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छत्तीसगढ़ में प्रशासक चलाएंगे ‘शहर की सरकार’, नगरीय निकाय चुनाव में हो सकती है देरी

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के डिप्टी CM अरुण साव ने ऐलान किया है कि राज्य में नगरीय निकाय चुनाव EVM से नहीं बल्कि बैलेट पेपर से कराए जाएंगे लेकिन परिस्थितियां बता रही हैं कि अभी तुरंत चुनाव संभव नहीं. लिहाजा, 5 जनवरी के बाद निकायों को चलाने के लिए सरकार को प्रशासकों की नियुक्ति करनी ही होगी. क्योंकि कई बार कई नगर पालिका और निगम के कार्यकाल 5 जनवरी को खत्म हो रहे हैं. दूसरे शब्दों में कहें तो 5 जनवरी के बाद शहर की सरकार चुने हुए प्रतिनिधि नहीं बल्कि प्रशासक होंगे. ये जिले CMO या कमिश्नर के अलावा कोई और भी हो सकता है. राज्य में भूपेश बघेल की सरकार के दौरान भी ऐसा हो चुका है.

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नगरीय निकाय में चुनाव का गणित 

  • छत्तीसगढ में 33 जिलों में 184 निकाय हैं
  • राज्य में 14 नगर निगम हैं
  • प्रदेश में 48 नगर पालिका है
  • प्रदेश में 122 नगर पंचायत है
  • 10 निगम के कार्यकाल जनवरी में खत्म होंगे
  • राज्य के 15 निकायों का कार्यकाल 2 साल बचा है

दरअसल राज्य में निकाय चुनाव की तैयारी में हो रही देरी के चलते राजनीतिक हलकों में इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि निकाय चुनाव 3 महीने तक टल सकते हैं. इसी वजह से निकाय के कामकाज बेहतर तरीके से चलते रहें उसके लिए  चुने हुए महापौर और अध्यक्ष की जगह निकाय की बागडोर सरकार प्रशासक के हाथों में दे सकती है. इसी वजह से ऐसा माना जा रहा है कि 5 जनवरी के बाद सरकार प्रशासक की नियुक्ति का आदेश जारी कर सकती है.

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आरक्षण की प्रक्रिया ही पूरी होगी 7 जनवरी को

दूसरी तरफ चुनाव में हो रही देरी के लिए कांग्रेस बीजेपी पर हमलावर है. कांग्रेस के मीडिया सेल के चेयरमैन सुशील आनंद शुक्ला का कहना है कि बीजेपी चुनाव में जाने से डर रही है. हालांकि सरकार इससे इत्तेफाक नहीं रखती. राज्य के उप मुख्यमंत्री अरुण साव का कहना है कि अब EVM से चुनाव कराने का वक्त नहीं बचा है. इसलिए चुनाव बैलेट पेपर से कराए जाएंगे. लेकिन परेशानी ये है कि आरक्षण की प्रक्रिया 7 जनवरी तक ही पूरी होगी. जाहिर आरक्षण का फैसला होने के बाद ही चुनाव के ऐलान किए जा सकते हैं.

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महापौर के जितने अधिकार उतने ही प्रशासक के पास भी

नगर निगम एक्ट में किसी नगरीय निकाय में महापौर नियुक्त नहीं  होने पर प्रशासक नियुक्त करने का प्रावधान है. इस स्थिति में महापौर को मिलने वाले सारे अधिकार प्रशासक को मिल जाते हैं. आमतौर पर वरिष्ठ आईएएस अधिकारी या फिर राज्य प्रशासनिक सेवा के सीनियर अफसर को प्रशासक नियुक्त किया जाता है.महापौर नहीं चुने जाने तक नगर निगम के सारे निर्णय प्रशासक ही लेते हैं. पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सरकार के दौरान भी भिलाई चरौदा निगम के चुनाव समय पर नहीं होने पर प्रशासक की नियुक्ति की गई थी.

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RAJIV RASTOGI NEWS NETWORK SERVICE

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