
क्लास रूम में भी छाता लेकर पढ़ाई, छत से पानी के साथ प्लास्टर भी गिर रहा, सूरजपुर जिले में स्कूल का ये हाल
सूरजपुर: छत्तीसगढ़ में एक तरफ पढ़ाई को डिजिटल किया जा रहा है लेकिन दूसरी तरफ ऐसे भी स्कूल हैं जहां छतों से टपकता पानी पढ़ने लिखने की उम्मीदों पर भी फिर रहा है. सूरजपुर जिले के दवना में स्थित हाई स्कूल का भी कुछ ऐसा ही हाल है. यहां लगभग 200 बच्चे पढ़ते हैं. कभी क्लास के अंदर भी छाता लेकर तो कभी छत पर बड़ी सी झिल्ली (पॉलीथिन) लगाकर. बारिश के मौसम में यहां छत से पानी के साथ प्लास्टर भी गिरता है.
मरम्मत का फंड आचार संहिता में अटका
बताया जा रहा है कि, स्कूल करीब 25 साल पुराना है. एक बार भी इसके रिनोवेशन का काम नहीं हुआ है. करीब 5-6 साल से छात्राएं तक परेशान हो रही हैं. जानकारी मिली कि, इसकी मरम्मत के लिए 6 लाख का फंड भी जारी हुआ था. हालांकि आचार संहिता के चलते वह भी चुनाव की भेंट चढ़ गया. यानी आचार संहिता के कारण उसे ब्लॉक किया गया था.
डिजिटल युग में प्रोजेक्टर ही खराब
स्कूल में बकायदा डिजिटल पढ़ाई के लिए प्रोजेक्टर भी लगा है. इसमें से भी पानी टपक टपककर खामी आ गई है. टपकती छत से किसी तरह बच गए तो जंग लगी खिड़कियों भारी बारिश में पानी आता है.
स्कूल के टीचर ऐसे तो कैमरे के सामने आकर कहने से बच रहे हैं, लेकिन बताया जा रहा है कि, इसके लिए उच्च अधिकारियों को भी जानकारी दी गई है. वहीं. अब DEO का कहना है कि, फिलहाल स्कूल को दूसरे भवन में शिफ्ट कराया जा रहा है. बारिश के बाद स्कूल की मरम्मत की जाएगी.
पढ़ाई का नुकसान होने के डर के चलते बच्चे जर्जर भवन में भी पढ़ाई कर रहे हैं. एक तरफ स्कूलों को डिजिटल किया जा रहा है, प्रोजेक्टर से पढ़ाई कराई जा रही है वहीं एक स्कूल में उसी प्रोजेक्टर से भी पानी टपकता है. गिरता प्लास्टर शिक्षा व्यवस्था को भी चोट पहुंचा रहा है. मरम्मत तो दूर सवालों के बाद अब कहीं जाकर सिर्फ वैकल्पिक व्यवस्था की बात की जा रही है.



