
₹3.60 करोड़ के ड्यूटी हॉल निर्माण पर उठे बड़े सवाल!, जांजगीर-चांपा कलेक्टर परिसर की बहु-करोड़ीय परियोजना जांच के घेरे में
जांजगीर-चांपा | विशेष रिपोर्ट | MEDIA HOUSE MP-CG
जिला कलेक्टर कार्यालय परिसर, जांजगीर-चांपा में लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा लगभग ₹3 करोड़ 60 लाख से अधिक की लागत से निर्मित/निर्माणाधीन ड्यूटी हॉल भवन को लेकर एक विस्तृत शिकायत शासन के उच्च स्तर तक पहुंचाई गई है। शिकायत में निर्माण कार्य की गुणवत्ता, तकनीकी मानकों के अनुपालन, निरीक्षण प्रक्रिया, इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की गुणवत्ता तथा भुगतान प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्न उठाए गए हैं।
शिकायत सामने आने के बाद प्रशासनिक एवं तकनीकी हलकों में चर्चा तेज हो गई है। शिकायतकर्ता ने मामले को केवल निर्माण गुणवत्ता तक सीमित न बताते हुए इसे सार्वजनिक धन, प्रशासनिक जवाबदेही और शासकीय परिसंपत्तियों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय बताया है।
🔴 सबसे बड़ा सवाल: क्या जांच से पहले हो जाएगा भुगतान?
पूरे प्रकरण में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा भुगतान प्रक्रिया को लेकर सामने आया है।
शिकायत में दावा किया गया है कि यदि निर्माण कार्य की तकनीकी एवं वित्तीय जांच पूरी होने से पहले संबंधित एजेंसी या ठेकेदार को अंतिम भुगतान कर दिया जाता है, तो संभावित अनियमितताओं की स्थिति में शासन को होने वाली क्षति की भरपाई कठिन हो सकती है।
इसी आधार पर मांग की गई है कि जब तक स्वतंत्र जांच, तकनीकी परीक्षण एवं वित्तीय सत्यापन पूरा नहीं हो जाता, तब तक किसी भी प्रकार का अंतिम भुगतान, अतिरिक्त दावा भुगतान अथवा सुरक्षा निधि विमोचन न किया जाए।
🟡 क्या करोड़ों की परियोजना में गुणवत्ता मानकों का हुआ पालन?
शिकायत में कहा गया है कि निर्माण कार्य में उपयोग की गई सामग्री की गुणवत्ता का स्वतंत्र परीक्षण कराया जाना चाहिए।
मांग की गई है कि भवन निर्माण में प्रयुक्त—
✔️ सीमेंट
✔️ स्टील
✔️ गिट्टी
✔️ रेत
✔️ कंक्रीट
✔️ अन्य निर्माण सामग्री
की वैज्ञानिक एवं प्रयोगशाला स्तर पर जांच कराई जाए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि उपयोग की गई सामग्री स्वीकृत तकनीकी मानकों के अनुरूप है या नहीं।
🔴 संरचनात्मक मजबूती की भी उठी मांग
शिकायत के अनुसार भवन की वास्तविक गुणवत्ता और दीर्घकालिक सुरक्षा का आकलन आधुनिक तकनीकी परीक्षणों से किया जाना चाहिए।
इसके लिए निम्न परीक्षणों की मांग की गई है—
✔️ Rebound Hammer Test
✔️ Ultrasonic Pulse Velocity Test (UPV)
✔️ Core Cutting Test
✔️ Load Test
✔️ Structural Stability Assessment
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे परीक्षण किसी भी बड़े सार्वजनिक निर्माण की वास्तविक गुणवत्ता का आकलन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
🟡 इलेक्ट्रॉनिक और इलेक्ट्रिकल उपकरण भी जांच के दायरे में
मामला केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं है।
शिकायत में भवन में स्थापित किए जाने वाले तकनीकी उपकरणों की भी स्वतंत्र जांच की मांग की गई है।
इनमें शामिल हैं—
📡 CCTV Surveillance System
📡 LED Display System
📡 Conference Equipment
📡 Networking Infrastructure
📡 Air Conditioning System
📡 Electrical Distribution System
शिकायतकर्ता ने इन सभी उपकरणों की वारंटी, गारंटी, OEM प्रमाणन, GST बिल और तकनीकी दस्तावेजों के सत्यापन की मांग की है।
🔴 निरीक्षण अधिकारियों की भूमिका पर भी उठे प्रश्न
शिकायत में निर्माण कार्य का निरीक्षण करने वाले अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं।
मुख्य प्रश्न यह है कि यदि निर्माण कार्य पूरी तरह मानकों के अनुरूप है तो स्वतंत्र जांच में किसी प्रकार की आपत्ति क्यों होनी चाहिए?
वहीं यदि जांच में कोई कमी सामने आती है तो निरीक्षण, गुणवत्ता नियंत्रण और प्रमाणन प्रक्रिया की समीक्षा भी आवश्यक होगी।
इसी आधार पर उप अभियंता, सहायक अभियंता, कार्यपालन अभियंता तथा गुणवत्ता नियंत्रण प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों की भूमिका की स्वतंत्र जांच की मांग की गई है।
🟡 रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग
शिकायत में यह भी मांग की गई है कि जांच प्रभावित न हो, इसके लिए महत्वपूर्ण दस्तावेजों को सुरक्षित अभिरक्षा में लिया जाए।
इनमें शामिल हैं—
📑 Measurement Book (MB)
📑 Quality Register
📑 Cement Register
📑 Steel Register
📑 Test Reports
📑 Running Bills
📑 Final Bills
📑 Tender Documents
📑 Agreement Files
📑 Inspection Notes
🔴 थर्ड पार्टी जांच की मांग ने बढ़ाई चर्चा
शिकायतकर्ता ने मामले की जांच स्थानीय स्तर के बजाय स्वतंत्र विशेषज्ञ संस्था से कराने की मांग की है।
मांग के अनुसार जांच निम्न संस्थाओं में से किसी के माध्यम से कराई जा सकती है—
✔️ राज्य स्तरीय गुणवत्ता नियंत्रण दल
✔️ स्वतंत्र तकनीकी विशेषज्ञ समिति
✔️ शासकीय इंजीनियरिंग संस्थान
✔️ प्रतिष्ठित थर्ड पार्टी ऑडिट एजेंसी
🟡 यदि आरोप सही निकले तो हो सकती है बड़ी कार्रवाई
शिकायत में कहा गया है कि यदि जांच के दौरान तकनीकी त्रुटि, गुणवत्ता संबंधी कमी, वित्तीय अनियमितता, प्रक्रिया उल्लंघन या शासन को आर्थिक क्षति पहुंचाने वाले तथ्य सामने आते हैं, तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार विभागीय, वित्तीय एवं विधिक कार्रवाई की जानी चाहिए।
🚨 अब सबकी नजर शासन के अगले कदम पर
करोड़ों रुपये की लागत वाली इस महत्वपूर्ण शासकीय परियोजना को लेकर उठे सवालों ने प्रशासनिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है।
फिलहाल संबंधित विभागों की ओर से इस शिकायत पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शासन इस शिकायत पर क्या निर्णय लेता है, क्या स्वतंत्र तकनीकी एवं वित्तीय जांच के आदेश जारी होते हैं, और क्या जांच पूरी होने तक भुगतान रोकने की मांग पर कोई प्रशासनिक निर्णय लिया जाता है।
🔴🟡 MEDIA HOUSE MP-CG | INVESTIGATION DESK
(नोट: यह समाचार उपलब्ध शिकायत, प्रस्तुत दस्तावेजों एवं शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों/मांगों पर आधारित है। आरोपों की पुष्टि संबंधित जांच अथवा सक्षम प्राधिकारी द्वारा किया जाना शेष है।)
यह प्रारूप समाचार लेखन के लिए अधिक सुरक्षित, संतुलित और प्रकाशन-उपयुक्त है, क्योंकि इसमें आरोपों को स्थापित तथ्य के रूप में नहीं बल्कि शिकायत और जांच की मांग के रूप में प्रस्तुत किया गया है।



