Advertisment
अन्य खबरें

भारत में ठप पड़ सकता है इंटरनेट, Google, Jio और Airtel को केबल कटने का डर, हूतियों ने बढ़ाई टेंशन

S-G-Travels
WhatsApp-Image-2026-06-17-at-4.28.41-PM-300x200
WhatsApp Image 2026-07-05 at 5.05.16 PM

हूती विद्रोही पहले अमेरिका और इजरायल के लिए सिरदर्द बने हुए थे, अब इनकी तबाही भारत को भी प्रभावित कर सकती है। लाल सागर में यमन के हूतियों ने तनाव बढ़ा दिया है, इस कारण भारत के इंटरनेट पर असर पड़ सकता है। दरअसल, भारत की अधिकतर इंटरनेट केबल्स इसी रास्ते से होकर जाती हैं। यदि इन केबल्स को नुकसान पहुंचता है तो भारत में इंटरनेट ठप पड़ सकता है। ऐसी परिस्थिति से बचने के लिए केबल कंपनियों ने अपनी ओर से प्रयास तेज कर दिए हैं। गूगल, एयरटेल और जियो जैसी कंपनियों के इंटरनेट पर खतरा मंडरा रहा है।

भारत के लिए क्यों अहम है लाल सागर का रास्ता?

भारत की डिजिटल इकोनॉमी के लिए लाल सागर का रास्ता बेहद जरूरी माना जाता है। इसको ऐसा भी कह सकते हैं कि यहां से गुजरने वाली केबल्स पर ही डिजिटल इकोनॉमी टिकी हुई है। यही केबल्स भारत को वर्ल्ड इंटरनेट से कनेक्ट करने का काम करती हैं। यहां से गूगल की ब्लू-रमन, एयरटेल की 2 अफ्रीका और Sea Me We 6 और रिलायंस जियो की इंडिया-यूरोप-एक्सप्रेस जैसी महत्वपूर्ण केबल्स मुंबई और चेन्नई के समुद्री किनारों तक पहुंच रही हैं।

इसे भी पढ़ें:  पीएम मोदी 2700 करोड़ के रेल प्रोजेक्ट का करेंगे शिलान्यास

केबल कंपनियों ने निकाला ये रास्ता

इकोनॉमिक्स टाइम्स की रिपोर्ट बताती है कि इस परिस्थिति से निपटने के लिए केबल कंपनियों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। अधिक फाइबर केबल्स जोड़ी जा रही हैं, ताकि इंटरनेट केबल्स कटें तो इनका इस्तेमाल किया जा सके। लाल सागर में बढ़ते खतरे को देखते हुए लाइटस्टॉर्म ग्रुप के CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर अमजित गुप्ता कहते हैं कि इस क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है, अगर कोई दिक्कत भी होती है, तो मरम्मत करना बहुत मुश्किल होगा। यही कारण है कि कई कंपनियां लाल सागर को छोड़कर जमीन पर केबल्स बिछाने की योजना पर भी काम कर रही हैं। हालांकि, यह एक महंगी प्रक्रिया है, ऐसा करने पर डेटा सेंटर और क्लाउड सर्विस प्रोवाइडर्स का खर्च बढ़ जाएगा।

इसे भी पढ़ें:  स्मार्टफोन बना काल, मोबाइल हुआ ब्लास्ट और चली गई टीचर की जान

केबल की मरम्मत करने वालों से वसूलते हैं फिरौती

यमन के हूती विद्रोहियों ने बीते एक महीने में 2 कमर्शियल कार्गो जहाज डुबो दिए हैं। लाल सागर में बिछी हुई केबल्स की मरम्मत के लिए जहाज जाते हैं, तब भी हूती विद्रोही इनसे फिरौती वसूलते हैं। केबल्स को काटने का डर दिखाते हुए हूतियों ने कुछ देशों पर दबाव बनाने का काम भी किया है। अमेरिका ने हूतियों को सबक सिखाने के लिए इन पर अटैक भी किए, लेकिन ये अपनी हरकतों से बाज नहीं आए हैं।

mediahousempcg

RAJIV RASTOGI NEWS NETWORK SERVICE

Related Articles