही। प्रशासनिक विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस जांच में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं की पुष्टि होती है तो सरकार अन्य जिलों में भी आरबीसी 6(4) के पुराने प्रकरणों का ऑडिट या विशेष सत्यापन करा सकती है। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई सार्वभौमिक सरकारी आदेश जारी होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

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◆ आगे की दिशा

फिलहाल पुलिस जांच जारी है और कई मामलों की पड़ताल की जा रही है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, वैसे-वैसे इस कथित घोटाले की नई परतें सामने आ सकती हैं। अंतिम जिम्मेदारी और दोष तय करना न्यायालय का विषय होगा।

(नोट: इस समाचार में जिन व्यक्तियों या विभागों का उल्लेख जांच के संदर्भ में है, उनके विरुद्ध आरोप अभी न्यायालय में सिद्ध होना शेष है। अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही माना जाएगा।)

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RAJIV RASTOGI NEWS NETWORK SERVICE

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