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आम आदमी को झटका… हेल्‍थ और लाइफ इंश्‍योरेंस के प्रीमियम पर नहीं घटेगी GST

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GST Council Meeting में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है. जीएसटी काउंसिल की बैठक में मंत्रियों की एक टीम ने हेल्थ और लाइफ इंश् योरेंस प्रीमियम पर जीएसटी को कम करने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन यह नेक्स्ट मीटिंग के लिए टाल दिया गया. इसका अर्थ है कि लोगों को अभी भी पुराने टैक् स रेट पर प्रीमियम देना होगा. स्वास्थ्य और जीवन बीमा पर प्रीमियम कम करने का निर्णय GST परिषद की 55वीं बैठक में टाल दिया गया, क्योंकि अधिक स्पष्टीकरण की आवश्यकता है. काउंसिल ने मंत्रियों के समूह (GOM) से अपनी रिपोर्ट को और अधिक विस्तृत बनाने के लिए अधिक जानकारी देने को कहा है. इससे पता चलता है कि हेल्थ और लाइफ इंश् योरेंस प्रीमियम को कम करने या GST रेट्स को बदलने पर कोई भी निर्णय लेने से पहले मामले को और अधिक जांच की आवश्यकता है.

जल्द दूसरे चरण की बैठक होगी शुरू

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में जीएसटी काउंसिल की 55वीं बैठक सुबह 11 बजे शुरू हुई थी और शाम साढ़े चार बजे से दूसरी चरण की बैठक शुरू होगी. केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी के अलावा बैठक में अरुणाचल प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री, गोवा, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, मेघालय और ओडिशा के मुख्यमंत्री और आर्थिक मामलों और व्यय विभागों के सचिव भी उपस्थित थे.

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अभी कितना लगता है GST रेट्स?

वर्तमान में, स्वास्थ्य बीमा, टर्म लाइफ इंश्योरेंस और यूनिट-लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान 18 प्रतिशत जीएसटी दर के तहत आते हैं. एंडोमेंट प्लान में जीएसटी आवेदन अलग होते हैं, पहले वर्ष 4.5 प्रतिशत और दूसरे वर्ष 2.25 प्रतिशत. जीवन बीमा के लिए सिंगल प्रीमियम एन्युटी पॉलिसियां 1.8 प्रतिशत जीएसटी दर पर हैं. 16 दिसंबर को, स्वास्थ्य बीमा पर मंत्रिसमूह (GOM) ने राज्य और केंद्र सरकार के राजस्व अधिकारियों को अपनी सिफारिशें दीं. ये रेट्स सभी आयु वर्ग पर समान रूप से लागू होते हैं.

क्‍या की गई थीं सिफारिश?

जीवन बीमा के लिए छूट: GOM ने शुद्ध अवधि जीवन बीमा पॉलिसियों (जो परिवार के सदस्यों को कवर करती हैं) के लिए जीएसटी से छुटकारा देने का प्रस्ताव दिया था. इससे पॉलिसीधारकों पर आर्थिक बोझ कम होगा.

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सीनियर सिटीजन के लिए स्वास्थ्य बीमा पर छूट: एक और महत्वपूर्ण सुझाव है कि सीनियर सिटीजन के लिए स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों पर जीएसटी से छूट दी जाए, जिससे बुजुर्गों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक किफायती बनाया जाएगा.

पर्सनल हेल् थ इंश् योरेंस पर जीएसटी दर कम करना: GOM ने सभी पर्सनल हेल् थ इंश् योरेंस पॉलिसियों पर जीएसटी दर को 5 प्रतिशत करने का प्रस्ताव भी रखा है, लेकिन इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का विकल्प नहीं है. इसका उद्देश्य व्यक्तिगत स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम की लागत को कम करना है.

इन शेयरों पर भी असर होगा!

सोमवार को जब शेयर बाजार खुलेगा तो GST रेट में कोई बदलाव नहीं करने से स्वास्थ्य और जीवन बीमा देने वाली लिस् टेड कंपनियों के शेयरों, जैसे पॉलिसीबाजार, गो डिजिट और निवा बूपा, (Policy Bazaar, Go Digit, Niva Bupa Stocks) पर इसका असर हो सकता है.

प्री-ऑन्ड वाहनों पर GST दरों में बढ़ोतरी

GST परिषद की 55वीं बैठक में प्री-ओन्ड वाहनों की बिक्री पर करको 12% से 18% करने की अनुमति दी गई है, साथ ही पुराने प्रयुक्त वाहनों की बिक्री पर करको 12% से 18% करने की अनुमति दी गई है. जीएसटी परिषद ने स्पष्ट किया कि 18% करदोनों पर लागू होगा. मार्जिन के साथ बेचे जाने पर और मूल्यह्रास का दावा करने के लिए किसी व्यवसाय से खरीदे जाने पर दोनों पर लागू होगा.

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सरकार को होगा 2,600 करोड़ रुपए का नुकसान!

GST काउंसिल के सूत्रों के अनुसार, अगर जीएसटी काउंसिल टर्म लाइफ पॉलिसी और हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर टैक्स कम करने का निर्णय लेती है, तो सरकार को हर साल लगभग 2,600 करोड़ रुपए का नुकसान होगा.

1,500 रुपए तक की लागत वाले रेडीमेड कपड़ों पर 5% GST

दिसंबर की शुरुआत में गठित मंत्री समूह ने परिषद को अपनी सिफारिशें दीं, जिसमें वातित पेय पदार्थों, तंबाकू, सिगरेट और संबंधित उत्पादों पर वर्तमान 28 प्रतिशत से कर को 35 % करने का प्रस्ताव था. रेडीमेड कपड़े पर 5 प्रतिशत जीएसटी और 1,500 से 10,000 रुपए तक की लागत वाले कपड़े पर 18 % GST लगाने का भी प्रस्ताव था.

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RAJIV RASTOGI NEWS NETWORK SERVICE

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