
11 माह में साइबर ठगी के 41 मामले दर्ज, अधिकतर केस मोबाइल से झांसा देने के… रहें अलर्ट
जांजगीर-चांपा। छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में साइबर ठगी के हर रोज मामले सामने आ रहे हैं। जागरूकता के अभाव में पढ़े लिखे लोग भी ठगी का शिकार हो जाते हैं। अधिकतर मामले ऐसे आते हैं जिसमें आपका अकाउंट बंद हो रहा है। चालू करने के लिए आपके पास एक ओटीपी आएगा। फिर आपका अकाउंट फिर से खुल जाएगा। ऐसे ठगी के मामलों की जांच करते करते पुलिस भी हैरान हो जाती है।
रहें अलर्ट…
मामला साइबर सेल टीम को सौप दिया जाता है। फिर साइबर सेल की टीम ठगी मामले की जांच करते-करते थक जाती है। सबसे पहले बैंक से संपर्क किया जाता है। फिर मामले की पतासाजी में जुट जाती है। इसके बाद मामले की जांच कर संबंधित थाने में एफआईआर के लिए सौंप दी जाती है। जिले के 11 थानों में बीते 11 महीने में 41 प्रकरण दर्ज किए जा चुके हैं। जिसमें सर्वाधिक मामला साइबर अपराध के हैं। जिसमें लोग अपनी गाढ़ी कमाई ठगों के झोली में भर चुके हैं।
सामान भिजवा रहा हूं 2.70 लाख अकाउंट में डाल दो
बहनीडीह थाना क्षेत्र के चोरिया निवासी नारायण थवाइत की बाराद्वार में इलेक्ट्रॉनिक की दुकान है। वह दिल्ली की कंपनी से सामान मंगवाता था। हर बार उसका सामान सही सलामत आ जाता था। लेकिन एक बार बुरी तरह फंस गया। डेढ़ साल पहले वह दिल्ली की उसी कंपनी से ऑनलाइन सामान मंगवाया।
ओटीपी बताया फिर 34600 रुपए हो गए गायब
जांजगीर की स्नेहा रायसागर के मोबाइल पर कुछ दिन पहले एक फोन आया। फोन पर सामने वाले ने कहा कि आपका अकाउंट बंद हो रहा है। आपको मोबाइल में एक ओटीपी जाएगी उसे भेजना, फिर आपका अकाउंट अपडेट हो जाएगा। स्नेहा ने संबंधित मोबाइल धारक को ओटीपी बता दिया। कुछ देर बाद उसके अकाउंट से 34 हजार 600 रुपए गायब हो गए। मामले की शिकायत उसने सिटी कोतवाली में दर्ज कराई। सिटी कोतवाली पुलिस ने मामले की डायरी साइबर सेल पुलिस को सौंपी है।
बल की कमी से दीगर प्रांत नहीं जा पाती पुलिस
थानों में हर रोज साइबर ठगी के एक न एक मामले सामने आते हैं। जिसमें ठगों के द्वारा ऑनलाइन ठगी की जाती है। पुलिस के द्वारा अक्सर उक्त फोन नंबर को ट्रेस किया जाता है। जांच में पता चलता है कि उक्त नंबर झारखंड के जामताड़ा या फिर यूपी बिहार के नंबर होते हैं।
हर रोज आती है शिकायत
साइबर सेल के प्रभारी पारस पटेल ने बताया कि साइबर सेल में हर रोज इस तरह की शिकायत आती है। अधिकतर फ्रॉड बैंक से रिलेटेड होते हैं। शिकायत मिलते ही सबसे पहले तो बैंक में पीड़ितों का खाता होल्ड करने की पहल की जाती है। ताकि संबंधित फ्रॉड के खाते में रकम न जा पाए।



