
छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार पर सबसे बड़ी पड़ताल: पिछले पांच वर्षों में किन विभागों पर सबसे अधिक कार्रवाई?
रायपुर, 22 जुलाई। छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) की कार्रवाई लगातार जारी है। सरकारी कार्यालयों में रिश्वतखोरी की शिकायतों पर समय-समय पर ट्रैप कार्रवाई और जांच की गई है। पिछले पांच वर्षों के उपलब्ध कार्रवाई संबंधी रिकॉर्ड का विश्लेषण बताता है कि कई प्रमुख विभागों के अधिकारी और कर्मचारी जांच के दायरे में आए हैं।
सूत्रों और उपलब्ध कार्रवाई के रिकॉर्ड के अनुसार, राजस्व विभाग में सबसे अधिक ट्रैप और भ्रष्टाचार संबंधी मामले दर्ज हुए हैं। इनमें पटवारी, राजस्व निरीक्षक, लिपिक तथा अन्य कर्मचारियों पर रिश्वत मांगने और लेने के आरोपों में कार्रवाई हुई। भूमि नामांतरण, सीमांकन, नक्शा, बंटवारा और राजस्व अभिलेखों से जुड़े कार्यों में शिकायतें अधिक दर्ज होने के कारण यह विभाग लगातार चर्चा में रहा।
इसके बाद स्कूल शिक्षा विभाग में भी प्रधान पाठक, शिक्षक, लिपिक तथा अन्य कर्मचारियों के विरुद्ध शिकायतों के आधार पर कार्रवाई की गई। वहीं पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में विकास कार्यों, भुगतान, निर्माण कार्यों और विभिन्न योजनाओं से जुड़े मामलों में जांच और कार्रवाई सामने आई।
इसी प्रकार नगरीय प्रशासन विभाग, लोक निर्माण विभाग (PWD), पुलिस विभाग, स्वास्थ्य विभाग, वन विभाग, जल संसाधन विभाग तथा अन्य विभागों के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध भी अलग-अलग मामलों में भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसियों ने कार्रवाई की।
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी विभाग में अधिक कार्रवाई होने का अर्थ यह नहीं है कि पूरा विभाग भ्रष्ट है। कार्रवाई उन अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध होती है जिनके खिलाफ शिकायत, प्राथमिक साक्ष्य और जांच में तथ्य सामने आते हैं। अंतिम दोष सिद्ध करने का अधिकार न्यायालय के पास होता है।
भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसियां लगातार आम नागरिकों से अपील कर रही हैं कि यदि कोई सरकारी कर्मचारी किसी काम के बदले रिश्वत मांगता है तो उसकी शिकायत तत्काल करें। शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखी जाती है और सत्यापन के बाद आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाती है।
प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि ई-ऑफिस, ऑनलाइन सेवाएं, डिजिटल भुगतान, समयबद्ध सेवा गारंटी और पारदर्शी कार्यप्रणाली भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के प्रभावी माध्यम बन रहे हैं। इसके बावजूद रिश्वतखोरी की घटनाएं पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं, इसलिए निगरानी और जवाबदेही को और मजबूत करने की आवश्यकता है।
(नोट: यह समाचार भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसियों द्वारा की गई कार्रवाइयों के आधार पर तैयार किया गया है। किसी भी अधिकारी या कर्मचारी के विरुद्ध आरोप तब तक अंतिम रूप से सिद्ध नहीं माने जाते, जब तक सक्षम न्यायालय द्वारा निर्णय न दिया जाए।)



