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	<title>इलेक्टोरल बॉन्ड &#8211; MEDIA HOUSE MPCG</title>
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		<title>वित्त मंत्री बोलीं- हम इलेक्टोरल बॉन्ड फिर से लाएंगे, कांग्रेस बोली- और कितना लूटेंगे</title>
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		<dc:creator><![CDATA[mediahousempcg]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 20 Apr 2024 14:22:07 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[इलेक्टोरल बॉन्ड]]></category>
		<category><![CDATA[नई दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[बीजेपी]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम पर फिर विवाद हो सकता है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हिंदुस्तान टाइम्स को दिए इंटरव्यू में कहा कि अगर हम सत्ता में आए तो इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम को फिर से वापस लाएंगे। इसके लिए पहले बड़े स्तर पर सुझाव लिए जाएंगे। सरकार के दोबारा से इलेक्टोरल बॉन्ड लाने की बात पर &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p class="">इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम पर फिर विवाद हो सकता है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हिंदुस्तान टाइम्स को दिए इंटरव्यू में कहा कि अगर हम सत्ता में आए तो इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम को फिर से वापस लाएंगे। इसके लिए पहले बड़े स्तर पर सुझाव लिए जाएंगे।</p>
<p class="">सरकार के दोबारा से इलेक्टोरल बॉन्ड लाने की बात पर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि इस बार वे कितना लूटेंगे।</p>
<p class="">इससे पहले 15 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक फंडिंग के लिए इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था- यह स्कीम असंवैधानिक है। बॉन्ड की गोपनीयता बनाए रखना असंवैधानिक है। यह स्कीम सूचना के अधिकार का उल्लंघन है।</p>
<div class="f3e032cb "><picture class="c62bd949  "><source srcset="https://images.bhaskarassets.com/webp/thumb/360x0/web2images/521/2024/04/20/modi-quote-card_1713616999.jpg" type="image/webp" media="(max-width: 768px)" /><source srcset="https://images.bhaskarassets.com/webp/thumb/512x0/web2images/521/2024/04/20/modi-quote-card_1713616999.jpg" type="image/webp" media="(min-width: 768px)" /></picture></div>
<div class="f46ba790"></div>
<p class=""><strong>विपक्षी नेताओं ने क्या कहा</strong><br />
<strong>जयराम रमेश ने X पर लिखा</strong>&#8211; हम जानते हैं कि भाजपा ने PayPM ने घोटाले से 4 लाख करोड़ की लूट की। अब वे लूट जारी रखना चाहते हैं। जरा इन तरीकों पर ध्यान दें। PayPM: 1- चंदा दो, धंधा लो। 2. पोस्टपेड घूस- ठेका दो, रिश्वत लो। प्री-पेड और पोस्टपेड के लिए घूस- 3.8 लाख करोड़। 3. पोस्ट-रेड घूस- हफ्ता वसूली। पोस्ट-रेड घूस की कीमत- 1853 रुपए। 4- फर्जी कंपनियां- मनी लॉन्ड्रिंग। फर्जी कंपनियों की कीमत- 419 करोड़। अगर वे जीते और इलेक्टोरल बॉन्ड फिर से लेकर आए तो इस बार कितना लूटेंगे?</p>
<p class=""><strong>कपिल सिब्बल ने कहा-</strong> मैं निर्मला सीतारमण का सम्मान करता हूं। एक इंटरव्यू में वे कह रही हैं कि इलेक्टोरल बॉन्ड को फिर से लाएंगे। उन्होंने ये भी कहा कि जब पहली बार ये स्कीम ट्रांसपेरेंसी को ध्यान में रखकर लाई गई थी। सुप्रीम कोर्ट कह चुका है कि इसमें पारदर्शिता नहीं थी। वे (सरकार) इसे नॉन-ट्रांसपेरेंट तरीके से लेकर आए। अब समस्या है कि उनके पास इस चुनाव के लिए तो पैसा है, लेकिन वे ये भी जानते हैं कि अगर हार गए तो भी पैसे की जरूरत होगी। मैं मोहन भागवत से पूछना चाहता हूं कि वे इस मुद्दे पर खामोश क्यों हैं।</p>
<p class=""><strong>सुप्रीम कोर्ट ने कहा था- कंपनियों की ओर से की गई फंडिंग व्यापार</strong><br />
सुप्रीम कोर्ट ने 15 फरवरी को इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी थी। शीर्ष कोर्ट ने स्कीम को असंवैधानिक करार दिया था। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा था, &#8216;पॉलिटिकल प्रोसेस में राजनीतिक दल अहम यूनिट होते हैं। वोटर्स को चुनावी फंडिंग के बारे में जानने का अधिकार है, जिससे मतदान के लिए सही चयन होता है।&#8217;</p>
<p class="">सुप्रीम कोर्ट ने सबसे ज्यादा चंदा देने वाली कंपनियों पर कहा था- किसी एक व्यक्ति की ओर से दिए गए चंदे के मुकाबले किसी कंपनी की ओर से की गई फंडिंग का राजनीतिक प्रक्रिया पर ज्यादा असर हो सकता है। कंपनियों की ओर से की गई फंडिंग शुद्ध रूप से व्यापार होता है। चुनावी चंदे के लिए कंपनी एक्ट में संशोधन मनमाना और असंवैधानिक कदम है।</p>
<p class=""><strong>इलेक्टोरल बॉन्ड से भाजपा को सबसे ज्यादा फंडिंग</strong><br />
2018 से अब तक इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए सबसे ज्यादा चंदा भाजपा को मिला। 6 साल में चुनावी बॉन्ड से भाजपा को 6337 करोड़ की चुनावी फंडिंग हुई। कांग्रेस को 1108 करोड़ चुनावी चंदा मिला।</p>
<div class="f3e032cb "><picture class="c62bd949  "><source srcset="https://images.bhaskarassets.com/webp/thumb/360x0/web2images/521/2024/04/20/party-electoral_1713615501.jpg" type="image/webp" media="(max-width: 768px)" /><source srcset="https://images.bhaskarassets.com/webp/thumb/512x0/web2images/521/2024/04/20/party-electoral_1713615501.jpg" type="image/webp" media="(min-width: 768px)" /></picture></div>
<p class=""><strong>चुनावी बॉन्ड क्या है?</strong></p>
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<p class="">2017 के बजट में उस वक्त के वित्त मंत्री अरुण जेटली ने चुनावी या इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम को पेश किया था। 2 जनवरी 2018 को केंद्र सरकार ने इसे नोटिफाई किया। ये एक तरह का प्रोमिसरी नोट होता है। जिसे बैंक नोट भी कहते हैं। इसे कोई भी भारतीय नागरिक या कंपनी खरीद सकती है।</p>
<p class="">अगर आप इसे खरीदना चाहते हैं तो आपको ये स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की चुनी हुई ब्रांच में मिल जाएगा। इसे खरीदने वाला इस बॉन्ड को अपनी पसंद की पार्टी को डोनेट कर सकता है। बस वो पार्टी इसके लिए एलिजिबल होनी चाहिए।</p>
<p class=""><strong>क्या है पूरा मामला</strong><br />
इस योजना को 2017 में ही चुनौती दी गई थी, लेकिन सुनवाई 2019 में शुरू हुई। 12 अप्रैल 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने सभी पॉलिटिकल पार्टियों को निर्देश दिया कि वे 30 मई, 2019 तक में एक लिफाफे में चुनावी बॉन्ड से जुड़ी सभी जानकारी चुनाव आयोग को दें। हालांकि, कोर्ट ने इस योजना पर रोक नहीं लगाई।</p>
<p class="">बाद में दिसंबर, 2019 में याचिकाकर्ता एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) ने इस योजना पर रोक लगाने के लिए एक आवेदन दिया। इसमें मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से बताया गया कि किस तरह चुनावी बॉन्ड योजना पर चुनाव आयोग और रिजर्व बैंक की चिंताओं को केंद्र सरकार ने दरकिनार किया था।</p>
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		<item>
		<title>PM मोदी इलेक्टोरल बॉन्ड पर पहली बार बोले</title>
		<link>https://www.mediahousempcg.com/pm-modi-spoke-for-the-first-time-on-electoral-bonds/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[mediahousempcg]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 01 Apr 2024 06:24:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[इलेक्टोरल बॉन्ड]]></category>
		<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[देश- विदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[लोकसभा चुनाव 2024]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>PM नरेंद्र मोदी पहली बार इलेक्टोरल बॉन्ड के मुद्दे पर बोले। उन्होंने कहा कि 2014 के पहले भी चुनावों में खर्चा होता था। तब कौन-सा पैसा कहां से आया और किसने खर्च किया, इसकी जानकारी नहीं मिलती थी। कोई भी सिस्टम परफेक्ट नहीं होता। कमियों को सुधारा जा सकता है। PM मोदी ने ये बातें &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p class="">PM नरेंद्र मोदी पहली बार इलेक्टोरल बॉन्ड के मुद्दे पर बोले। उन्होंने कहा कि 2014 के पहले भी चुनावों में खर्चा होता था। तब कौन-सा पैसा कहां से आया और किसने खर्च किया, इसकी जानकारी नहीं मिलती थी। कोई भी सिस्टम परफेक्ट नहीं होता। कमियों को सुधारा जा सकता है।</p>
<p class="">PM मोदी ने ये बातें तमिलनाडु के न्यूज चैनल थांथी टीवी को दिए एक घंटे के इंटरव्यू में कहीं। प्रधानमंत्री से पूछा गया था कि क्या इलेक्टोरल बॉन्ड का डेटा पब्लिक होने से पार्टी को झटका लगा है? रविवार (31 मार्च) को भाजपा ने यूट्यूब चैनल पर इस इंटरव्यू को जारी किया।</p>
<p class="">प्रधानमंत्री ने कहा, &#8220;मोदी ने इलेक्टोरल बॉन्ड की स्कीम बनाई तो पता चल पा रहा है कि कौन-सा पैसा किसने कब और किसको दिया। जो लोग डेटा पब्लिक होने को लेकर हल्ला मचा रहे हैं, उन्हें बाद में अफसोस होगा।&#8221;</p>
<p class="">PM से पूछा गया कि विपक्ष सरकार पर ED-CBI के गलत इस्तेमाल करने आरोप लगा रहा है। इस पर PM ने कहा- हमने ED की स्थापना नहीं की, न ही हमारी सरकार PMLA कानून लाई है।</p>
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		<item>
		<title>दीपक बैज बोले- इलेक्टोरल बॉन्ड से बेनकाब हुई बीजेपी</title>
		<link>https://www.mediahousempcg.com/deepak-baij-said-bjp-exposed-through-electoral-bonds/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[mediahousempcg]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 19 Mar 2024 11:45:36 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[इलेक्टोरल बॉन्ड]]></category>
		<category><![CDATA[कांग्रेस]]></category>
		<category><![CDATA[छत्तीसगढ़]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[रायपुर]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने इलेक्टोरल बॉन्ड को लेकर बीजेपी पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने इसे बहुत बड़ा घोटाला बताते हुे कहा कि चुनावी चंदे के इस खेल में भारतीय जनता पार्टी बेनकाब हो चुकी है। बैज ने चुनाव आयोग से बीजेपी की मान्यता रद्द करने की मांग की है। दीपक बैज &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p class="">छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने इलेक्टोरल बॉन्ड को लेकर बीजेपी पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने इसे बहुत बड़ा घोटाला बताते हुे कहा कि चुनावी चंदे के इस खेल में भारतीय जनता पार्टी बेनकाब हो चुकी है। बैज ने चुनाव आयोग से बीजेपी की मान्यता रद्द करने की मांग की है।</p>
<p class="">दीपक बैज ने कहा कि मैं सुप्रीम कोर्ट को धन्यवाद देता हूं। कोर्ट की मदद से चुनावी चंदे की जानकारी सार्वजनिक हो पाई। इसमें केंद्र सरकार की मिलीभगत है। बीजेपी की पोल इससे खुल गई है।</p>
<p class=""><strong>केंद्रीय जांच एजेंसियों का खुलेआम दुरुपयोग</strong></p>
<p class="">बैज ने कहा कि चुनावी चंदे में बहुत बड़ा घोटाला हुआ है। बीजेपी की सरकार ने केंद्रीय जांच एजेंसियों का खुलेआम दुरुपयोग किया है। केंद्रीय जांच एजेंसियों को वसूली का टारगेट दिया गया। पहला जांच कराई जाती है और फिर बड़े-बड़े उद्योगपतियों से वसूली की जाती है। जिन कंपनियों ने चंदा दिया, उसे बाद में काम का ठेका दिया गया।</p>
<p class="">बस्तर सांसद ने कहा कि केंद्र सरकार इसे छुपाना चाहती थी लेकिन चुनावी चंदा घोटाला अब तक सबसे बड़ा घोटाला है। बीजेपी ने इस बॉन्ड के जरिए हफ्ता वसूली का काम शुरू कर दिया है। एजेंसियों को वसूली एजेंट बना दिया गया है।</p>
<p class=""><strong>बीजेपी की मान्यता रद्द होनी चाहिए</strong></p>
<p class="">दीपक बैज ने बीजेपी की मान्यता रद्द करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि मान्यता रद्द कर पार्टी के चुनाव लड़ने पर रोक लगानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में टीका बनाने वाली दवा कंपनियों से भी वसूली की जा रही है। पहले कंपनियों पर रेड होती है फिर उन्हीं से चंदा वसूली होती है। बीजेपी आजकल चंदा दे दो और धंधा ले लो का काम कर रही है।</p>
<p class=""><strong>इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदने वालों को बड़े प्रोजेक्ट दिए गए</strong></p>
<p class="">कई कंपनियों ने पहले इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदे, फिर उन्हें बड़े-बड़े प्रोजेक्ट दिए गए। आयकर विभाग ने शिरडी साईं कंपनी पर छापा मारा, फिर उन्होंने इलेक्टोरल बॉन्ड में दान दिया। बैज ने कंपनियों के नाम गिनाते हुए कहा कि ये रिश्वतखोरी का बड़ा जरिया बन गया है।</p>
<p class=""><strong>पीएम केयर फंड की जानकारी सार्वजनिक नहीं</strong></p>
<p class="">प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि पीएम केयर फंड की जानकारी आज तक देश की जनता के पास नहीं है। अगर जानकारी सार्वजनिक हो जाए, तो देश के सबसे बड़े घोटाले का पर्दाफाश होगा।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>SC ने कहा- 21 मार्च तक सारी जानकारी दे SBI</title>
		<link>https://www.mediahousempcg.com/sc-said-to-give-all-information-to-sbi-by-21st-march/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[mediahousempcg]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 18 Mar 2024 08:57:21 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[इलेक्टोरल बॉन्ड]]></category>
		<category><![CDATA[देश- विदेश]]></category>
		<category><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (18 मार्च) को SBI से कहा कि वह इलेक्टोरल बॉन्ड से जुड़ी हर जानकारी 21 मार्च तक दे। सुप्रीम कोर्ट ने नए आदेश में उन यूनीक बॉन्ड नंबर्स के खुलासे का भी आदेश दिया, जिनके जरिए बॉन्ड खरीदने वाले और फंड पाने वाली राजनीतिक पार्टी का लिंक पता चलता है। सुप्रीम &#8230;</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p class="">सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (18 मार्च) को SBI से कहा कि वह इलेक्टोरल बॉन्ड से जुड़ी हर जानकारी 21 मार्च तक दे। सुप्रीम कोर्ट ने नए आदेश में उन यूनीक बॉन्ड नंबर्स के खुलासे का भी आदेश दिया, जिनके जरिए बॉन्ड खरीदने वाले और फंड पाने वाली राजनीतिक पार्टी का लिंक पता चलता है।</p>
<p class="">सुप्रीम कोर्ट ने कहा- 21 मार्च की शाम 5 बजे तक SBI के चेयरमैन एक एफिडेविट भी दाखिल करें कि उन्होंने सारी जानकारी दे दी है। CJI चंद्रचूड़ की बेंच ने कहा कि CBI जानकारियों का खुलासा करते वक्त सिलेक्टिव नहीं हो सकता। इसके लिए आप हमारे आदेश का इंतजार न करें।</p>
<p class="">CJI ने कहा- SBI चाहती है हम ही उसे बताएं किसका खुलासा करना है, तब वे बताएंगे। ये रवैया सही नहीं है। बॉन्ड के यूनीक नंबर्स न होने पर कोर्ट ने 16 मार्च को स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) को नोटिस देकर 18 मार्च तक जवाब मांगा था। कोर्ट ने चुनाव आयोग को भी SBI से मिली जानकारी तुरंत अपलोड करने निर्देश दिया है।</p>
<p class="">बेंच ने 11 मार्च के फैसले में SBI को बॉन्ड की पूरी डिटेल देने का निर्देश दिया था। हालांकि, SBI ने सिर्फ बॉन्ड खरीदने और कैश कराने वालों की जानकारी दी। इस बात का खुलासा नहीं किया गया था कि किस डोनर ने किस राजनीतिक पार्टी को कितना चंदा दिया।</p>
<p class=""><strong>राजनीतिक पार्टियों ने मांगे बॉन्ड्स के यूनीक </strong><strong>नंबर्स</strong><br />
चुनाव आयोग की वेबसाइट पर मौजूद डेटा के मुताबिक, कुछ राजनीतिक पार्टियों ने SBI से बॉन्ड्स के यूनीक नंबर्स मांगे हैं। तृणमूल कांग्रेस ने कहा है कि उसे नंबर्स चाहिए ताकि वह सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन कर सके। भाजपा ने SBI से ऐसी कोई अपील नहीं की है।</p>
<p class="">बहुजन समाज पार्टी ने कहा कि उसे चुनावी बॉन्ड के जरिए कोई चंदा नहीं मिला है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने भी कहा कि उसे भी इलेक्टोरल बॉन्ड्स से चंदा नहीं मिला। कांग्रेस ने कहा कि वह SBI द्वारा चुनाव आयोग को दिया गया डेटा जारी करेगी।</p>
<p class=""><strong>BJP ने सबसे ज्यादा 6,986 करोड़ के बॉन्ड कैश कराए</strong><br />
चुनाव आयोग ने रविवार (17 मार्च) को अपनी वेबसाइट पर सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री से 16 मार्च को मिला इलेक्टोरल बॉन्ड का नया डेटा अपलोड किया। नए डेटा में फाइनेंशियल ईयर 2017-18 के बॉन्ड्स की जानकारी शामिल है।</p>
<p class="">डेटा के मुताबिक, भाजपा ने कुल 6 हजार 986 करोड़ रुपए के चुनावी बॉन्ड कैश कराए हैं। पार्टी को 2019-20 में सबसे ज्यादा 2 हजार 555 करोड़ रुपए मिले हैं। वहीं, DMK को इलेक्टोरल बॉन्ड के माध्यम से 656.5 करोड़ रुपए मिले, जिसमें लॉटरी किंग सैंटियागो मार्टिन के फ्यूचर गेमिंग से 509 करोड़ रुपए भी शामिल हैं।</p>
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		<item>
		<title>SBI ने चुनाव आयोग को भेजी इलेक्टोरल बॉन्ड की जानकारी</title>
		<link>https://www.mediahousempcg.com/sbi-sent-electoral-bond-information-to-election-commission/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[mediahousempcg]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 12 Mar 2024 14:42:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्य खबरें]]></category>
		<category><![CDATA[इलेक्टोरल बॉन्ड]]></category>
		<category><![CDATA[देश- विदेश]]></category>
		<category><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने मंगलवार को इलेक्टोरल बॉन्ड्स का पूरा डेटा चुनाव आयोग को भेज दिया है. सोमवार (11 मार्च) को अपने आदेश में कोर्ट ने कहा था कि आज मंगलवार शाम पांच बजे तक SBI चुनावी बांड का सारा डाटा चुनाव आयोग को दे दे और 15 मार्च तक चुनाव आयोग को आंकड़े &#8230;</p>
<p>The post <a rel="nofollow" href="https://www.mediahousempcg.com/sbi-sent-electoral-bond-information-to-election-commission/">SBI ने चुनाव आयोग को भेजी इलेक्टोरल बॉन्ड की जानकारी</a> appeared first on <a rel="nofollow" href="https://www.mediahousempcg.com">MEDIA HOUSE MPCG</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने मंगलवार को इलेक्टोरल बॉन्ड्स का पूरा डेटा चुनाव आयोग को भेज दिया है. सोमवार (11 मार्च) को अपने आदेश में कोर्ट ने कहा था कि आज मंगलवार शाम पांच बजे तक SBI चुनावी बांड का सारा डाटा चुनाव आयोग को दे दे और 15 मार्च तक चुनाव आयोग को आंकड़े अपनी वेबसाइट पर अपलोड करना होगा. साथ ही कोर्ट ने आदेश दिया था कि एसबीआई 12 मार्च को कामकाजी घंटे खत्म होने तक इलेक्टोरल बॉन्ड की पूरी जानकारी चुनाव आयोग को दे.</p>
<p>सीजेआई डी वाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने चुनाव आयोग को भी एसबीआई द्वारा साझा की गई जानकारी 15 मार्च को शाम पांच बजे तक अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित करने का निर्देश दिया था. अब एसबीआई द्वारा डेटा भेजे जाने के बाद चुनाव आयोग को यह 15 मार्च तक अपनी वेबसाइट पर पब्लिश करना होगा.</p>
<p>सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई डी वाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने चुनाव आयोग को भी एसबीआई द्वारा साझा की गई जानकारी 15 मार्च को शाम पांच बजे तक अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित करने का निर्देश दिया है. इसलिए अब जब एसबीआई द्वारा डेटा चुनाव आयोग को भेज दिया गया है तो इसे 15 मार्च तक अपनी वेबसाइट पर पब्लिश करना होगा.</p>
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		<title>SC का आदेश-SBI कल तक दे इलेक्टोरल बॉन्ड का डेटा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[mediahousempcg]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 11 Mar 2024 10:14:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट]]></category>
		<category><![CDATA[इलेक्टोरल बॉन्ड]]></category>
		<category><![CDATA[SBI]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>इलेक्टोरल बॉन्ड की जानकारी देने से जुड़े केस में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की याचिका पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने करीब 40 मिनट में फैसला सुना दिया। SBI ने कोर्ट से कहा- बॉन्ड से जुड़ी जानकारी देने में हमें कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन इसके लिए कुछ समय चाहिए। इस पर CJI डीवाई &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p class="">इलेक्टोरल बॉन्ड की जानकारी देने से जुड़े केस में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की याचिका पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने करीब 40 मिनट में फैसला सुना दिया। SBI ने कोर्ट से कहा- बॉन्ड से जुड़ी जानकारी देने में हमें कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन इसके लिए कुछ समय चाहिए। इस पर CJI डीवाई चंद्रचूड़ ने पूछा- पिछली सुनवाई (15 फरवरी) से अब तक 26 दिनों में आपने क्या किया?</p>
<p class="">करीब 40 मिनट की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की संविधान पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा- SBI 12 मार्च तक सारी जानकारी का खुलासा करे। इलेक्शन कमीशन सारी जानकारी को इकट्ठा कर 15 मार्च शाम 5 बजे तक इसे वेबसाइट पर पब्लिश करे।</p>
<p class="">सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की संविधान पीठ ने 15 फरवरी को इलेक्टोरल बॉन्ड की बिक्री पर रोक लगा दी थी। साथ ही SBI को 12 अप्रैल 2019 से अब तक खरीदे गए इलेक्टोरल बॉन्ड की जानकारी 6 मार्च तक इलेक्शन कमीशन को देने का निर्देश दिया था।</p>
<p class="">4 मार्च को SBI ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाकर इसकी जानकारी देने के लिए 30 जून तक का वक्त मांगा था। इसके अलावा कोर्ट एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की उस याचिका पर भी सुनवाई की, जिसमें 6 मार्च तक जानकारी नहीं देने पर SBI के खिलाफ अवमानना का केस चलाने की मांग की गई थी।</p>
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