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छत्तीसगढ़

महंगी हो सकती है बिजली: अभी साढ़े सात सौ करोड़ का फायदा, लेकिन पुराना घाटा सात हजार करोड़ का

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रायपुर। नए सत्र 2026-27 के लिए बिजली का नया टैरिफ तय करने के लिए छत्तीसगढ़ राज्य बिजली नियामक आयोग में छत्तीसगढ़ राज्य पॉवर कंपनी ने जो याचिका लगाई है, उसमें नए सत्र में कंपनी को साढ़े सात सौ करोड़ का फायदा हो रहा है, लेकिन इसी के साथ पुराना घाटा ही सात हजार करोड़ से ज्यादा का होने के कारण 63 सौ करोड़ के राजस्व की कमी बताई गई है। इस कमी को पूरा करने के लिए ही बिजली का नया टैरिफ तय करने की मांग की गई है। ऐसे में तय है कि इस बार भी बिजली महंगी होगी। संभावना यह है कि इस बार पिछली बार से बिजली ज्यादा महंगी हो सकती है, लेकिन इसका फैसला तो नियामक आयोग करेगा।

पिछली बार पॉवर कंपनी ने पांच हजार करोड़ का घाटा बताया था, इसको आयोग ने पांच सौ करोड़ माना था। इस बार आयोग जितना घाटा मानेगा उसके हिसाब से टैरिफ तय होगा। टैरिफ तय करने से पहले जनसुनवाई भी होगी। पॉवर कंपनी ने नए सत्र 2026-27 के लिए पूरा लेखा-जोखा बनाकर नियामक आयोग में नए टैरिफ के लिए याचिका दायर कर दी है। इस याचिका में बताया गया है कि प्रचलित दर से 26216 करोड़ का राजस्व मिलने की संभावना है। इसी के साथ साल भर का खर्च 25460 करोड़ बताया गया है। ऐसे में 756 करोड़ का फायदा होगा। लेकिन इसी के साथ पिछले सत्रों की अंतर की राशि का उल्लेख करते हुए बताया गया है कि नए सत्र के फायदे को पुराने अंतर की राशि में कम करने के बाद भी 63 सौ करोड़ के राजस्व की और जरूरत होगी।

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ज्यादा के राजस्व की जरूरत बताई
नए सत्र में 26 सौ करोड़ का राजस्व मिलेगा, पुराना घाटा 63 सौ करोड़ है, ऐसे में नए सत्र के लिए कुल 32 हजार पांच सौ करोड़ से ज्यादा के राजस्व की जरूरत बताई गई है। इस जरूरत के हिसाब से ही नया टैरिफ तय करने की मांग रखी गई है। पॉवर कंपनी ने अपनी तरफ से टैरिफ में इजाफा करने कोई प्रस्ताव नहीं रखा है, क्योंकि इसका फैसला आयोग ही करता है।

आयोग करेगा अब समीक्षा
बिजली नियामक आयोग को जो याचिका मिली है, उसकी पहले आयोग पूरी समीक्षा करेगा। इसमें आयोग देखेगा कि वास्तव में कंपनी को कितने राजस्व की जरूरत है।उसका वास्तव में खर्च कितना होगा। इसी के साथ कंपनी ने नए सत्र में जितनी बिजली बिकने की संभावना जताई है, उससे कितनी ज्यादा बिजली बिकेगी और इससे कितना राजस्व मिलेगा। सबसे अहम बात यह है कि कंपनी ने जो अंतर की 63 सौ करोड़ की राशि का उल्लेख किया है, आयोग उस अंतर की राशि में नए सत्र में उसको कितनी राशि लेने की मंजूरी देता है। इसी तय राशि के हिसाब से ही नया टैरिफ तय होगा। चल रहे सत्र में कंपनी के अनुमानित 4947.41 करोड़ रुपए राजस्व घाटे के स्थान पर आयोग ने 523.43 करोड़ रुपए मान्य किया था। पॉवर कंपनी के घाटे को पूरा माना जाता तो दरें 20 फीसदी तक बढ़ानी पड़ती लेकिन आयोग के घाटा पांच सौ करोड़ माना था इसलिए दरें दो फीसदी से भी कम बढ़ाई गई थी। अब इस बार आयोग पॉवर कंपनी का कितना घाटा मानता है, उसके हिसाब से ही नया टैरिफ तय होगा।

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RAJIV RASTOGI NEWS NETWORK SERVICE

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