
UPI हमेशा मुफ्त रहेगा, मैंने कभी ऐसा नहीं कहा: RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा
क्या UPI यानी यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस से होने वाला पेमेंट हमेशा फ्री बना रह सकता है? भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को इसे लेकर एक अहम बयान दिया। RBI गवर्नर ने कहा कि UPI सर्विस की लागत को किसी न किसी को तो उठाना ही पड़ेगा। RBI की मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में गवर्नर मल्होत्रा ने कहा, “मैंने कभी यह नहीं कहा कि UPI हमेशा मुफ्त रहेगा। मैंने सिर्फ यह कहा था कि इसमें एक लागत है, और वह किसी न किसी को चुकानी ही होगी।”
उन्होंने आगे कहा, “लागत का भार कौन उठाएगा, यह जरूरी है। लेकिन उससे भी अधिक जरूरी यह है कि लोग इसके जरिए पेमेंट करें। ऐसे में इस मॉडल के टिकाऊ बने रहने के लिए यह जरूरी है कि कोई इसकी लागत उठाए, फिर चाहे वह सरकार हो, बैंक हों या यूजर्स।”
पहले भी जताई थी चिंता
यह पहली बार नहीं है जब गवर्नर संजय मल्होत्रा ने UPI मॉडल के टिकाऊपन को लेकर चिंता जताई हो। इससे पहले जुलाई में ही उन्होंने एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि UPI का जीरो-फीस वाला मॉडल लंबे समय तक नहीं जारी रह सकता है।
उन्होंने कहा था कि सरकार फिलहाल इस सिस्टम को सब्सिडी दे रही है और इसका फायदा भी देश को मिला है। डिजिटल लेनदेन में अभूतपूर्व ग्रोथ हुई है। RBI के आंकड़ों के अनुसार, जून 2025 में UPI के जरिए 18.4 बिलियन ट्रांजैक्शन हुए, जो सालाना आधार पर 32% की बढ़त है।
फिलहाल पूरी तरह सरकारी सब्सिडी पर निर्भर
मल्होत्रा ने यह भी स्वीकार किया कि फिलहाल UPI सिस्टम पूरी तरह से सरकार की ओर से मिल रही सब्सिडी पर चल रही है। बैंकों और दूसरे सर्विस प्रोवाइडर्स को इन ट्रांजैक्शंस की लागत सीधे तौर पर नहीं उठानी पड़ रही है। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि लंबी अवधि में यह मॉडल तभी टिकाऊ रह पाएगा जब इसके लागत कोई वहन करे।


